भौतिकी में नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव के साथ सीएमजी का विशेष साक्षात्कार

चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) ने हाल में चीन की राजधानी पेइचिंग में
भौतिकी में नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव का इंटरव्यू किया।
ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञानिक कॉन्स्टेंटिन
नोवोसेलोव और आंद्रे गेम ने वर्ष 2004 में ग्राफीन का आविष्कार किया।

ग्राफीन द्वि-आयामी क्रिस्टल है, जो सिर्फ़ एक कार्बन परमाणु जितना मोटा है,
स्टील से 200 गुना ज़्यादा मज़बूत है और इसमें बिजली व गर्मी को बहुत अच्छी
तरह से गुज़ारने की क्षमता है। इसलिए दोनों वैज्ञानिकों को वर्ष 2010 में
भौतिकी में नोबेल पुरस्कार मिला।

इंटरव्यू में कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने कहा कि कई सालों के विकास
के बाद हाल के वर्षों में ग्राफीन फिर एक बार तेज़ी से विकास के दौर में
गुजर रहा है। अब ग्राफीन का व्यापक इस्तेमाल ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स और
दूरसंचार आदि क्षेत्रों में किया जा रहा है। यह रोमांचक है।

नोवोसेलोव ने कहा कि चीन एक बड़ा देश है। तमाम क्षेत्रों में चीन की
तकनीकी क्षमता मजबूत है। चीन में कच्चा माल सप्लाई करने की क्षमता है।
इससे भी अहम बात यह है कि चीन के पास प्रतिभा का विशाल भंडार है। चीन में
ग्राफीन तकनीक का विकास अपेक्षाकृत आसान है, क्योंकि चीन में निरंतर और
पूर्ण आपूर्ति श्रृंखला मौजूद है।

नोवोसेलोव ने यह भी कहा कि चीन की तकनीक बेहतरीन है। एआई,
एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी और बैटरी तकनीक में चीन दुनिया में आगे है।
चीन का इलेक्ट्रिक वाहन विश्व में अग्रणी स्तर पर है। तमाम नववोदित क्षेत्रों
में चीन ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

 

 

 

 

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