El Niño Alert: मौसम वैज्ञानिकों का दावा…नवंबर तक धधकेगी धरती! मॉनसून की सुस्ती से 300 जिलों पर सूखे का साया

El Niño Alert

भीषण गर्मी… कमजोर पड़ता मॉनसून… सूखे की आशंका… और अब अल नीनो को लेकर आई नई चेतावनी। दुनिया पहले से रिकॉर्ड तापमान झेल रही है और अब संकेत मिल रहे हैं कि नवंबर तक धरती की तपिश कम होने वाली नहीं है। भारत में भी इसका असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेती, पीने के पानी, पशुपालन और ग्रामीण रोजगार पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने खतरे को देखते हुए 300 से अधिक जिलों को संवेदनशील मानते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं।

अल नीनो ने बढ़ाई चिंता, नवंबर तक रह सकता है असर

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताजा आकलन के अनुसार जून से अगस्त के बीच अल नीनो बनने की संभावना करीब 80 प्रतिशत है, जबकि इसके नवंबर तक बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत से भी अधिक बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अल नीनो मजबूत हुआ तो दुनिया भर में तापमान सामान्य से काफी ऊपर जा सकता है और वर्षा का संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है। इसका सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ेगा जिनकी कृषि मानसून पर निर्भर है।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी—’आग में घी’ साबित होगा अल नीनो

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने साफ शब्दों में कहा है कि अल नीनो पहले से गर्म होती दुनिया में “आग में घी” डालने जैसा होगा। उनके अनुसार—

यानी दुनिया एक और बड़े जलवायु संकट के मुहाने पर खड़ी है।

यूरोप में गर्मी का कहर, भारत भी अछूता नहीं

अल नीनो का असर केवल एशिया तक सीमित नहीं है।

भारत में भी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है।

भारत के 300 जिले खतरे में

पहले केवल 111 जिलों को अधिक संवेदनशील माना जा रहा था। लेकिन अब कृषि मंत्रालय और वैज्ञानिक एजेंसियों के नए आकलन में खतरे का दायरा बढ़कर 300 से अधिक जिलों तक पहुंच गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

यानी देश का बड़ा कृषि क्षेत्र इस संकट की जद में आ सकता है।

ICAR की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि मंत्रालय ने 315 जिलों का वैज्ञानिक अध्ययन किया। रिपोर्ट के अनुसार—

यानी जहां सिंचाई की व्यवस्था कमजोर है, वहां सूखे का खतरा कई गुना अधिक रहेगा।

43 प्रतिशत कम बारिश ने बढ़ाई मुश्किल

भारत मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 27 जून के बीच देश में सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश हुई।

सामान्य वर्षा: 141.8 मिमी

इस वर्ष दर्ज वर्षा: 80.4 मिमी

क्षेत्रवार स्थिति—

यह आंकड़े बताते हैं कि मॉनसून की रफ्तार अभी भी सामान्य नहीं हुई है।

खरीफ फसलों पर सबसे बड़ा खतरा

कम बारिश का सीधा असर खरीफ की खेती पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार—

सरकार का प्लान तैयार

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि संभावित प्रभावित जिलों की पहचान कर राज्यों को पहले ही सतर्क कर दिया गया है। सरकार की तैयारी—

तालाब, चेक डैम और जलाशयों पर फोकस

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि—

उद्देश्य साफ है—यदि बारिश कम भी हो तो उपलब्ध पानी को अधिकतम बचाया जा सके।

पीने के पानी की भी बड़ी चुनौती

सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि—

जानवरों पर भी संकट

कम बारिश का असर केवल इंसानों पर नहीं पड़ेगा।

संभावित संकट—

इसी वजह से सरकार पहले से चारा भंडारण और सप्लाई की योजना तैयार कर रही है।

क्या है अल नीनो?

अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र के पानी का असामान्य रूप से गर्म होना है।

इसके कारण—

भारत में अल नीनो का सबसे बड़ा असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर देखा जाता है।

क्या आगे और बढ़ेगी चिंता?

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि जुलाई के पहले पखवाड़े में मॉनसून सामान्य गति नहीं पकड़ता तो—

अल नीनो अब केवल मौसम विज्ञान का विषय नहीं रह गया है। यह खेती, खाद्य सुरक्षा, पानी, पशुपालन, रोजगार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी राष्ट्रीय चुनौती बनता जा रहा है। दुनिया पहले से रिकॉर्ड गर्मी झेल रही है और भारत में कमजोर मॉनसून ने खतरे की घंटी बजा दी है। आने वाले चार से पांच महीने यह तय करेंगे कि यह केवल मौसम का उतार-चढ़ाव रहेगा या फिर देश को बड़े सूखे और जल संकट का सामना करना पड़ेगा।

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