भारत का नया समुद्री सुपरपावर मिशन! आखिर क्यों ग्रेट निकोबार को इंडो-पैसिफिक का ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है?

हिंद महासागर के बीचोंबीच मौजूद Great Nicobar Island आने वाले वर्षों में भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत बन सकता है। दिखने में छोटा यह द्वीप अब एक ऐसे मेगा प्रोजेक्ट का केंद्र बन चुका है, जो न केवल भारत की समुद्री ताकत को नई दिशा देगा बल्कि वैश्विक व्यापार और सुरक्षा समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। करीब 10 बिलियन डॉलर की लागत वाला ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत के लिए आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

मलक्का स्ट्रेट के पास मौजूद लोकेशन ही ग्रेट निकोबार को बनाती है बेहद खास

ग्रेट निकोबार की सबसे बड़ी ताकत इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह द्वीप दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल मलक्का स्ट्रेट के बेहद करीब स्थित है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच होने वाला बड़ा समुद्री व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है।

तेल और ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा भी इसी रूट पर निर्भर करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति किसी भी देश को व्यापारिक और सामरिक बढ़त दे सकती है। भारत अब इसी रणनीतिक अवसर को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

भारत को मिलेगा अपना बड़ा ट्रांसशिपमेंट हब, विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता होगी कम

इस मेगा प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल है। इसकी क्षमता करीब 14.2 मिलियन TEU बताई जा रही है। वर्तमान में भारत का बड़ा हिस्सा कार्गो सिंगापुर और कोलंबो जैसे विदेशी बंदरगाहों के जरिए संचालित होता है।

लेकिन ग्रेट निकोबार में बनने वाला यह आधुनिक पोर्ट भारत को अपनी खुद की समुद्री लॉजिस्टिक ताकत देने का काम करेगा। गैलाथिया बे का प्राकृतिक गहरा पानी बड़े जहाजों के लिए बेहद उपयुक्त माना जा रहा है। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नई बढ़त मिल सकती है।

बंदरगाह के साथ एयरपोर्ट, स्मार्ट टाउनशिप और हाइब्रिड पावर सिस्टम भी होगा तैयार

यह परियोजना सिर्फ एक पोर्ट तक सीमित नहीं है। यहां ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट, आधुनिक टाउनशिप और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा। एयरपोर्ट की पीक क्षमता करीब 4000 यात्रियों की होगी।

इसके अलावा 450 MVA क्षमता वाला गैस और सोलर आधारित हाइब्रिड पावर प्लांट भी तैयार किया जाएगा। यानी यह प्रोजेक्ट एक ऐसा इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम तैयार करेगा जहां व्यापार, परिवहन, ऊर्जा और रहने की सुविधाएं एक ही क्षेत्र में उपलब्ध होंगी।

भारत की समुद्री सुरक्षा और सैन्य ताकत को मिलेगा बड़ा रणनीतिक फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेट निकोबार का विकास भारत की समुद्री निगरानी और रक्षा क्षमता को काफी मजबूत करेगा। Andaman and Nicobar Islands को पहले से ही “प्राकृतिक एयरक्राफ्ट कैरियर” कहा जाता है क्योंकि यहां से हिंद महासागर के बड़े हिस्से पर नजर रखी जा सकती है।

यह प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना और सैन्य लॉजिस्टिक्स को नई मजबूती देगा। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच यह भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत कर सकता है।

पर्यावरण और जनजातीय समुदायों को लेकर भी बनाई गई विशेष सुरक्षा योजना

इतने बड़े विकास प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी सामने आई हैं। हालांकि परियोजना को कई शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है। जानकारी के मुताबिक द्वीप के केवल 1.82 प्रतिशत वन क्षेत्र का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि बड़े स्तर पर वनीकरण की योजना बनाई गई है।

इसके अलावा शोंपेन और निकोबारी जनजातियों के संरक्षण के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी। परियोजना को 2025 से 2047 तक तीन चरणों में विकसित किया जाएगा, जिसमें आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।

 

 

 

 

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