मोदी के 25 साल का सफर…जानें मोदी की अगुवाई में कैसी बदली भारतीय राजनीति में पिछले 25 साल में बदली सत्ता और चुनावी समीकरणों की ये कहानी

How communication has evolved

भारतीय राजनीति के पिछले 25 साल सिर्फ सत्ता और चुनावी समीकरणों के बदलाव की कहानी नहीं हैं। यह उस दौर की कहानी भी है, जिसमें नेता और जनता के बीच संवाद का पूरा तरीका बदल गया। कभी राजनीतिक संदेश अखबार, टीवी, रैलियों और सभाओं के जरिए जनता तक पहुंचता था, लेकिन अब वही संवाद कुछ सेकंड में मोबाइल स्क्रीन पर करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन नेताओं में रहे जिन्होंने सोशल मीडिया की राजनीतिक ताकत को शुरुआती दौर में पहचाना। जनवरी 2009 में उन्होंने ट्विटर, जिसे अब एक्स कहा जाता है, पर कदम रखा। 2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने के बाद डिजिटल माध्यम उनके सार्वजनिक संवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता गया। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत के समय भारत में सोशल मीडिया का राजनीतिक प्रभाव आज जैसा नहीं था। लेकिन इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच बढ़ने के साथ सोशल मीडिया धीरे-धीरे राजनीतिक संवाद का बड़ा मंच बन गया। मोदी के एक्स अकाउंट ने जुलाई 2024 में 10 करोड़ फॉलोअर्स का आंकड़ा पार किया। फरवरी 2026 में इंस्टाग्राम पर भी उनके फॉलोअर्स की संख्या 10 करोड़ से ऊपर पहुंच गई।

यही वजह है कि विपक्षी दल भी सोशल मीडिया को राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बना चुके हैं। कांग्रेस समेत अलग-अलग दल एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब के जरिए अपने मुद्दे जनता तक पहुंचा रहे हैं। संसद के भीतर की बहस से लेकर सड़क पर होने वाले आंदोलन तक, हर राजनीतिक गतिविधि का डिजिटल संस्करण तैयार किया जा रहा है। अब सोशल मीडिया सिर्फ नेताओं का प्रचार मंच नहीं, बल्कि राजनीतिक संगठन और निगरानी का माध्यम भी बनता जा रहा है। सांसदों के पोस्ट, फॉलोअर्स, पहुंच और लोगों की प्रतिक्रिया जैसे आंकड़ों पर नजर रखी जा रही है। इसका मतलब साफ है कि राजनीतिक दल अब यह भी देख रहे हैं कि कौन सा नेता डिजिटल माध्यम पर कितने लोगों तक पहुंच रहा है और किस मुद्दे पर कितनी प्रतिक्रिया मिल रही है।

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर युवाओं पर दिखाई देता है। जिस पीढ़ी का बड़ा हिस्सा मोबाइल और सोशल मीडिया पर समय बिताता है, उसके लिए राजनीतिक संवाद का पहला संपर्क भी डिजिटल हो सकता है। नेता की रैली देखने से पहले उसका वीडियो सोशल मीडिया पर दिखाई देता है। भाषण सुनने से पहले उसकी छोटी क्लिप सामने आ जाती है। यही डिजिटल राजनीति की नई ताकत है।
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। सोशल मीडिया की तेज रफ्तार में अधूरी जानकारी, भ्रामक दावे और भावनात्मक सामग्री भी तेजी से फैल सकती है। इसलिए राजनीतिक संवाद के इस नए दौर में पहुंच के साथ विश्वसनीयता भी बड़ी चुनौती बन गई है। कुल मिलाकर पिछले 25 सालों में भारतीय राजनीति का मंच काफी बदल चुका है। चौपाल, पोस्टर और रैली से शुरू हुआ राजनीतिक संवाद अब मोबाइल स्क्रीन, लाइव वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट तक पहुंच चुका है। नरेंद्र मोदी की डिजिटल यात्रा इस बदलाव का एक प्रमुख उदाहरण है, लेकिन अब यह किसी एक नेता तक सीमित नहीं है। भारतीय राजनीति की नई लड़ाई मैदान के साथ-साथ डिजिटल दुनिया में भी लड़ी जा रही है। ( प्रकाश कुमार पांडेय)

Exit mobile version