मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर युद्ध में बदल गया। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले किए, जिससे पहले लागू युद्धविराम खत्म हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक कार्यक्रम में युद्धविराम समाप्त होने की पुष्टि की। युद्ध की खबर सामने आते ही वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई। कच्चे तेल की कीमतों में करीब 6 प्रतिशत का उछाल दर्ज हुआ, जबकि भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।
शेयर बाजार में भारी गिरावट
बुधवार को कारोबार शुरू होते ही निवेशकों में घबराहट साफ दिखाई दी। निफ्टी 50 और सेंसेक्स दोनों प्रमुख सूचकांक दिनभर दबाव में रहे। कारोबार के अंत तक सेंसेक्स में करीब 1900 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी बड़ी कमजोरी के साथ बंद हुआ। लगातार बिकवाली से बाजार में नकारात्मक माहौल बना रहा।
8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान
शेयर बाजार में आई गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 8 लाख करोड़ रुपये घट गया। सबसे अधिक दबाव तेल एवं गैस, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला।
बाजार टूटने की 5 बड़ी वजहें
1. ईरान-अमेरिका युद्ध:
मिडिल ईस्ट में दोबारा शुरू हुए संघर्ष ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिससे दुनियाभर के बाजारों में बिकवाली हुई।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल:
युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े। भारत बड़े आयातक देशों में शामिल है, इसलिए इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ा।
3. कंपनियों के कमजोर नतीजों की आशंका:
वैश्विक तनाव के चलते अप्रैल-जून तिमाही के कारोबारी नतीजे प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे निवेशकों ने पहले ही मुनाफावसूली शुरू कर दी।
4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली:
बढ़ते जोखिम और रुपये की कमजोरी के कारण विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
5. निवेशकों में बढ़ा डर:
वैश्विक अनिश्चितता के कारण बाजार में डर का माहौल बना हुआ है। इसका असर इंडिया VIX पर भी दिखाई दिया, जिसमें तेज उछाल दर्ज किया गया।
फिलहाल निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर बनी हुई है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है।





