बीजेपी शासित इस राज्य में UCC को हरी झंडी…समान कानून की ओर उठाया ये बड़ा कदम…लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्ती?

UCC in Gujarat
गुजरात में Uniform Civil Code (यूसीसी) को ग्रीन सिग्नल मिलना राज्य की राजनीति और कानून व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने चुनावों में किए गए वादे को पूरा करते हुए विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया, जिसे करीब 7 घंटे की लंबी बहस के बाद पारित कर दिया गया। इस फैसले के साथ गुजरात, उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।

गुजरात में UCC को हरी झंडी

समान कानून की ओर बड़ा कदम

क्या है UCC और क्यों है अहम?

Uniform Civil Code का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करना है, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय से संबंधित हों। इसका सीधा असर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इससे समानता, पारदर्शिता और महिलाओं को अधिक अधिकार मिलेंगे, जबकि विरोधी दल इसे संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बता रहे हैं।

बिल के प्रमुख प्रावधान

गुजरात में प्रस्तावित यूसीसी के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:

सामाजिक प्रभाव और बदलाव

यूसीसी लागू होने से समाज में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

सरकार इसे “सशक्त गुजरात” की दिशा में कदम बता रही है, जहां हर नागरिक कानून के सामने बराबर होगा।

सरकार का पक्ष

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस बिल को समान कानूनी ढांचा स्थापित करने की दिशा में अहम बताया। वहीं उपमुख्यमंत्री ने इसे “ऐतिहासिक” करार देते हुए कहा कि कोई भी नागरिक कानून से ऊपर नहीं होगा। सरकार का जोर खासतौर पर महिलाओं के अधिकार और सम्मान को मजबूत करने पर है।

विपक्ष का विरोध

हालांकि इस बिल को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस ने विधानसभा में वॉकआउट किया और आरोप लगाया कि बिल जल्दबाजी में लाया गया है। आम आदमी पार्टी ने भी इसका विरोध करते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया। कुछ नेताओं ने इसे अल्पसंख्यक विरोधी तक करार दिया।

विशेषज्ञ समिति और जनमत

इस बिल को लाने से पहले रंजना देसाई की अध्यक्षता में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। बताया जा रहा है कि 20 लाख से अधिक लोगों से राय लेने के बाद यह मसौदा तैयार किया गया।  गुजरात में यूसीसी को हरी झंडी मिलना न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। जहां एक ओर इसे समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को लेकर बहस जारी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह कानून जमीन पर कैसे लागू होता है और क्या यह वास्तव में समाज में समानता और न्याय को मजबूत कर पाता है या नहीं।

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