प्रयागराज में बढ़ते जलस्तर के बीच आस्था का अद्भुत संगम, लेटे हनुमान मंदिर में शुरू हुईं विशेष तैयारियां
5 हेडर
- गंगा जल से होगा बजरंगबली का अभिषेक
- लेटे हनुमान मंदिर में बढ़ी श्रद्धा
- वैदिक मंत्रों से गूंजेगा पूरा संगम
- बाढ़ के बीच आस्था का उत्सव
- देश की खुशहाली की होगी प्रार्थना
प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज एक बार फिर उस दिव्य और दुर्लभ क्षण का साक्षी बनने जा रही है, जिसका इंतजार हर वर्ष लाखों श्रद्धालु करते हैं। गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन जहां संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और आस्था का वातावरण है। इसका कारण है संगम तट पर स्थित प्रसिद्ध लेटे हनुमान मंदिर, जहां मान्यता के अनुसार मां गंगा स्वयं भगवान बजरंगबली का जलाभिषेक करने आती हैं। इस अनूठी परंपरा को देखने और उसका हिस्सा बनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं के आने की तैयारी शुरू हो गई है।
हर साल मानसून के दौरान जब गंगा का जलस्तर बढ़ते-बढ़ते लेटे हनुमान मंदिर तक पहुंचता है, तब इसे केवल प्राकृतिक घटना नहीं माना जाता, बल्कि इसे सनातन आस्था का जीवंत प्रतीक समझा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां गंगा अपने पुत्र समान बजरंगबली का स्वयं स्नान कराकर उन्हें आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि जैसे-जैसे जल मंदिर की ओर बढ़ता है, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ने लगती है।
मंदिर प्रशासन ने इस पावन अवसर के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। मंदिर परिसर की साफ-सफाई, पूजा सामग्री की व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लेटे हनुमान मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। मान्यता है कि यहां विराजमान भगवान हनुमान की प्रतिमा स्वयंभू है और उनका यह शयन रूप अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। कहा जाता है कि जब-जब गंगा का जल मंदिर तक पहुंचता है, तब-तब पूरे देश में सुख, शांति, समृद्धि और अच्छी वर्षा का संदेश मिलता है। इसी विश्वास के कारण लाखों लोग इस दिव्य क्षण को शुभ संकेत के रूप में देखते हैं।
पूजन के दौरान वैदिक आचार्य विशेष मंत्रों का उच्चारण करेंगे। शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और गंगा आरती के साथ पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब जाएगा। श्रद्धालु मां गंगा और बजरंगबली से देश की उन्नति, किसानों की समृद्धि, अच्छी फसल, समय पर वर्षा और समाज में सुख-शांति की कामना करेंगे। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और आस्था के अद्भुत मिलन का प्रतीक भी माना जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस बढ़ते जलस्तर को प्रशासन आपदा प्रबंधन की दृष्टि से चुनौती मान रहा है, वही जलस्तर श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उत्सव का कारण बन जाता है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता बढ़ा दी है, राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है तथा संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं मंदिर प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दे रहा है।
हर वर्ष इस परंपरा को देखने के लिए उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु इसे अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं कि उन्हें मां गंगा द्वारा बजरंगबली के जलाभिषेक का दुर्लभ दृश्य देखने का अवसर मिला। इस दौरान संगम क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ का सिलसिला भी तेज हो जाता है।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि भारतीय संस्कृति में नदियों को केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवनदायिनी मां का स्वरूप माना गया है। गंगा का लेटे हनुमान मंदिर तक पहुंचना इसी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत उदाहरण है। यह संदेश भी देता है कि प्रकृति और अध्यात्म भारतीय जीवन दर्शन में एक-दूसरे के पूरक हैं।
संगम नगरी में अब सभी की निगाहें गंगा के बढ़ते जलस्तर पर टिकी हैं। श्रद्धालु उस क्षण का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब मां गंगा मंदिर पहुंचकर बजरंगबली का जलाभिषेक करेंगी और वैदिक मंत्रों, शंखनाद तथा भव्य आरती के बीच पूरा वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो जाएगा। प्रशासन के लिए यह समय सतर्कता का है, लेकिन आस्था के करोड़ों अनुयायियों के लिए यह एक ऐसा पावन अवसर है, जो हर वर्ष सनातन परंपरा, प्रकृति और श्रद्धा के अद्भुत संगम का साक्षी बनता है।





