एक चमकदार किचन क्वार्ट्ज … देखने में खूबसूरत, इस्तेमाल में सुविधाजनक और ग्रेनाइट-मार्बल का सस्ता विकल्प। लेकिन इसी चमकदार पत्थर को काटने वाले मजदूरों के लिए यह जानलेवा साबित हो रहा है। अमेरिका के कैलिफोर्निया में अब इसी खतरे को देखते हुए मैन-मेड क्वार्ट्ज पर प्रतिबंध की तैयारी है।
क्वार्ट्ज की चमक के पीछे छिपा मौत का धूलकण
इंजीनियर्ड या मैन-मेड क्वार्ट्ज में बड़ी मात्रा में क्रिस्टलीय सिलिका होती है। जब इन स्लैब को काटा, घिसा या आकार दिया जाता है तो बेहद महीन सिलिका धूल हवा में फैलती है। यही धूल सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचती है और धीरे-धीरे उन्हें नुकसान पहुंचाती है। समस्या सिर्फ धूल तक सीमित नहीं है। सिलिका के कण फेफड़ों में जाकर शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सक्रिय कर देते हैं। इसके बाद फेफड़ों में दाग और कठोर ऊतक बनने लगते हैं। इसे सिलिकोसिस कहा जाता है।
यह बीमारी धीरे-धीरे फेफड़ों की क्षमता खत्म कर सकती है। कई मामलों में जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है और मरीज को फेफड़े के प्रत्यारोपण तक की जरूरत पड़ सकती है।
कैलिफोर्निया क्यों लगा रहा है बैन?
कैलिफोर्निया में 2019 से अब तक काउंटरटॉप क्वार्ट्ज बनाने वाले श्रमिकों में 657 सिलिकोसिस के मामले और 35 मौतें दर्ज की गई हैं। बढ़ते मामलों और मुकदमों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। राज्य का व्यावसायिक सुरक्षा बोर्ड एक ऐसी आपात व्यवस्था पर विचार कर रहा है, जिसके तहत एक प्रतिशत से ज्यादा क्रिस्टलीय सिलिका वाले निर्मित पत्थर के उत्पादन और स्थापना पर रोक लगाई जा सकती है। अगर यह प्रतिबंध लागू होता है तो कैलिफोर्निया अमेरिका का पहला ऐसा राज्य बन सकता है जो मैन-मेड क्वार्ट्ज पर इस तरह की व्यापक रोक लगाएगा।
सवाल सिर्फ क्वार्ट्ज का नहीं, काम करने के तरीके का भी
इंजीनियर्ड स्टोन उद्योग का आकार करीब 30 अरब डॉलर बताया जाता है। निर्माता और वितरक यह तर्क दे रहे हैं कि क्वार्ट्ज खुद सुरक्षित है और असली समस्या उन छोटी फैब्रिकेशन वर्कशॉप में है, जहां स्लैब को काटकर ग्राहक के किचन के हिसाब से तैयार किया जाता है। लेकिन श्रमिकों, डॉक्टरों और व्यावसायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का दावा इससे अलग है। उनका कहना है कि क्वार्ट्ज को काटने की प्रक्रिया में सिलिका धूल का खतरा इतना गंभीर है कि इसे पूरी तरह सुरक्षित तरीके से करना बेहद मुश्किल है। यही वजह है कि कैलिफोर्निया का फैसला सिर्फ एक उत्पाद पर रोक नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा के पूरे मॉडल पर सवाल बन गया है।
प्रवासी मजदूरों पर सबसे बड़ा खतरा
इस संकट का एक सामाजिक पहलू भी है। कैलिफोर्निया की कई फैब्रिकेशन वर्कशॉप में ऐसे मजदूर काम करते हैं जिनकी आव्रजन स्थिति कमजोर है। ऐसे कर्मचारी अक्सर खराब कामकाजी परिस्थितियों के खिलाफ शिकायत करने से भी बचते हैं। यानी एक तरफ करोड़ों डॉलर का कारोबार और दूसरी तरफ ऐसे श्रमिक, जिनकी रोजी-रोटी उसी काम से जुड़ी है जो उनकी सेहत के लिए खतरा बन रहा है।
दुनिया के लिए भी बड़ा संकेत
कैलिफोर्निया का संभावित फैसला अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। अगर मैन-मेड क्वार्ट्ज पर प्रतिबंध लागू होता है तो दूसरे देश भी सिलिका आधारित इंजीनियर्ड स्टोन के इस्तेमाल और निर्माण नियमों की समीक्षा कर सकते हैं। क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि काउंटरटॉप कितना मजबूत, सुंदर या सस्ता है। सवाल यह है कि उसे बनाने वाला मजदूर सुरक्षित है या नहीं। कैलिफोर्निया में प्रस्तावित बैन इसी बहस को नई दिशा दे रहा है। क्वार्ट्ज की चमक के पीछे छिपी सिलिका धूल अब सिर्फ श्रमिकों की समस्या नहीं रही, बल्कि यह उद्योग, सरकार और उपभोक्ता—तीनों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का बड़ा सवाल बन चुकी है।





