पांच सौ के नोटों की गड्डियां कपड़ों में लपेटकर नीले ड्रम में छिपाई गई थीं | प्रयागराज के बरईपुर गांव में पुलिस की कार्रवाई से मचा हड़कंप | आखिर कहां से आई इतनी बड़ी रकम, जांच में जुटी पुलिस
- पड़ोसी से झगड़ा, घर में मिला करोड़ों का खजाना
- नीले ड्रम में छिपा था पांच करोड़ का कैश
- जमीन के नीचे दबा रखी थीं नोटों की गड्डियां
- पांच सौ के नोटों से भरा मिला नीला ड्रम
- एक विवाद ने खोल दिया काली कमाई का राज?
प्रयागराज में एक मामूली पड़ोसी विवाद की जांच करने पहुंची पुलिस के सामने ऐसा राज खुला, जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। जिस घर में पुलिस कुछ दिन पहले हुए झगड़े की पड़ताल करने पहुंची थी, उसी घर के भीतर जमीन में गड़ा करोड़ों रुपये का कथित खजाना मिल गया। नीले रंग के एक ड्रम में पांच सौ रुपये के नोटों की गड्डियां कपड़ों में लपेटकर छिपाई गई थीं। बरामद नकदी की कीमत करीब पांच करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह पैसा आया कहां से और इसे जमीन के नीचे छिपाकर रखने की नौबत क्यों आई?
विवाद की जांच में खुला करोड़ों का राज
मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से करीब 32 किलोमीटर दूर बरईपुर गांव का है। यहां रहने वाले राकेश यादव का पांच-छह दिन पहले अपने कुछ पड़ोसियों से विवाद हो गया था। विवाद इतना बढ़ा कि मामला थाने तक पहुंच गया और राकेश यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसी मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस बुधवार को उसके घर पहुंची थी। पुलिस का मकसद पड़ोसियों के बीच हुए विवाद की जानकारी जुटाना और मामले की पड़ताल करना था, लेकिन घर पहुंचने के बाद परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि जांच का दायरा ही बदल गया।
बताया जा रहा है कि पुलिस की मौजूदगी में राकेश यादव की दरोगा से बहस हो गई। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए घर की परिस्थितियों और अन्य पहलुओं की जांच शुरू की। इसी दौरान घर के भीतर छिपाकर रखी गई भारी नकदी का पता चला। शुरुआती जानकारी में सामने आया कि रकम किसी अलमारी या तिजोरी में नहीं, बल्कि जमीन के भीतर दबाकर रखी गई थी।
नीले ड्रम में मिला नोटों का अंबार
पुलिस के सामने सबसे चौंकाने वाला दृश्य उस वक्त आया, जब जमीन के भीतर छिपाकर रखा गया नीला ड्रम सामने आया। ड्रम के अंदर पांच सौ-पांच सौ रुपये के नोटों की गड्डियां रखी हुई थीं। इन गड्डियों को कपड़ों में लपेटकर सुरक्षित तरीके से छिपाया गया था। देखने में यह किसी सामान्य घरेलू सामान को रखने वाला ड्रम लग सकता था, लेकिन इसके भीतर करोड़ों रुपये की नकदी छिपी थी।
नोटों की इतनी बड़ी मात्रा देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। बरामदगी के बाद रकम की गिनती और उसके वास्तविक मूल्य के आकलन का सवाल महत्वपूर्ण हो गया। शुरुआती तौर पर करीब पांच करोड़ रुपये की नकदी मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, इस रकम के अंतिम आधिकारिक आकलन और बरामदगी से जुड़ी विस्तृत जानकारी की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही होगी।
आखिर किसकी है पांच करोड़ की रकम?
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नकदी के स्रोत को लेकर है। आखिर राकेश यादव के घर में इतनी बड़ी रकम कैसे पहुंची? क्या यह किसी कारोबार से जुड़ी नकदी है, किसी जमीन की खरीद-फरोख्त का पैसा है या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है? इतनी बड़ी रकम को बैंक या किसी वित्तीय संस्थान में रखने के बजाय जमीन में गाड़कर क्यों रखा गया था? क्या रकम को किसी कार्रवाई से बचाने के लिए छिपाया गया था या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है?
ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब पुलिस की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। फिलहाल केवल नकदी की बरामदगी के आधार पर इसे अवैध कमाई या काली कमाई घोषित करना उचित नहीं होगा। रकम के मालिकाना हक, आय के स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच बेहद अहम होगी।
पड़ोसी विवाद से करोड़ों की बरामदगी तक
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि पुलिस को करोड़ों रुपये की मौजूदगी की जानकारी किसी आर्थिक अपराध की शिकायत से नहीं मिली थी। कार्रवाई की शुरुआत एक सामान्य पड़ोसी विवाद की जांच से हुई थी। लेकिन घर में छिपाकर रखी गई नकदी सामने आने के बाद मामला पूरी तरह बदल गया।
अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि रकम किसकी है, इसे कब और किन परिस्थितियों में इकट्ठा किया गया और जमीन के भीतर छिपाने के पीछे क्या मंशा थी। जरूरत पड़ने पर आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल प्रयागराज के बरईपुर गांव में नीले ड्रम से निकली पांच करोड़ रुपये की कथित नकदी चर्चा का विषय बनी हुई है। एक पड़ोसी विवाद ने ऐसा राज खोल दिया, जिसकी कल्पना शायद जांच करने पहुंची पुलिस ने भी नहीं की होगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जमीन के नीचे दबा यह पैसा आखिर किसकी कहानी बयां करता है और जांच में इसके पीछे कौन-सा सच सामने आता है।





