कच्चा तेल 9 डॉलर सस्ता, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, भोपाल में क्या है भाव?

Petrol Diesel Rate Today

कच्चा तेल 9 डॉलर सस्ता, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, भोपाल में क्या है भाव?

भोपाल। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद देश के आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के मोर्चे पर फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। सरकारी तेल कंपनियों ने 5 नवंबर की सुबह 6 बजे ईंधन की नई कीमतें जारी कर दी हैं। देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 9 डॉलर टूटकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कच्चा तेल सस्ता हो रहा है, तो भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती का लाभ क्यों नहीं मिल रहा?

भोपाल में पेट्रोल 114.36 से 114.54 रुपये

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी तेल कंपनियों के पंप पर पेट्रोल की कीमत 114.36 से 114.54 रुपये प्रति लीटर के बीच बताई जा रही है, जबकि डीजल 99.48 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। निजी कंपनी नायरा एनर्जी के पंप पर पेट्रोल 119.81 रुपये और डीजल 102.59 रुपये प्रति लीटर है। यानी अलग-अलग कंपनियों के पंप पर ईंधन की कीमतों में अंतर बना हुआ है।

प्रमुख शहरों में पेट्रोल के भाव

मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये, दिल्ली में 102.12 रुपये, कोलकाता में 113.51 रुपये और चेन्नई में 107.76 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। बिहार में पटना में 113.37 रुपये, भागलपुर में 114.37 रुपये और बेगूसराय में 113.94 रुपये प्रति लीटर कीमत है। झारखंड की राजधानी रांची में पेट्रोल 106.19 रुपये, जबकि लखनऊ में 101.89 रुपये प्रति लीटर है।

डीजल के दाम भी स्थिर

डीजल की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में डीजल 95.20 रुपये, मुंबई में 97.83 रुपये और कोलकाता में 99.82 रुपये प्रति लीटर है। पटना में 99.36 रुपये, भागलपुर में 100.30 रुपये, रांची में 101.31 रुपये और लखनऊ में 95.36 रुपये प्रति लीटर डीजल मिल रहा है।

कच्चा तेल सस्ता, फिर भी राहत क्यों नहीं?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 8.98 डॉलर की गिरावट आई है और यह 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव नतीजों के बाद ईरान युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीदों को भी तेल की कीमतों में गिरावट की एक वजह बताया जा रहा है। लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने और भारतीय पेट्रोल पंपों पर कीमत कम होने के बीच सीधा और तत्काल संबंध नहीं होता।

इसकी बड़ी वजह कच्चे तेल की खरीद, आयात, परिवहन और भंडारण की प्रक्रिया है। भारत में आज इस्तेमाल होने वाला कच्चा तेल जरूरी नहीं कि आज के अंतरराष्ट्रीय भाव पर खरीदा गया हो। इसके सौदे पहले तय हो सकते हैं। इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, केंद्र और राज्य सरकारों के कर, रिफाइनिंग खर्च और तेल कंपनियों के पुराने घाटे की भरपाई भी खुदरा कीमतों को प्रभावित करती है।

आम आदमी की निगाहें अब तेल कंपनियों पर

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद जरूर बढ़ाई है, लेकिन फिलहाल घरेलू बाजार में कीमतें जस की तस हैं। ऐसे में वाहन चालकों, परिवहन कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं की निगाहें अब तेल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी हैं। सवाल यही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की राहत भारतीय उपभोक्ताओं तक कब पहुंचेगी?

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