जम्मू-कश्मीर में सर्दियों की आहट के साथ पहाड़ों का नजारा बदलने लगा है। ऊंचाई वाले इलाकों में इस मौसम की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे पर्यटन स्थलों पर खूबसूरती बढ़ गई है। गुलमर्ग स्की रिसॉर्ट से लेकर जोजिला दर्रा, राजदान दर्रा और सिंथन टॉप तक कई क्षेत्रों में बर्फ गिरने से पहाड़ सफेद चादर में ढक गए हैं। बीते 24 घंटों के दौरान बदले मौसम ने स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी सर्दी का एहसास करा दिया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भी बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है। इसके बाद 15 अक्टूबर की दोपहर से मौसम में सुधार होने का अनुमान है। मौसम के इस बदलाव का असर पर्यटन, खेती और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है।
गुलमर्ग में पहली बर्फबारी से खिले पर्यटकों के चेहरे, बर्फ के बीच नाचते और खेलते नजर आए लोग
कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में ताजा हिमपात ने पर्यटकों को रोमांचित कर दिया। सफेद बर्फ से ढकी वादियों के बीच लोग बर्फ के गोले बनाकर खेलते और नाचते दिखाई दिए। कई पर्यटकों ने कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता को अपने लिए यादगार अनुभव बताया। कुछ युवाओं ने कहा कि उन्होंने पहली बार इस तरह बर्फबारी का नजारा देखा है। पहाड़ों पर बर्फ गिरने से गुलमर्ग का दृश्य बेहद आकर्षक हो गया है। हालांकि, मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण पर्यटकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। ऊंचे क्षेत्रों में यात्रा करने से पहले रास्तों और मौसम की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी होगा।
श्रीनगर में 20 डिग्री पहुंचा अधिकतम तापमान, पहलगाम और गुलमर्ग में बढ़ी ठंड
पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को श्रीनगर का अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं पहलगाम में तापमान 14.2 डिग्री और गुलमर्ग में 11.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ठंड बढ़ने के साथ घाटी के लोगों ने गर्म कपड़े पहनने शुरू कर दिए हैं। कश्मीर में सर्दियों के दौरान पहना जाने वाला पारंपरिक ऊनी परिधान ‘फिरन’ भी फिर से लोगों की पसंद बन रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 15 अक्टूबर की दोपहर से परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद है और इसके बाद अगले दस दिनों तक आमतौर पर शुष्क मौसम रह सकता है।
किसानों और सेब उत्पादकों को सतर्क रहने की सलाह, तेज हवाओं और बारिश से फसल प्रभावित होने का खतरा
बदलते मौसम को देखते हुए किसानों और सेब उत्पादकों को अपनी तैयार फसल सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। 15 अक्टूबर तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेज हवाएं, गरज-चमक, बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। ऐसे में कटाई के बाद रखे गए अनाज और सेब को सुरक्षित स्थानों पर रखना जरूरी है। घाटी में धान की कटाई पूरी हो चुकी है, जबकि सेब की करीब 90 प्रतिशत फसल तोड़ी जा चुकी है। किसान अब रबी की फसलों, खासकर तिलहन की बुवाई की तैयारी में जुट रहे हैं। हाल की बारिश से खेतों में नमी बढ़ने के कारण आगामी बुवाई के लिए मदद मिलने की उम्मीद है।
पर्यटकों और पर्वतारोहियों को मौसम देखकर यात्रा करने की सलाह, बर्फबारी से जलस्रोतों को मिल सकता है लाभ
मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए यात्रियों और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पर्वतारोहियों को मौसम सामान्य होने तक ऊंचे पहाड़ी मार्गों पर जाने से बचने को कहा गया है। बर्फबारी और बारिश के कारण कुछ इलाकों में आवाजाही प्रभावित हो सकती है, इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों से जानकारी लेना बेहतर होगा। दूसरी ओर, पहाड़ों पर हुई बर्फबारी और बारिश से झरनों, नदीनुमा धाराओं, झीलों तथा कुओं में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है। इससे आने वाले सर्दियों के महीनों में जल उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। कश्मीर में मौसम का यह बदलाव अब ठंड के नए दौर की शुरुआत का संकेत दे रहा है।





