आधी आबादी पूरी सियासत-क्या सचमुच अब इतिहास लिखने वाला है

आधी आबादी पूरी सियासत-क्या सचमुच अब इतिहास लिखने वाला है

आधी आबादी पूरी सियासत-क्या सचमुच अब इतिहास लिखने वाला है

मध्यप्रदेश में चुनावी शंखनाद हो गया है। और लगता है कि इन चुनावों में मध्यप्रदेश एक नया इतिहास लिखने जा रहा है। ये इतिहास होगा आधी आबादी का। मध्यप्रदेश में इस बार आधी आबादी पर पूरी सियासत चल रही है। पहले कभी हिदुंस्तान में आधी आबादी के वोट को परिवार के पुरूष से साथ जोड़कर देखा जाता था लेकिन इस बार के चुनाव में आधी आबादी के वोट के जरिए पूरे परिवार के वोट को साधने की कोशिश की जा रही है। कारण है आधी आबादी की बढ़े हुए वोटर ।

चुनाव आयोग के आकंड़ो के अनुसार मध्यप्रदेश में 2018 से लेकर अब तक महिला वोटर की संख्या में पुरूषों से ज्यादा इजाफा हुआ है। महिला वोटर को 2013 की तुलना में 2018 में वोट करने भी ज्यादा निकली । मसलन 2013 में अगर 70 प्रतिशत महिलाओं ने वोट किया तो 2018 में 74 प्रतिशत मतलब कि सीधे तौर पर चार प्रतिशत वोटर में बढोतरी हुई। यही कारण है कि अब प्रदेश की राजनीति आधी आबादी के इर्द-गिर्द घूमने लगी।

सत्तापक्ष ने योजनाऐं लांच कर दी तो विपक्ष ने भी आधी आबादी के लिए वादों औऱ घोषणाओं की झड़ी लगा दी। आधी आबादी के राजनीतिक धुरी बनने के बाद से मैदानी स्तर पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है।इसके लिए हम जनआर्शीवाद यात्रा का उदाहरण ले सकते हैं। बीजेपी के जन आर्शावाद यात्रा में नई बात देखने को मिल रही है। आमतौर पर किसी भी तरह की राजनैतिक यात्राओं में महिलाऐं घर की छत, छज्जों और गलियारों से देखा करती थी ,वो भी ज्यादातर सिर ढंककर या घूंघट की आड़ में। लेकिन इस बार यात्रा में जो नजारा देखा वो हर साल की तुलना में बहुत अलग था। बल्कि 2018 की तुलना में बहुत अलग था।

इस बार यात्रा के स्वागत के लिए जो मंच बने थे उन मंच पर नेता जी का स्वागत करने वालों में महिलाओं की तादाद ज्यादा थी। कुछ मंच तो ऐसे थे जिन पर केवल महिलाऐं थी। यात्रा निकालने वाली बीजेपी ने गानों को सिलेक्शन भी कुछ ऐसा किया था जो लगातार राखी जैसे त्यौहारों का फील दे रहे थे। फिर चाहे वो फूलों को तारों का सबका कहना हो या फिर भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना।

यात्रा के इस बदले नजारे का सारा क्रेडिट प्रदेश सरकार की लाड़ली बहना योजना को जाता है। आमतौर पर जीत के लिए राजनैतिक दल ऐसी योजनाओं को अकसर लाते हैं। लेकिन वोट के लिए शुरू की गई ये योजना कितना बड़ा इतिहास लिख सकती है इसकी कल्पना फिलहाल राजनैतिक दल भी नहीं कर पा रहे होंगे। वोट के लिए शुरू हुई आधी आबादी कि सियासत ने राजनीति में तो आधी आबादी के वोट को तो निर्णायक साबित कर दिया लेकिन कहीं न कहीं ये भी तय हो चुका है कि आने वाले दिनों में आधी आबादी की समाज में भूमिका भी निर्णायक होने वाली है।

वैसे भी मध्यप्रदेश आधी आबादी के लिए योजना बनाने में शायद देश का सबसे अनोखा और इकलौता राज्य होगा। जिसमें लाड़ली लक्ष्मी, मुख्यमंत्री कन्यादान और अब लाड़ली बहना जैसी योजनाऐं है। इस तरह की योजनाओं से मध्यप्रदेश में तो आधी आबादी से सामाजिक हालात में सुधार आया है । साथ ही देश के कई अन्य राज्यों में इस तरह की योजनाओं को लागू किया है। खासकर लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजना ने तो प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार किया है, लेकिन अब लाड़ली बहना योजना गेम चेंजर साबित होकर लगातार लागू रही तो सामाजिक ताने बाने में सकारात्मक बदलाव करेगी।

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