इंदिरा एकादशी 2026: पितरों की शांति के लिए ऐसे करें व्रत, जानें पद्म पुराण में बताई विधि
पितृपक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी को सनातन परंपरा में विशेष महत्व दिया गया है। इस वर्ष इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत का पुण्य व्रती के साथ उसके पितरों को भी प्राप्त होता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया इंदिरा एकादशी व्रत पितरों की शांति और मोक्ष की कामना के लिए फलदायी होता है।
दशमी से शुरू होती है तैयारी
पद्म पुराण में वर्णित विधि के अनुसार इंदिरा एकादशी की तैयारी एक दिन पहले यानी आश्विन कृष्ण दशमी से शुरू होती है। दशमी के दिन सुबह स्नान के बाद मध्याह्न में दोबारा स्नान कर सात्विक भोजन करने का विधान बताया गया है। इस दिन एक समय भोजन करने, ब्रह्मचर्य का पालन करने और सात्विक आचरण रखने की बात कही गई है। रात में भूमि पर सोने का भी उल्लेख मिलता है।
एकादशी पर लें व्रत का संकल्प
एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। नित्यकर्म के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें। पितृपक्ष में पड़ने के कारण इस एकादशी में पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण का भी विशेष महत्व बताया गया है। पद्म पुराण में शालिग्राम शिला के समक्ष पितरों के लिए श्राद्ध करने, ब्राह्मणों को भोजन कराने और दक्षिणा देने का विधान बताया गया है।
पितरों के लिए खास विधान
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के निमित्त तैयार किए गए अन्न के पिंड को गाय को खिलाने का विधान है। इसके बाद भगवान विष्णु की धूप, दीप, गंध आदि से पूजा की जाती है। रात्रि में भगवान विष्णु के समीप जागरण करने या उनके मंत्रों का जाप करने की परंपरा भी बताई गई है।
द्वादशी को ऐसे करें पारण
अगले दिन यानी द्वादशी को स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने और दक्षिणा देने का विधान बताया गया है। इसके बाद परिवार के साथ भोजन करके व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक इस विधि से इंदिरा एकादशी का व्रत करने से पितरों की शांति और मोक्ष की कामना पूरी हो सकती है।
इंदिरा एकादशी पर किन बातों का रखें ध्यान?
- एकादशी के दिन चावल का सेवन न करने की धार्मिक परंपरा है।
- क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचने की सलाह दी जाती है।
- व्रत के दौरान सात्विक आचरण और भगवान विष्णु का स्मरण करें।
- एकादशी और द्वादशी के दिन तुलसी दल तोड़ने से बचने की परंपरा है।
- व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करना चाहिए।
इंदिरा एकादशी का मूल संदेश केवल उपवास तक सीमित नहीं है। यह दिन भगवान विष्णु की भक्ति, पितरों के प्रति श्रद्धा, संयम और सेवा-भाव से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा, पितरों का स्मरण और जरूरतमंदों की सहायता करना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।





