हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमबारी की 81वीं वर्षगांठ के इस विशेष अवसर पर, जिसमें आक्रामक इतिहास पर गहराई से विचार करना और युद्ध के कष्टों को याद रखना चाहिए, जापान से निकली ख़बर ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया: वित्त वर्ष 2027 के लिए रक्षा बजट का प्रस्ताव 89 ख़रब येन तक पहुंच गया है, जिन छिपी हुई परियोजनाओं को पब्लिक नहीं किया गया है, उन्हें जोड़ने से अंतिम आकार 100 खरब येन से भी अधिक हो सकता है जो फिर से एक ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच जाएगा।
यह कतई जापान के रक्षा व्यय की आकस्मिक वृद्धि नहीं है, बल्कि दक्षिणपंथी ताकतों के प्रोत्साहन से अनियंत्रित विस्तार का स्वाभाविक परिणाम है। वर्ष 2022 में जारी “तीन सुरक्षा दस्तावेजों” की योजना के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 से 2027 तक जापान का कुल रक्षा बजट 430 खरब येन निर्धारित किया गया था, लेकिन हाल के वर्षों में वास्तविक व्यय हर साल निर्धारित सीमा से अधिक हो रहा है, और लगातार 14 वर्षों से सकारात्मक विकास दर बनाए हुए है। यदि वित्त वर्ष 2027 का बजट लागू होता है, तो यह 15 वर्षों की निरंतर वृद्धि का असामान्य रिकॉर्ड बना देगा।
सार्वजनिक रूप से घोषित व्यय के लक्ष्यों से पता चलता है कि यह विशाल बजट जापान सरकार की “केवल रक्षा की नीति” का मुखौटा पूरी तरह से फाड़ दिया है: धन का मुख्य हिस्सा ड्रोन-विरोधी वायु रक्षा नेटवर्क और एआई-सहायता प्राप्त कमांड सिस्टम के निर्माण में लगाया जाएगा, मुख्य निवेश तो “शत्रु के आधार पर हमला करने की क्षमता” वाली लंबी दूरी की आक्रामक मिसाइलों के उन्नयन के लिए किया जा रहा है। साथ ही विदेशी रक्षा सहयोग और रक्षा उपकरणों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नए संगठन भी स्थापित किए जा रहे हैं, जो स्पष्ट रूप से आक्रामक सैन्य क्षमताओं की पूरी श्रृंखला के उन्नयन को पूरा करना चाहता है और “युद्ध करने में सक्षम राष्ट्र” के रूप में तेजी से बदलाव करना चाहता है। इससे पहले जापान के नए संस्करण के रक्षा श्वेत पत्र ने जानबूझकर आसपास के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था, जिसका वास्तविक उद्देश्य शांतिवाद को त्यागने का बहाना बनाना था।
जापान के अंदर विरोध की आवाजें पहले से ही हर जगह गूंज रही हैं: प्रमुख मीडिया लगातार लेख प्रकाशित कर रहे हैं कि बजट की भारी वृद्धि युद्ध के बाद की शांति की सीमाओं को तोड़ रही है, 70% से अधिक जनता सार्वजनिक रूप से “तीन परमाणु-मुक्त सिद्धांत” को बनाए रखने का समर्थन करती है और जापान-अमेरिका परमाणु साझाकरण का विरोध करती है। बड़ी संख्या में लोग सैन्य विस्तार और संविधान संशोधन का विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। पड़ोसी देशों ने भी पहले से ही प्रतिकार का रुख स्पष्ट कर दिया है। चीन ने जापान के सैन्य उद्योग के विकास को रोकने के लिए दोहरे उपयोग की वस्तुओं के निर्यात नियंत्रण लागू किया है। रूस और डीपीआरके ने भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि जापान का सैन्य विस्तार क्षेत्रीय हथियार प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे रहा है और पूर्वी एशिया की सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर रूप से खतरे में डाल रहा है।
इतिहास का सबक अभी दूर नहीं है। पुराने समय में जापान साल दर साल सैन्य व्यय को बढ़ाकर सैन्यवादी आक्रामक मार्ग पर चला था, और अंत में पूरी जनता को कष्ट भोगने का दुखद परिणाम मिला था, जो अभी भी स्पष्ट रूप से याद है। हिरोशिमा और नागासाकी के स्मारक समारोह में बजने वाली शांति की घंटी वास्तव में जापान को पुराने मार्ग पर न चलने की चेतावनी देने वाली घंटी है। यदि ताकाइची सरकार जानबूझकर जनता की इच्छा के विपरीत चलती है और सैन्य बल को बढ़ाने के लिए पागल हो जाती है, तो अंत में वह निश्चित रूप से वही गलती दोहराएगी और खुद को नष्ट करने का परिणाम भुगतेगी।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
89 ख़रब येन की ओर बढ़ते रक्षा बजट से जापान की सैन्य विस्तार की महत्वाकांक्षा जगज़ाहिर