सर्दी-खांसी में नमक वाले गर्म पानी में पैर भिगोना कितना कारगर? डायबिटीज में क्यों बरतें खास सावधानी?

How effective is soaking your feet in hot salted water for a cold and cough

बदलते मौसम में सर्दी-खांसी, गले में खराश और बंद नाक जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। ऐसे में गर्म पानी में नमक डालकर पैर भिगोने का घरेलू उपाय भी खूब बताया जाता है। दावा किया जाता है कि सिर्फ 5 मिनट ऐसा करने से सर्दी-खांसी से राहत मिल सकती है, थकान दूर होती है और नींद बेहतर आती है। लेकिन यहां जरूरी है कि पारंपरिक घरेलू उपाय और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध इलाज के बीच अंतर समझा जाए।

गर्म पानी से मिल सकती है राहत

गर्म पानी में कुछ मिनट पैर रखने से शरीर को गर्माहट और आराम महसूस हो सकता है। इससे दिनभर की थकान कम महसूस होना और रिलैक्सेशन बढ़ना संभव है। सोने से पहले गर्म पानी का इस्तेमाल कुछ लोगों को आराम और बेहतर नींद का अनुभव भी दे सकता है।

लेकिन यह कहना कि पैरों को नमक वाले गर्म पानी में रखने से सर्दी-खांसी को रोका जा सकता है या संक्रमण खत्म हो जाता है, इसके पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। गर्म पानी से मिलने वाली राहत को सर्दी-खांसी का इलाज समझना सही नहीं होगा।

नमक का एंटीबैक्टीरियल दावा कितना सही?

नमक में कुछ परिस्थितियों में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकने की क्षमता होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गर्म नमक पानी में पैर रखने से शरीर के अंदर मौजूद सर्दी-खांसी के संक्रमण पर एंटीबैक्टीरियल असर होने लगेगा।

पैरों की सफाई के लिए नमक वाला पानी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे शरीर के अंदर के संक्रमण को खत्म करने वाला उपचार मानना उचित नहीं है। सर्दी-खांसी के ज्यादातर मामले वायरल संक्रमण से जुड़े होते हैं, जिन पर केवल पैरों को भिगोने से इलाज होने का दावा मजबूत वैज्ञानिक आधार नहीं रखता।

सरसों तेल की मालिश भी इलाज 

गर्म पानी से पैर निकालने के बाद सरसों तेल से मालिश करने की सलाह भी दी जाती है। इससे पैरों में गर्माहट और आराम महसूस हो सकता है, लेकिन यह दावा कि इससे सर्दी-खांसी से बचाव निश्चित रूप से होता है, प्रमाणित चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। यानी इस पूरी प्रक्रिया को आराम देने वाली घरेलू दिनचर्या के रूप में देखा जा सकता है, बीमारी के इलाज के रूप में नहीं।

गरारे ज्यादा सीधे काम के

अगर समस्या गले में खराश या दर्द की है, तो गुनगुने नमक पानी से गरारे करना ज्यादा सीधे तौर पर गले को आराम पहुंचाने वाला घरेलू उपाय माना जाता है। इसी तरह पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना, आराम करना और कमरे में उचित नमी बनाए रखना सर्दी-जुकाम के दौरान मददगार हो सकता है। शहद भी खांसी में कुछ लोगों को राहत दे सकता है। हालांकि एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए। बंद नाक में भाप से कुछ समय के लिए राहत महसूस हो सकती है, लेकिन बहुत गर्म भाप से जलने का खतरा रहता है। पानी में अजवाइन या यूकेलिप्टस ऑयल डालना जरूरी नहीं है और तेज सुगंध वाले तेल कुछ लोगों में जलन या एलर्जी पैदा कर सकते हैं। इसलिए घरेलू उपाय में भी यह सोच जरूरी है कि राहत मिले, नुकसान का जोखिम न बढ़े।

डायबिटीज में क्यों बरतें खास सावधानी?

डायबिटीज वाले लोगों के पैरों में संवेदना कम होने और घाव भरने में परेशानी जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। ऐसे में बहुत गर्म पानी से जलने का पता देर से चल सकता है। इसलिए मधुमेह वाले व्यक्ति बिना चिकित्सकीय सलाह के पैरों को गर्म पानी में भिगोने से बचें। पैर में घाव, कट, संक्रमण या त्वचा की गंभीर समस्या हो तो भी यह उपाय नहीं करना चाहिए।

5 मिनट का उपाय, लेकिन दावे सीमित रखें

गर्म नमक पानी में पैर भिगोना एक पुराने घरेलू उपाय के रूप में आराम और गर्माहट दे सकता है। लेकिन इसे सर्दी-खांसी से बचाने वाला या बीमारी को दूर करने वाला वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपचार बताना सही नहीं होगा। पैरों को गर्म पानी में भिगोना आराम दे सकता है, लेकिन सर्दी-खांसी का इलाज नहीं है। पानी सहने लायक गर्म हो, बहुत गर्म नहीं। डायबिटीज, घाव या पैरों में संवेदना की समस्या हो तो विशेष सावधानी जरूरी है। वहीं तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार बिगड़ती खांसी या लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों में घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

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