मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शहर में बिना अनुमति लगाए जा रहे राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनरों एवं होर्डिंग्स पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में जबलपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा पूर्व में जारी आदेशों और राज्य शासन के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए। इस फैसले के बाद इंदौर में अवैध बैनरों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
यह आदेश एसएस एडवर्टाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड, जबलपुर एवं अन्य की ओर से दायर याचिका के निराकरण के दौरान पारित किया गया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इंदौर में बिना अनुमति बड़ी संख्या में राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के बैनर और होर्डिंग्स लगाए जा रहे हैं, जिससे अधिकृत विज्ञापन संरचनाओं को नुकसान पहुंच रहा है और नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है।
याचिका में राज्य शासन, इंदौर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था।
अधिकृत विज्ञापन संरचनाओं को नुकसान का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विशाल बहेती ने अदालत को बताया कि उनकी संस्था नगर निगम को निर्धारित शुल्क और राजस्व का भुगतान कर वैध रूप से यूनिपोल, लॉलीपॉप और अन्य आउटडोर विज्ञापन संरचनाओं का संचालन करती है। इसके बावजूद कई अवसरों पर इन अधिकृत संरचनाओं पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगा दिए जाते हैं।
याचिका में दावा किया गया कि इससे न केवल विज्ञापन संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है, बल्कि कई मामलों में कैमरों की चोरी, लोहे के ढांचे को क्षति और संपत्ति के नुकसान जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं।
सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता
याचिका में जबलपुर में इसी तरह की एक घटना का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कथित तौर पर एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। इन तथ्यों के आधार पर अवैध बैनरों पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की गई।
24 घंटे में हटाने होंगे अवैध बैनर
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी अवैध राजनीतिक, धार्मिक या सामाजिक बैनर अथवा होर्डिंग की शिकायत मिलती है, तो नगर निगम आयुक्त 24 घंटे के भीतर उसे हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। साथ ही संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस अधीक्षक कानून के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई करेंगे।
इंदौर में बढ़ेगी सख्ती
इंदौर खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जबलपुर डिवीजन बेंच के आदेश ही प्रभावी रहेंगे और राज्य शासन के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा। इस आदेश के बाद माना जा रहा है कि शहर में बिना अनुमति लगाए जाने वाले राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनरों तथा होर्डिंग्स के खिलाफ नगर निगम और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से अभियान चलाएंगे। हाईकोर्ट के इस आदेश को सार्वजनिक स्थानों पर अवैध विज्ञापन और अतिक्रमण पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




