काशी की पहचान सदियों से आध्यात्म, संस्कृति, मंदिर और परंपरा से जुड़ी रही है, लेकिन अब बनारस का यही पारंपरिक हुनर अंतरराष्ट्रीय कारोबार की नई पहचान बनाने की तैयारी में है। ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक होने वाले यूपी इंट रनेशनल ट्रेड शो में वाराणसी के 8 निर्यातक अपने उत्पादों के साथ वैश्विक खरीदारों के सामने होंगे। यह सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि काशी के छोटे और मंझोले कारोबारियों के लिए स्थानीय हुनर को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्लेटफॉर्म बन सकता है।
बनारसी सिल्क से ‘ॐ’ वाले योग शॉल तक
काशी की सबसे बड़ी ताकत उसका सदियों पुराना हस्तशिल्प और बुनकरी का हुनर है। ट्रेड शो में पारंपरिक सिल्क और ब्रोकेड के साथ ऐसे उत्पाद भी प्रदर्शित किए जाएंगे, जो आधुनिक वैश्विक बाजार की जरूरतों के मुताबिक तैयार किए गए हैं। ‘ॐ’ और मंत्रों की छाप वाले योग शॉल, स्कार्फ और गाउन के साथ सिल्क ब्रोकेड के कुशन कवर, टेबल रनर, वॉल हैंगिंग और बेड कवर जैसे उत्पाद काशी की आध्यात्मिक पहचान और आधुनिक जीवनशैली का संगम पेश करेंगे। यानी बनारसी हुनर अब सिर्फ साड़ी या पारंपरिक परिधान तक सीमित नहीं है। डिजाइन और उत्पादों में बदलाव के जरिए इसे नए बाजारों के लिए तैयार किया जा रहा है।
काशी की दूसरी तस्वीर भी दुनिया देखेगी
ट्रेड शो में सिर्फ हस्तशिल्प ही नहीं, बल्कि काशी के आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक उत्पाद भी प्रदर्शित होंगे। करीब 100 प्रतिशत रिसाइकिल पीपी कपड़े से तैयार एफआईबीसी यानी जंबो बैग और मल्टीफिलामेंट यार्न जैसे उत्पाद यह दिखाते हैं कि काशी की अर्थव्यवस्था परंपरा के साथ आधुनिक उद्योग की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
यह बदलाव महत्वपूर्ण है। एक तरफ सदियों पुरानी बुनकरी है तो दूसरी तरफ रिसाइकिल सामग्री से बने औद्योगिक उत्पाद। दोनों मिलकर काशी की ऐसी तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें विरासत और आधुनिक कारोबार साथ-साथ चलते दिखाई देते हैं।
सबसे बड़ा फायदा, बिचौलियों की भूमिका कम होने की उम्मीद
काशी के कारोबारियों के लिए इस ट्रेड शो की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी विदेशी खरीदारों से सीधा संपर्क है। सामान्य तौर पर छोटे उत्पादकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच कई स्तर के बिचौलिये होते हैं। इससे उत्पादक को अंतिम कीमत का सीमित हिस्सा ही मिल पाता है। सीधे खरीदारों से संपर्क बनने पर कारोबारियों को बेहतर बाजार समझने, नए ऑर्डर हासिल करने और अपने ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का मौका मिल सकता है। सरकार की ओर से निर्यातकों को सब्सिडी दिए जाने की बात भी छोटे और मंझोले कारोबारियों के लिए भागीदारी की लागत कम करने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है।
काशी की पहचान अब सिर्फ विरासत नहीं, कारोबार भी
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो काशी के लिए एक बड़ा अवसर इसलिए भी है क्योंकि यहां स्थानीय हुनर को वैश्विक मांग से जोड़ने की कोशिश हो रही है। बनारसी साड़ी, सिल्क, ब्रोकेड, हस्तशिल्प, आध्यात्मिक डिजाइन और पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक उत्पाद अगर विदेशी बाजार में स्थायी ग्राहक बना पाते हैं, तो इसका असर सिर्फ निर्यात के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे बुनकरों, कारीगरों, छोटे उद्यमियों और स्थानीय रोजगार को भी फायदा पहुंच सकता है। काशी की पहचान अब सिर्फ गंगा के घाटों और मंदिरों तक सीमित नहीं रहने वाली। अगर बनारसी हुनर वैश्विक बाजार में मजबूत जगह बनाता है, तो काशी की आध्यात्मिक चमक के साथ उसकी कारोबारी चमक भी दुनिया के सामने दिखाई देगी।