हज यात्रा 2026 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार द्वारा हवाई किराए में 10,000 रुपये प्रति यात्री की बढ़ोतरी के फैसले ने देशभर में बहस छेड़ दी है। जहां सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय हालात की मजबूरी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ करार दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच हज यात्रियों के किराए में एकमुश्त बढ़ोतरी का फैसला लागू
Haj Committee of India ने एक सर्कुलर जारी कर बताया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के चलते इस साल हज यात्रियों के हवाई किराए में 100 डॉलर (करीब 10,000 रुपये) की अतिरिक्त राशि जोड़ी गई है। यह फैसला मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईंधन आपूर्ति पर पड़े असर को देखते हुए लिया गया है।
मिडिल ईस्ट संकट और महंगे जेट फ्यूल ने बढ़ाया दबाव, एयरलाइंस ने की थी ज्यादा बढ़ोतरी की मांग
सरकार के मुताबिक अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। एयरलाइंस ने पहले 300 से 400 डॉलर तक किराया बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन बातचीत के बाद इसे 100 डॉलर तक सीमित रखा गया।
सरकार का पक्ष: यात्रियों पर कम से कम बोझ डालने की कोशिश, फैसला मजबूरी में लिया गया
Kiren Rijiju ने कहा कि हज यात्रा करोड़ों लोगों के लिए आस्था से जुड़ा विषय है और सरकार इस भावना का सम्मान करती है। उन्होंने बताया कि एयरलाइंस के दबाव के बावजूद किराया वृद्धि को सीमित रखने की कोशिश की गई, ताकि यात्रियों पर ज्यादा आर्थिक भार न पड़े।
विपक्ष का हमला: यात्रियों पर अन्याय, पहले ही जमा हो चुका था पूरा पैसा
Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद Imran Pratapgarhi ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यात्रियों से पहले ही बड़ी रकम ली जा चुकी थी, ऐसे में आखिरी समय पर अतिरिक्त 10,000 रुपये लेना अनुचित है। विपक्ष ने इसे आम लोगों के साथ अन्याय बताते हुए तुरंत फैसला वापस लेने की मांग की है।
ATF कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से एयरलाइन सेक्टर पर असर, खर्च बढ़ने से यात्रियों पर बोझ
जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट फ्यूल की कीमतों में हाल ही में 5% की बढ़ोतरी हुई है। यह लगातार दूसरा महीना है जब ईंधन महंगा हुआ है। एविएशन सेक्टर में ATF सबसे बड़ी लागत का हिस्सा होता है, ऐसे में कीमत बढ़ने का सीधा असर टिकट दरों पर पड़ता है। सरकार और तेल कंपनियां इस बढ़ोतरी को धीरे-धीरे लागू करने की रणनीति अपना रही हैं





