PMEGP योजना …25 लाख के लोन से ‘गुड़ क्वीन’ बनीं सोमा, 4 राज्यों तक फैला कारोबार…

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25 लाख के लोन से ‘गुड़ क्वीन’ बनीं सोमा, 4 राज्यों तक फैला कारोबार

लखीमपुर-खीरी की बेटी ने पारंपरिक काम को बनाया आधुनिक बिजनेस, हर महीने 80-90 हजार की कमाई

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खेरी जिले के छोटे से गांव सिंगहाखुर्द की रहने वाली सोमा गुप्ता ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल बन चुकी हैं। महज 25 लाख रुपये के सरकारी लोन से शुरू हुआ उनका गुड़ उद्योग अब चार राज्यों तक फैल चुका है और उन्हें हर महीने 80 से 90 हजार रुपये की आय दे रहा है। सोमा की यह सफलता कहानी न सिर्फ आत्मनिर्भरता का उदाहरण है, बल्कि यह दिखाती है कि सही योजना और मजबूत इरादों से गांव की महिलाएं भी बड़े स्तर पर उद्योग खड़ा कर सकती हैं।

PMEGP योजना से मिली उड़ान

सोमा गुप्ता ने वर्ष 2022 में PMEGP के तहत 25 लाख रुपये का ऋण लिया। यह योजना खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड और जिला उद्योग केंद्र के सहयोग से चलाई जाती है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। इस पूंजी से सोमा ने एक आधुनिक गुड़ कोल्हू उद्योग की स्थापना की। सरकारी सब्सिडी और तकनीकी मार्गदर्शन ने उनके छोटे से प्रयास को बड़े बिजनेस में बदल दिया।

रोज 18 क्विंटल गुड़ का उत्पादन

सोमा का उद्योग आज बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। सीजन के दौरान उनके प्लांट में प्रतिदिन करीब 18 क्विंटल गुड़ का उत्पादन होता है। वे खुद 6 एकड़ जमीन पर गन्ने की खेती करती हैं और साथ ही आसपास के किसानों से भी गन्ना खरीदती हैं। इससे न सिर्फ उनके उद्योग को कच्चा माल मिलता है, बल्कि स्थानीय किसानों को भी उनकी फसल का अच्छा दाम मिलता है।

गांव में बढ़ा रोजगार

सोमा का यह कारोबार सिर्फ व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है। उनके उद्योग से गांव के कई लोगों को रोजगार मिला है। उत्पादन, पैकेजिंग और परिवहन जैसे कामों में स्थानीय लोग जुड़े हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

चार राज्यों तक पहुंचा ‘सोमा का गुड़’

गुणवत्ता और शुद्धता के दम पर सोमा का गुड़ अब Uttar Pradesh के अलावा Bihar, Jharkhand और West Bengal तक पहुंच चुका है। उनका ब्रांड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और बाजार में इसकी अच्छी मांग है। यही वजह है कि उनका कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है।

कमाई में जबरदस्त उछाल

सभी खर्चों को निकालने के बाद सोमा गुप्ता हर महीने 80,000 से 90,000 रुपये की शुद्ध आय कमा रही हैं। यह आमतौर पर शहरों की अच्छी नौकरी के बराबर है। उनकी यह उपलब्धि यह साबित करती है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो गांव में रहकर भी आर्थिक रूप से मजबूत बना जा सकता है।

PMEGP बना गेमचेंजर

PMEGP योजना आज हजारों युवाओं और महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है। इस योजना के तहत विनिर्माण क्षेत्र में 50 लाख रुपये तक और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट पर सब्सिडी मिलती है। सोमा जैसी कई महिलाएं इस योजना का लाभ उठाकर खुद का व्यवसाय शुरू कर रही हैं और दूसरों के लिए भी रोजगार पैदा कर रही हैं।

सोमा गुप्ता की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि बदलते ग्रामीण भारत की तस्वीर है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर हौसला और सही अवसर मिले तो बड़ा मुकाम किया जा सकता है हासिल। उनकी यह सफलता ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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