कहते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और अगर इरादे मजबूत हों तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है। इस बात को गुजरात के भरूच की रहने वाली जिगीषा टेलर और उनके बेटे आदित्य कपाड़िया ने सच साबित कर दिखाया है। 45 वर्ष की उम्र में जिगीषा ने अपने 21 वर्षीय बेटे को पढ़ाई करते देखा तो उनके मन में भी फिर से पढ़ने की इच्छा जागी। उन्होंने न केवल किताबें दोबारा उठाईं, बल्कि बेटे के साथ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के प्रतिष्ठित डेटा साइंस और एप्लिकेशन कार्यक्रम में दाखिला लिया। वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बाद मां और बेटे ने एक साथ IIT मद्रास से डिग्री हासिल कर एक प्रेरणादायक मिसाल कायम कर दी।
45 की उम्र में बनीं IITian मां
बेटे संग मां ने रचा इतिहास
सीखने की नहीं होती कोई उम्र
मां-बेटे ने साथ हासिल की डिग्री
IIT मद्रास से प्रेरणा की मिसाल
जिगीषा टेलर का शैक्षणिक जीवन पहले भी शिक्षा से जुड़ा रहा है। उन्होंने करीब 16 वर्षों तक एक इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स फैकल्टी के रूप में विद्यार्थियों को पढ़ाया। वर्ष 2019 में परिवार की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने के लिए उन्होंने अपना शिक्षण कार्य छोड़ दिया। हालांकि, पढ़ने और सीखने का जुनून कभी खत्म नहीं हुआ। कुछ वर्षों तक परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्होंने फिर से पढ़ाई की दुनिया में लौटने का फैसला किया, लेकिन इस बार शिक्षक नहीं बल्कि एक छात्रा के रूप में।
इस प्रेरक यात्रा की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई, जब कोविड-19 महामारी के दौरान उनके बेटे आदित्य कपाड़िया ने IIT मद्रास के ऑनलाइन BS इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशन कार्यक्रम में प्रवेश लिया। डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में रुचि रखने वाले आदित्य इस कोर्स को लेकर बेहद उत्साहित थे और पूरे मन से पढ़ाई कर रहे थे। रोज बेटे को पढ़ते और नई चीजें सीखते देख जिगीषा के मन में भी इस विषय को जानने की उत्सुकता पैदा हुई।
आदित्य ने अपनी मां को भी इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में जिगीषा को संकोच हुआ, क्योंकि लंबे समय बाद पढ़ाई शुरू करना आसान नहीं था। आखिरकार बेटे के उत्साहवर्धन और अपने आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने वर्ष 2022 के अंत में उसी कार्यक्रम में प्रवेश ले लिया। इसके बाद मां और बेटे की शैक्षणिक यात्रा साथ-साथ शुरू हुई।
हालांकि, यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था। वर्षों के अंतराल के बाद गणित, सांख्यिकी और प्रोग्रामिंग जैसे विषयों को दोबारा समझना उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हुआ। घर की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई का संतुलन बनाना भी कठिन था। कई बार देर रात तक ऑनलाइन क्लास, डाउट क्लियरिंग सेशन और असाइनमेंट पूरे करने पड़ते थे। लेकिन जिगीषा ने हार नहीं मानी। लगातार अभ्यास, शिक्षकों के मार्गदर्शन और सहपाठियों के सहयोग से उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने हर चुनौती का सामना किया।
इस दौरान मां और बेटा केवल सहपाठी ही नहीं बल्कि एक-दूसरे के सबसे अच्छे स्टडी पार्टनर भी बन गए। दोनों पढ़ाई के दौरान एक-दूसरे की मदद करते, कठिन विषयों पर चर्चा करते और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते थे। जब जिगीषा किसी परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करतीं तो आदित्य भी और बेहतर अंक लाने की कोशिश करते। वहीं ऑनलाइन परीक्षा, प्रोजेक्ट और वायवा जैसी प्रक्रियाओं को समझने में आदित्य ने अपनी मां का हर कदम पर साथ दिया।
मेहनत का परिणाम भी दोनों को शानदार मिला। आदित्य ने वर्ष 2024 में अपना BS कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया और अब एक निजी कंपनी में डेटा साइंस प्रोफेशनल के रूप में कार्यरत हैं। वहीं जिगीषा ने भी अपना डिग्री कार्यक्रम पूरा कर यह साबित कर दिया कि शिक्षा केवल युवाओं तक सीमित नहीं है। वर्तमान में वह अपने छोटे बेटे की पढ़ाई में सहयोग करने के साथ भविष्य में नई तकनीकों को सीखने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहती हैं।
इस पूरे सफर का सबसे भावुक और यादगार पल IIT मद्रास के दीक्षांत समारोह में आया। जब मंच से मां और बेटे दोनों का नाम एक साथ डिग्री लेने के लिए पुकारा गया तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। यह दृश्य केवल एक परिवार की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की जीत थी जो मानती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
जिगीषा टेलर और आदित्य कपाड़िया की यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जिसने कभी उम्र, जिम्मेदारियों या परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ दिया हो। यह संदेश देती है कि यदि सीखने की ललक, मेहनत करने का जज्बा और परिवार का साथ हो, तो किसी भी उम्र में नई शुरुआत की जा सकती है। मां और बेटे की यह उपलब्धि केवल एक डिग्री हासिल करने की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और आजीवन सीखते रहने की प्रेरणा का जीवंत उदाहरण है।