सीजफायर वार्ता बेनतीजा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना नया टकराव का केंद्र
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष विराम को लेकर हुई अहम बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। वार्ता असफल होने के बाद वैश्विक राजनीति में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रणनीतिक जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते पर नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जिससे मिडिल ईस्ट में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती से बढ़ी हलचल, वैश्विक सप्लाई पर मंडराया खतरा
जानकारी के अनुसार अमेरिका ने होर्मुज क्षेत्र के आसपास अपने दो युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि यहीं से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है। फरवरी के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी सैन्य गतिविधि ईरान के इतने करीब देखने को मिल रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई है।
ईरान पर जहाजों से भारी शुल्क वसूलने का आरोप, अमेरिका चाहता है सुरक्षित मार्ग
अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से भारी शुल्क वसूल रहा है और इस क्षेत्र पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इस मार्ग को सुरक्षित और खुला रखना जरूरी है। अमेरिकी नौसेना के अनुसार एक वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग तैयार करने की कोशिश भी की जा रही है ताकि तेल और गैस की सप्लाई बाधित न हो।
परमाणु कार्यक्रम पर मतभेद बना वार्ता विफल होने की बड़ी वजह
इस्लामाबाद में हुई लंबी बातचीत के दौरान अमेरिका ने ईरान से परमाणु हथियार बनाने की क्षमता छोड़ने और यूरेनियम संवर्धन रोकने की मांग रखी थी। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए स्वीकार नहीं किया। यही मतभेद वार्ता विफल होने का प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है असर, तेल महंगा होने की चिंता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, जिससे खाड़ी देशों का तेल दुनियाभर में पहुंचता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। अगर इस मार्ग में बाधा आती है तो पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। हालिया तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का संकेत देती हैं।
तनाव बढ़ने पर बड़े टकराव की आशंका, दुनिया की नजर हालात पर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में सैन्य गतिविधि बढ़ती है तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। ईरान की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा बाजार पर इसका असर देखने को मिल सकता है।