हरिवंश तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति निर्वाचित, संसद में गूंजा विश्वास—PM मोदी ने की सराहना
नई दिल्ली से रिपोर्ट
संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार राज्यसभा का उपसभापति चुना गया। उनके पुनर्निर्वाचन को सदन में व्यापक समर्थन मिला, जिसे राजनीतिक सहमति और उनके कार्यकाल पर विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बधाई दी और उनके अनुभव तथा कार्यशैली की सराहना की। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
- संसद के विशेष सत्र का दूसरा दिन
- हरिवंश नारायण सिंह को फिर मिला बड़ा दायित्व
- PM मोदी और खड़गे ने दी बधाई
- महिला आरक्षण और परिसीमन पर गरमाई बहस
- सदन में आज भी हंगामे के आसार
PM मोदी ने जताया भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में संबोधन के दौरान कहा कि हरिवंश का लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना यह दर्शाता है कि सदन को उनके नेतृत्व और अनुभव पर गहरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि हरिवंश ने अपनी सहज कार्यशैली और सभी दलों को साथ लेकर चलने की क्षमता से राज्यसभा को प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाई है। पीएम ने इसे “अनुभव और संतुलित नेतृत्व का सम्मान” बताया।
खड़गे ने भी दी बधाई, बताया योग्य
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी हरिवंश को बधाई देते हुए कहा कि वे इस पद के पूर्णतः योग्य हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक नामित सदस्य के रूप में इस पद तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। खड़गे के बयान से यह संकेत मिला कि इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच एक सकारात्मक सहमति देखने को मिली है।
संसद में जारी है गरमागर्म बहस
हालांकि उपसभापति के चुनाव में सहमति का माहौल रहा, लेकिन संसद का विशेष सत्र अन्य मुद्दों को लेकर काफी हंगामेदार बना हुआ है। गुरुवार को भी सदन देर रात तक चला, जहां महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। आज भी इन मुद्दों पर चर्चा जारी रहने के आसार हैं। सत्ता पक्ष जहां महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन को जरूरी बता रहा है, वहीं विपक्ष इस पर सवाल खड़े कर रहा है।
महिला आरक्षण बनाम परिसीमन पर टकराव
महिला आरक्षण से जुड़े संशोधनों पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया कि वे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के पक्ष में हैं, लेकिन इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस प्रावधान के जरिए “बैकडोर” से परिसीमन लागू करना चाहती है। वहीं सरकार का कहना है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्गठन जरूरी है, ताकि आरक्षण का सही क्रियान्वयन हो सके।
सदन में आज भी हंगामे के आसार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद के इस विशेष सत्र में आगे भी बहस और हंगामे का दौर जारी रह सकता है। महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हैं, जिन पर सहमति बनाना आसान नहीं है। ऐसे में जहां एक ओर हरिवंश के पुनर्निर्वाचन ने सदन में सकारात्मक संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर महत्वपूर्ण विधेयकों पर टकराव से राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ा हुआ है।
राज्यसभा के उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण सिंह का तीसरी बार चयन उनके अनुभव और कार्यशैली पर सदन के भरोसे को दर्शाता है। हालांकि संसद में जारी बहस और राजनीतिक मतभेद यह भी दिखाते हैं कि आने वाले दिनों में कई अहम मुद्दों पर कड़ा संघर्ष देखने को मिल सकता है। इस बीच, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच किसी सहमति का रास्ता निकलता है या नहीं।





