जयपुर/करौली। राजस्थान के करौली जिले का पांचना बांध पिछले करीब दो दशकों से जल प्रबंधन का नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष का प्रतीक बन गया है। सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया यह बांध आज 74 गांवों के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है। एक ओर कमांड एरिया के 35 गांव हैं, जो नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बांध से जुड़े 39 गांव हैं, जो अपने क्षेत्र में जल संकट की आशंका जताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। मामला इतना गंभीर हो चुका है कि राजस्थान हाईकोर्ट दो बार नहरों में पानी छोड़ने के आदेश दे चुका है, लेकिन आज तक उनका पालन नहीं हो सका।
- पांचना बांध बना विवाद की वजह
- हाईकोर्ट के आदेश भी बेअसर
- 74 गांवों में पानी पर टकराव
- मीणा-गुर्जर आमने-सामने
- सरकार के सामने बड़ी चुनौती
पांचना बांध का निर्माण वर्ष 1972 की भीषण बाढ़ के बाद जल प्रबंधन की योजना के तहत शुरू हुआ था। 1978-79 में निर्माण शुरू होकर 2004-05 में यह परियोजना पूरी हुई। यह बांध भद्रावती, अटा, माची, बरखेड़ा और भैंसावत नदियों का पानी संग्रहित करता है। लगभग 9,985 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई के उद्देश्य से बनी इस परियोजना से करौली और सवाई माधोपुर के किसानों को लाभ मिलना था। वर्ष 1990 से 2005 तक नहरों के माध्यम से किसानों को पानी मिलता भी रहा, लेकिन 2006-07 के बाद विवाद शुरू हो गया।
कमांड एरिया के किसानों का कहना है कि पिछले 20 वर्षों से उन्हें उनके हिस्से का पानी नहीं मिला। उनका आरोप है कि सिंचाई के अभाव में खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर हो गई है, भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और हर वर्ष करोड़ों रुपये का कृषि नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के के आदेश के बाद भी बांध से नहरों में पानी को नहीं छोड़ा जा रहा है।
वहीं बांध के आसपास बसे गांवों के लोगों का तर्क है कि यदि नहरों में पानी छोड़ा गया तो उनके क्षेत्र में जल संकट पैदा हो जाएगा। उनकी मांग है कि सरकार पहले लिफ्ट परियोजना के जरिए पाइपलाइन और पंपिंग सिस्टम से उनके खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था करे। उनका यह भी कहना है कि बांध निर्माण के दौरान उनकी जमीनें अधिग्रहित हुई थीं, इसलिए पानी पर पहला अधिकार उनका होना चाहिए।
समय के साथ यह विवाद केवल पानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और जातीय तनाव का रूप भी लेने लगा। कमांड एरिया में मीणा समुदाय और बांध क्षेत्र में गुर्जर समुदाय की अधिक आबादी होने के कारण यह मुद्दा दोनों समुदायों के बीच संवेदनशील बन गया है। हाल के दिनों में दोनों पक्षों ने अलग-अलग स्थानों पर धरना-प्रदर्शन किए, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई।
स्थिति को संभालने के लिए प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने दोनों पक्षों से बातचीत की। सरकार के आश्वासन के बाद फिलहाल दोनों पक्षों ने अपने धरने समाप्त कर दिए हैं। अब दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों की जयपुर में सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता पर सबकी नजरें टिकी हैं।
प्रशासन का कहना है कि वार्ता के जरिए ऐसा समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है, जिससे दोनों पक्षों के हित सुरक्षित रह सकें। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि क्या 20 वर्षों से चला आ रहा यह जल विवाद आखिरकार समाप्त होगा, या फिर पानी की यह लड़ाई आने वाले समय में फिर नए टकराव का कारण बनेगी।