गाजा शांति सम्मेलन में ट्रंप का बयान बना चर्चा का विषय
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिस्र में आयोजित गाजा शांति शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने भारत को “महान देश” बताते हुए कहा कि “वहां मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त हैं जिन्होंने शानदार काम किया है।” इस दौरान ट्रंप के ठीक पीछे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खड़े थे और यह सब मुस्कुराते हुए सुन रहे थे। ट्रंप का यह बयान न केवल भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर चर्चा में है, बल्कि भारत-पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थितियों पर भी असर डाल सकता है।
भारत महान देश है, मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं”
ट्रंप ने सम्मेलन के दौरान कहा, “भारत एक महान देश है, जिसके शीर्ष पर मेरा एक बहुत अच्छा मित्र है और उसने बेहतरीन काम किया है।” उन्होंने भारत के नेतृत्व और वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत अब विश्व मंच पर मजबूत स्थिति में खड़ा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि मोदी के नेतृत्व में भारत ने जिस तरह आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर प्रगति की है, वह दुनिया के लिए मिसाल है। उनका यह बयान भारत में चल रहे चुनावी माहौल के बीच भी एक सकारात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप बोले– “टैरिफ से कम हुआ भारत-पाक तनाव”
ट्रंप ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में उन्होंने टैरिफ नीति के जरिए कई देशों के बीच तनाव कम किया, जिनमें भारत और पाकिस्तान भी शामिल थे। उन्होंने कहा, “मैंने दोनों देशों को चेतावनी दी थी कि अगर आप युद्ध की ओर बढ़े, तो हम 100%, 150%, यहां तक कि 200% तक टैरिफ लगा देंगे।” ट्रंप के मुताबिक, उनकी इस चेतावनी के बाद सिर्फ 24 घंटे में हालात सामान्य हो गए और दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि कड़े आर्थिक फैसले कई बार शांति बनाए रखने का बेहतर तरीका साबित होते हैं।
24 घंटे में हालात बदले, युद्ध टला”
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच उस समय हालात बेहद तनावपूर्ण थे—दोनों देशों के बीच सात विमान गिराए गए थे और युद्ध की स्थिति बन गई थी। उन्होंने कहा, “मैंने स्पष्ट कहा कि अगर आप बातचीत नहीं करेंगे, तो हम व्यापार रोक देंगे। बस उसके बाद दोनों देशों के बीच शांति समझौता हो गया।” ट्रंप के इस दावे पर भले ही कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हों, लेकिन उनका बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि अमेरिका उस समय मध्यस्थता के तौर पर सक्रिय था।





