कांवड़ में मां, कंधों पर संस्कार
सावन के पावन महीने में उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से मातृभक्ति और सेवा का ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। गढ़मुक्तेश्वर के प्रसिद्ध बृजघाट पर एक बेटे और उसकी बहू ने अपनी वृद्ध मां को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाया, जबकि दूसरे पलड़े में गंगाजल रखा और उसी संतुलन के साथ अपनी कांवड़ यात्रा शुरू की। इस अनूठे दृश्य को देखकर श्रद्धालु भावुक हो गए और दोनों को आधुनिक ‘श्रवण कुमार’ कहकर सराहने लगे।
सावन में लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने निकलते हैं, लेकिन इस परिवार की कांवड़ यात्रा श्रद्धा के साथ-साथ सेवा और संस्कार का भी संदेश दे रही है। वृद्ध मां की इच्छा थी कि वह भी कांवड़ यात्रा का हिस्सा बनें, लेकिन उम्र और शारीरिक कमजोरी इसकी इजाजत नहीं दे रही थी। ऐसे में बेटे और बहू ने उन्हें यात्रा से वंचित न रखते हुए कांवड़ में बैठाकर साथ ले जाने का फैसला किया।
बृजघाट पर यह दृश्य देखते ही देखते लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया। श्रद्धालुओं ने बेटे-बहू के इस समर्पण की जमकर प्रशंसा की। कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति में माता-पिता की सेवा और सम्मान की जीवंत मिसाल बताया। सोशल मीडिया पर भी इस अनोखी कांवड़ यात्रा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
कांवड़िया सत्येंद्र सिंह ने बताया कि मां की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि माता-पिता का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और यदि उनकी इच्छा पूरी करने का अवसर मिले तो उसे सौभाग्य मानना चाहिए। उनका कहना है कि यह यात्रा केवल भगवान शिव की भक्ति नहीं, बल्कि मां के प्रति अपने कर्तव्य को निभाने का भी माध्यम है।
सावन के इस पवित्र अवसर पर हापुड़ से सामने आई यह तस्वीर एक बार फिर याद दिलाती है कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता की सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। बेटे और बहू का यह कदम श्रद्धा, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों की ऐसी मिसाल बन गया है, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है।





