उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति आकार ले रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय आज उन विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान दे रहे हैं, जो कभी आर्थिक अभावों के कारण बड़े लक्ष्य हासिल करने की कल्पना भी नहीं कर पाते थे। अब यही विद्यालय प्रदेश के गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए सफलता का मजबूत आधार बनकर उभर रहे हैं।
सर्वोदय विद्यालयों ने रचा सफलता का नया इतिहास, JEE और यूपी बोर्ड में चमके गरीब परिवारों के होनहार
- 11 छात्रों ने JEE Mains में हासिल की सफलता, प्रीति ने JEE Advanced के लिए बनाई जगह
- यूपी बोर्ड परीक्षा में भी सर्वोदय विद्यालयों का शानदार प्रदर्शन
- यूपी के करीब 103 आवासीय विद्यालयों में मिल रही मुफ्त शिक्षा
- आवासीय विद्यालयों में आवास ही नहीं भोजन
- आर्थिक अभाव अब नहीं बनेगा प्रतिभा के रास्ते की बाधा
- समाज कल्याण विभाग के मॉडल को मिल रही राष्ट्रीय पहचान
इस वर्ष 2026 सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई और यूपी बोर्ड परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती। सही मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अवसर मिलने पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
मिर्जापुर जिले के मड़िहान स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय को टाटा एआईजी और एक्स नवोदयन फाउंडेशन के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) सहयोग से ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया गया है। यहां विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष तैयारी भी कराई जाती है। इस पहल के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
इस वर्ष विद्यालय के कुल 11 विद्यार्थियों ने जेईई मेंस परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। इनमें दामिनी पटेल, अंवाला वर्मा, सृष्टि, शिवानी और रागिनी जैसी छात्राओं ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। वहीं छात्रा प्रीति ने जेईई एडवांस्ड के लिए क्वालीफाई कर विद्यालय का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। इतना ही नहीं, प्रीति और दामिनी को आईआईटी मंडी के प्रतिष्ठित बीबीए-एमबीए इंटीग्रेटेड प्रोग्राम के लिए भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सरकारी विद्यालयों के छात्र भी अब देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों तक पहुंच बना रहे हैं।
सिर्फ मिर्जापुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों के विद्यार्थियों ने भी सफलता का परचम लहराया है। देवरिया के विकास यादव और अंकित सिंह, बाराबंकी के अभिषेक मिश्रा, बस्ती के अमित कुमार तथा मिर्जापुर के ऋषिकेश भारती ने भी जेईई में सफलता प्राप्त कर अपने परिवार और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ यूपी बोर्ड परीक्षा में भी सर्वोदय विद्यालयों का प्रदर्शन शानदार रहा है। गाजियाबाद के निडौरी स्थित सर्वोदय विद्यालय की छात्रा अंजलि पुंडीर ने जिले में चौथा स्थान और अंशिका ने छठा स्थान हासिल कर विद्यालय की उपलब्धियों में नया अध्याय जोड़ा। इन दोनों मेधावी छात्राओं को कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा और जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें नकद प्रोत्साहन राशि, मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाया गया।
प्रदेश में वर्तमान समय में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित 103 आवासीय सर्वोदय विद्यालय कार्यरत हैं। इन विद्यालयों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। छात्रों को आधुनिक कक्षाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, छात्रावास, पौष्टिक भोजन, खेलकूद और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसी सुविधाएं बिना किसी शुल्क के प्रदान की जाती हैं।
इन विद्यालयों ने शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर की अवधारणा को मजबूत किया है। जिन सुविधाओं और कोचिंग व्यवस्थाओं तक पहले केवल बड़े शहरों और संपन्न परिवारों के बच्चों की पहुंच होती थी, वही सुविधाएं अब ग्रामीण और वंचित तबके के विद्यार्थियों को भी उपलब्ध हो रही हैं। यही कारण है कि सर्वोदय विद्यालय धीरे-धीरे प्रतिभा संवर्धन के महत्वपूर्ण केंद्र बनते जा रहे हैं।
समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक मेधावी छात्र को आगे बढ़ने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि धन के अभाव में किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी का सपना अधूरा नहीं रहना चाहिए। सर्वोदय विद्यालयों की सफलता इस सोच को साकार करती दिखाई दे रही है।
सर्वोदय विद्यालयों के छात्रों की यह उपलब्धि केवल परीक्षा परिणाम नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे व्यापक बदलाव का प्रतीक है। यह सफलता उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद का संदेश है, जो अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य देना चाहते हैं। आने वाले वर्षों में ये विद्यालय प्रदेश की नई पीढ़ी को सशक्त बनाने और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले केंद्रों के रूप में स्थापित हो सकते हैं।