नहाना भी महंगा! साबुन-शैंपू के बढ़े दामों से मिडिल क्लास का बजट बिगड़ा
देश में बढ़ती महंगाई का असर अब सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाथरूम का बजट भी प्रभावित होने लगा है। रोजाना इस्तेमाल होने वाले साबुन और शैंपू की कीमतों में बढ़ोतरी ने मिडिल क्लास परिवारों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। देश की बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड HUL ने अपने कई लोकप्रिय ब्रांड्स के दाम 3% से 5% तक बढ़ा दिए हैं, वहीं शैंपू की कीमतों में 4% से 6% तक का इजाफा हुआ है।
- रोजमर्रा की जरूरत पर महंगाई की मार
- साबुन-शैंपू के दाम 3% से 6% तक बढ़े
- कच्चे माल और पैकेजिंग लागत बनी वजह
- बाथरूम खर्च में सालाना सैकड़ों रुपये का इजाफा
- कॉम्बो पैक और ऑफर्स से मिल सकती है राहत
इस बढ़ोतरी का सीधा असर उन घरों पर पड़ेगा, जहां हर महीने साबुन और शैंपू की नियमित खपत होती है। नए दामों के अनुसार, 100 ग्राम साबुन पर 2 से 3 रुपये तक की वृद्धि की गई है। लिरिल अब 41 रुपये, पियर्स 52 रुपये और डव के अलग-अलग वेरिएंट 60 से 70 रुपये तक पहुंच गए हैं। कीमतों में इस उछाल के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे माल, खासकर पाम फैटी एसिड की बढ़ती कीमतें हैं। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री जैसे प्लास्टिक और कागज के दामों में 15% से 50% तक की बढ़ोतरी हुई है। दरअसल मिडिल ईस्ट में चल रहे जियो-पॉलिटिकल तनाव के चलते सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित नजर आ रही है। जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ी और इसका असर दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर नजर आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक सामान्य परिवार के मासिक बजट पर इसका असर साफ दिखाई देगा। जहां पहले एक परिवार सालाना सीमित खर्च में काम चला लेता था, अब उसे करीब 200 से 400 रुपये तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
इसके साथ ही मौसम विभाग द्वारा कमजोर मॉनसून का अनुमान भी चिंता बढ़ा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आय घटने की संभावना के चलते खपत पर असर पड़ सकता है, जिससे कंपनियां आगे भी कीमतों में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं के पास कुछ राहत के विकल्प भी मौजूद हैं। कॉम्बो या फैमिली पैक खरीदना, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर मिलने वाले डिस्काउंट का लाभ उठाना और ऑफर के दौरान खरीदारी करना खर्च को कुछ हद तक कम कर सकता है। कुल मिलाकर, महंगाई की यह नई लहर अब आपके नहाने के खर्च को भी प्रभावित करने लगी है, जिससे हर घर का बजट थोड़ा और कसने वाला है।





