जनजातीय अधिकारों पर सरकार का फोकस
मध्यप्रदेश में जनजातीय समाज के अधिकारों और उनके कल्याण से जुड़ी योजनाओं को लेकर सरकार का फोकस लगातार बढ़ रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार, 13 सितंबर को भोपाल में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ करेंगे। भोपाल स्थित आर.सी.व्ही. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में अनुसूचित जनजाति वर्ग के मानव अधिकारों के संरक्षण और सरकारी योजनाओं की उन तक पहुंच को लेकर मंथन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे, जबकि जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष कार्यवाहक डॉ. अवधेश प्रताप सिंह करेंगे।
जनजातीय अधिकारों पर होगा मंथन
इस कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अनुसूचित जनजाति वर्ग के मानव अधिकारों पर होने वाला विचार-विमर्श है। ‘अनुसूचित जनजाति वर्ग के मानव अधिकारों का संरक्षण एवं शासकीय योजनाओं की उन तक पहुंच’ विषय पर वक्ताओं द्वारा अपने विचार रखे जाएंगे। इसके साथ ही जनजातीय कार्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को लेकर प्रस्तुति भी दी जाएगी। इसका मकसद सिर्फ योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि यह देखना भी है कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ जनजातीय समाज तक किस तरह प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा रहा है। यानी सरकार का फोकस योजना बनाने के साथ-साथ उसकी अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित करने पर भी है।
योजनाओं की पहुंच पर जोर
जनजातीय समाज के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में योजनाओं की जानकारी और उनका वास्तविक लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। मानव अधिकारों की बात केवल अधिकारों की रक्षा तक सीमित नहीं है। सम्मानजनक जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य, अवसर और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच भी इससे जुड़ा महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी दृष्टिकोण से स्थापना दिवस कार्यक्रम में जनजातीय वर्ग के अधिकारों और सरकारी योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा होगी।
उत्कृष्ट अधिकारियों-कर्मियों का सम्मान
कार्यक्रम में प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों की भूमिका को भी महत्व दिया जाएगा। मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत साधना सप्ताह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। इससे उन अधिकारियों और कर्मचारियों का उत्साह बढ़ेगा, जो सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार के लिए यह संदेश भी महत्वपूर्ण है कि योजनाओं की सफलता सिर्फ बजट और घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से तय होती है।
स्मारिका और डायरी का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा प्रकाशित विषय आधारित स्मारिका और बहुउपयोगी डायरी का विमोचन भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों द्वारा किया जाएगा। स्मारिका में जनजातीय वर्ग के मानव अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ विभिन्न शासकीय योजनाओं की उन तक पहुंच से संबंधित जानकारी और विषय आधारित आलेख शामिल किए गए हैं। इस लिहाज से स्मारिका जनजातीय अधिकारों और सरकारी योजनाओं को समझने के लिए उपयोगी दस्तावेज के रूप में सामने आएगी।
जनजातीय प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों की भागीदारी
कार्यक्रम में जनजातीय समाज से जुड़े प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों की मौजूदगी भी रहेगी। मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, आयुक्त तरुण राठी सहित मानव अधिकार आयोग और जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके अलावा विभागीय हितग्राही, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि और जनजातीय वर्ग के विद्यार्थी भी समारोह का हिस्सा बनेंगे। यानी यह कार्यक्रम केवल सरकारी स्तर का आयोजन नहीं रहेगा, बल्कि इसमें प्रशासन, जनजातीय प्रतिनिधियों, हितग्राहियों, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी के जरिए व्यापक संवाद की कोशिश दिखाई देगी।
अधिकार से सम्मान तक की दिशा
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस पर जनजातीय समाज के अधिकारों को केंद्र में रखकर होने वाला यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। जनजातीय समाज के विकास की बात केवल आर्थिक योजनाओं तक सीमित नहीं हो सकती। उनके अधिकारों की रक्षा, सरकारी योजनाओं तक समान पहुंच और सम्मानजनक जीवन के अवसर भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार की कोशिशों का एक प्रमुख पहलू यह है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचे। ऐसे में मानव अधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर जनजातीय अधिकारों और सरकारी योजनाओं की पहुंच को लेकर होने वाला मंथन नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। क्योंकि किसी भी कल्याणका री व्यवस्था की असली सफलता तब होती है, जब अधिकार कागज से निकलकर जमीन तक पहुंचें और सरकारी योजना वास्तव में उस व्यक्ति के जीवन में बदलाव लेकर आए, जिसके लिए वह बनाई गई है।