इंदौर में हादसा: बिल्डिंग गिरने से 2 लोगों की मौत, 12 घायल…पैर काटकर महिला को निकाला!
हादसे ने दहला दिया इंदौर शहर
मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर शहर में सोमवार की रात एक बड़ा हादसा हो गया। यहां जवाहर मार्ग पर रानीपुरा के दौलतगंज इलाके में रात करीब 9.12 बजे तीन मंजिला मकान अचानक ढह गया। धमाके जैसी आवाज से पूरा इलाका दहल गया और कुछ ही देर में चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में एक युवती समेत दो लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि 12 लोग घायल हुए हैं। इनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है।
हादसे के बाद मचा हड़कंप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मकान अचानक तिरछा होकर गिरा और उसमें रह रहे लोग मलबे में दब गए। हादसे के समय घर में महिला, बच्चे और बुजुर्ग मौजूद थे। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस और नगर निगम को सूचना दी और मौके पर पहुंचे। शुरुआती रेस्क्यू में चार से पांच घायलों को बाहर निकाला गया और अस्पताल भेजा गया। देर रात तक राहत कार्य चलता रहा।
बिजली गुल, देर रात तक चला रेस्क्यू
मकान गिरने के बाद इलाके की बिजली गुल हो गई। अंधेरे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बड़ी चुनौती रहा। नगर निगम और पुलिस टीम ने जेसीबी की मदद से मलबा हटाना शुरू किया। रात 12.30 बजे तक 11 घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा चुका था। घायलों में एक महिला को बाहर निकालने के लिए डॉक्टरों को उनका पैर काटना पड़ा। तीन माह की बच्ची और सात साल का बच्चा भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
मलबे में दबे लोगों को निकालने में भारी मशक्कत
पड़ोसियों के मुताबिक मकान मो. उमर का था, जिसमें तीन परिवार रहते थे। निचले हिस्से में दो गोदाम थे, जो हादसे से सवा घंटे पहले बंद हो चुके थे। मकान में कुल 13 लोग मौजूद थे। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए एसडीआरएफ, नगर निगम और पुलिस की टीमों ने रातभर रेस्क्यू चलाया। पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
महिला आफरीन का पैर काटकर निकाला गया
सबसे हृदयविदारक दृश्य तब सामने आया जब 32 वर्षीय आफरीन को मलबे से बाहर निकालना था। उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए एनेस्थिसिया देकर एक पैर काटना पड़ा। इसके बाद उन्हें अस्पताल भेजा गया। इस घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
मृतकों और घायलों की सूची
हादसे में अल्फिया (20) पिता रफीउद्दीन और फहीम की मौत हो गई। अल्फिया का शव देर रात करीब डेढ़ बजे और फहीम का शव मंगलवार सुबह करीब 4 बजे निकाला जा सका।
हादसे में ये लोग हुए घायल
अलताफ (28) पिता रफीउद्दीन
रफीउद्दीन (60) पिता मो. उमर
यासिरा (3 माह) पिता जिया
नबी अहमद (7)
सबीता अंसारी (28) पिता मो. अलताफ
सबीउद्दीन (62) पिता मोहम्मद
सलमा बी (45) पति रफीउद्दीन
आलिया अंसारी (23) पिता मो. जिया उल हक
शाहिदा अंसारी (55) पति शमीउद्दीन
अमीनउद्दीन (45)
आफरीन (32)
सभी घायलों का का इलाज एमवाय अस्पताल में चल रहा है।
प्रशासन ने मोर्चा संभाला
इंदौश्र कलेक्टर शिवम वर्मा ने जानकारी दी कि हादसे के समय मकान में 13 लोग थे। रेस्क्यू ऑपरेशन में प्रशासन की कई टीमें लगीं और रातभर कोशिशें जारी रहीं। पुलिस और निगम के कर्मचारी लगातार मलबा हटाने में जुटे रहे। हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
कारणों की जांच शुरू
हालांकि मकान गिरने के कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पड़ोसियों का कहना है कि मकान काफी जर्जर हो चुका था और लंबे समय से मरम्मत नहीं हुई थी। इलाके के लोगों का आरोप है कि प्रशासन को समय रहते नोटिस जारी कर मकान खाली करवाना चाहिए था। अब नगर निगम ने जांच कमेटी गठित कर पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। इस हादसे के बाद इंदौर शहर में शोक और आक्रोश दोनों देखने को मिले। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुराने और जर्जर मकानों का सर्वे कर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को टाला जा सके। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि घायलों के परिवारजन अस्पताल के बाहर अपनों की सलामती की दुआएं कर रहे हैं। इंदौर का रानीपुरा हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि शहर में जर्जर मकानों की पहचान और उन पर कार्रवाई कितनी जरूरी है। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए चेतावनी है कि लापरवाही किस तरह जिंदगी छीन सकती है। दो मासूम जिंदगियों का जाना और दर्जनभर लोगों का घायल होना पूरे शहर के लिए दुखद और गंभीर सबक है। (प्रकाश कुमार पांडेय)





