कर्नाटक में नंदिनी दूध ₹8 प्रति लीटर महंगा, 1 नवंबर से नई कीमतें लागू; किसानों को मिलेगा बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा

कर्नाटक में दूध खरीदने वाले लोगों को अब अपने घरेलू बजट में थोड़ा और पैसा खर्च करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने नंदिनी ब्रांड के दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है, जिसके बाद नीले पैकेट में मिलने वाले बेसिक टोन्ड दूध का भाव 46 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। नई दरें 1 नवंबर से लागू होंगी। इस फैसले का असर रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों पर पड़ेगा, वहीं सरकार का कहना है कि कीमतों में बदलाव से डेयरी किसानों को आर्थिक मदद मिलेगी। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को 6 अक्टूबर को ही मंजूरी दे दी थी, लेकिन विधान परिषद चुनावों के चलते लागू आदर्श आचार संहिता के कारण इसकी घोषणा बाद में की गई। दूध की कीमतों में इस बदलाव को किसानों की आय और डेयरी कारोबार की बढ़ती लागत से जोड़कर देखा जा रहा है।

नंदिनी दूध की नई कीमतें लागू होने से उपभोक्ताओं के मासिक खर्च में होगी बढ़ोतरी
कर्नाटक में नंदिनी दूध की नई दरें लागू होने के बाद ग्राहकों को हर लीटर पर पहले से 8 रुपये अधिक चुकाने होंगे। अभी तक नीले पैकेट वाला बेसिक टोन्ड दूध 46 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, लेकिन 1 नवंबर से इसकी कीमत 54 रुपये हो जाएगी। जिन घरों में प्रतिदिन दो लीटर दूध खरीदा जाता है, उनके खर्च में प्रतिदिन 16 रुपये और 30 दिनों में लगभग 480 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक मासिक खर्च परिवार की दूध खपत पर निर्भर करेगा। दूध रोजमर्रा की जरूरतों का अहम हिस्सा है, इसलिए नई कीमतों का असर खास तौर पर उन परिवारों पर महसूस हो सकता है जिनका बजट पहले से सीमित है।

कीमतों में बढ़ोतरी से मिलने वाले 8 रुपये में से 7 रुपये डेयरी किसानों को दिए जाएंगे
कैबिनेट बैठक के बाद कर्नाटक के मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने बताया कि प्रति लीटर दूध की कीमत में बढ़ाए गए 8 रुपये में से 7 रुपये डेयरी किसानों को मिलेंगे, जबकि शेष 1 रुपया मिल्क यूनियनों के हिस्से में जाएगा। सरकार के मुताबिक, राज्य में करीब 10 लाख किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए डेयरी व्यवसाय पर निर्भर हैं। इन परिवारों के लिए दूध की बिक्री से होने वाली कमाई घर चलाने, रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने और इलाज जैसे खर्चों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सरकार का तर्क है कि कीमतों में बदलाव से किसानों को बेहतर भुगतान मिल सकेगा और उन्हें बढ़ती उत्पादन लागत के बीच आर्थिक सहारा मिलेगा।

पशु आहार, चारा, दवाओं और पैकेजिंग की लागत बढ़ने से मिल्क यूनियनों ने उठाई थी कीमत संशोधन की मांग
नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने के पीछे डेयरी कारोबार से जुड़ी लागत में इजाफे को प्रमुख वजह बताया गया है। मिल्क यूनियनों ने पशुओं के चारे, आहार, दवाइयों, परिवहन और प्लास्टिक पैकेजिंग पर बढ़ते खर्च का हवाला देते हुए कीमतों में संशोधन की मांग की थी। सूखे की स्थिति के कारण चारे की उपलब्धता प्रभावित होने की बात भी सामने रखी गई। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) ने सरकार से दूध के दाम में 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करने का अनुरोध किया था। इसके बाद यूनियन के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात कर अपनी समस्याएं और मांगें रखीं। सरकार ने इस विषय पर लागत से संबंधित विस्तृत आंकड़े जुटाने के निर्देश भी दिए थे।

दूध उत्पादन की लागत और किसानों की कमाई का हिसाब जुटाने के लिए अधिकारियों से मांगी गई थी विस्तृत रिपोर्ट
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अधिकारियों से पिछले 10 वर्षों के दौरान पशु चारे की कीमतों में हुए बदलाव, एक लीटर दूध तैयार करने की लागत और अलग-अलग जिलों में दूध के उत्पादन तथा बिक्री का विवरण मांगा था। इसके साथ ही मिल्क यूनियनों द्वारा किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की मात्रा से संबंधित आंकड़े भी उपलब्ध कराने को कहा गया था। इन जानकारियों के जरिए डेयरी क्षेत्र की वास्तविक लागत और किसानों की आर्थिक स्थिति का आकलन करने की कोशिश की गई। सरकार के सामने एक तरफ किसानों को उचित भुगतान दिलाने की चुनौती थी, तो दूसरी ओर उपभोक्ताओं पर बढ़ने वाले खर्च को भी ध्यान में रखना जरूरी था। इसी पृष्ठभूमि में कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि का फैसला सामने आया।

पिछले कुछ वर्षों में पांचवीं बार बढ़े नंदिनी दूध के दाम, पहले भी बदली जा चुकी हैं कीमतें
नंदिनी दूध की कीमतों में हालिया वृद्धि पिछले कुछ वर्षों में पांचवीं बढ़ोतरी बताई जा रही है। इससे पहले मार्च 2025 में दूध के दाम 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। जून 2024 में कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी और ग्राहकों को प्रत्येक लीटर दूध की खरीद पर 50 मिलीलीटर अतिरिक्त दूध देने की व्यवस्था भी की थी। बाद में अतिरिक्त दूध देने की यह सुविधा समाप्त कर दी गई। अब 1 नवंबर से लागू होने वाली नई दरों के बाद बेसिक टोन्ड दूध की कीमत 46 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव घरेलू खर्च से जुड़ा है, जबकि डेयरी क्षेत्र के किसानों के लिए इसका उद्देश्य बढ़ती लागत के बीच आय को सहारा देना बताया गया है।

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