नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में लंबे समय से जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) एक बार फिर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन रूट्स में गिना जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच बने तनाव तथा इसके बाद लागू की गई समुद्री नाकेबंदी का असर कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा, क्योंकि देश अपनी बड़ी LPG जरूरत खाड़ी देशों से पूरी करता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को किया प्रभावित
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े विवाद के बाद होर्मुज मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में तेजी देखने को मिली। यह समुद्री रास्ता खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से के परिवहन का प्रमुख माध्यम माना जाता है। इसी कारण यहां पैदा हुई किसी भी बाधा का असर सीधे वैश्विक बाजारों पर पड़ता है।
भारत की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आयात करता है। इन देशों से आने वाली अधिकांश गैस होर्मुज मार्ग से होकर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचती है। ऐसे में यदि यह मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाता है, तो गैस आपूर्ति में आने वाली दिक्कतें काफी हद तक दूर हो सकती हैं।
सप्लाई सामान्य होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में स्थिरता लौटती है और समुद्री परिवहन बिना किसी बाधा के शुरू होता है, तो एलपीजी के वैश्विक दामों पर दबाव कम हो सकता है। प्रोपेन और ब्यूटेन जैसे कच्चे ईंधन की उपलब्धता बढ़ने से रिफाइनरियों को भी राहत मिलेगी और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में तत्काल राहत मिलना आसान नहीं
हालांकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आने के बावजूद घरेलू रसोई गैस के दाम तुरंत कम होने की संभावना कम मानी जा रही है। बीते महीनों में वैश्विक स्तर पर बढ़ी लागत का असर तेल विपणन कंपनियों पर पड़ा है और वे लंबे समय से अतिरिक्त वित्तीय दबाव झेल रही हैं। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने में कुछ समय लग सकता है।
कमर्शियल सिलेंडर उपभोक्ताओं को पहले मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक बाजार में गैस की कीमतें नीचे आती हैं, तो सबसे पहले असर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर दिखाई दे सकता है। होटल, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले सिलेंडरों की कीमतों में 200 से 400 रुपये तक की कमी की संभावना जताई जा रही है। इससे व्यापारिक गतिविधियों की लागत कम होने में मदद मिल सकती है।





