साल 2026 में सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जनवरी में करीब 5,595 डॉलर प्रति औंस के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना घटकर लगभग 4,138 डॉलर तक आ गया, यानी करीब 26% की गिरावट हुई। 6 अक्टूबर को स्पॉट गोल्ड करीब 4,129 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। ऐसे में निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि मौजूदा गिरावट को खरीदारी के अवसर के तौर पर देखा जाए या अभी थोड़ा इंतजार किया जाए।
6 अक्टूबर को दिल्ली, मुंबई समेत प्रमुख शहरों में सोने-चांदी के क्या रहे भाव?
घरेलू बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव दिखाई दिया। 6 अक्टूबर के उपलब्ध खुदरा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत प्रमुख शहरों में करीब ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास रही। नीचे 24K, 22K और 999 चांदी के प्रमुख शहरों के संकेतात्मक भाव दिए गए हैं। भाव स्थानीय बाजार, टैक्स और ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज के अनुसार अलग हो सकते हैं।
| शहर | 24K सोना/10 ग्राम | 22K सोना/10 ग्राम | चांदी/किलो |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | ₹1,48,850 | ₹1,36,440 | ₹2,24,900 |
| मुंबई | ₹1,49,100 | ₹1,36,675 | ₹2,25,290 |
| कोलकाता | ₹1,48,990 | ₹1,36,574 | ₹2,25,140 |
| बेंगलुरु | ₹1,49,310 | ₹1,36,868 | ₹2,25,610 |
| हैदराबाद | ₹1,49,430 | ₹1,36,978 | ₹2,25,790 |
| चेन्नई | ₹1,49,620 | ₹1,37,152 | ₹2,26,090 |
| भोपाल | ₹1,49,070 | ₹1,36,650 | ₹2,29,092 |
मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने सोने पर बनाया दबाव
सोने की हालिया कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजहों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और US Treasury yields में बढ़ोतरी शामिल है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। वहीं, बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ने पर निवेशकों के लिए ब्याज नहीं देने वाली संपत्ति यानी सोने की आकर्षकता कुछ कम हो जाती है। 6 अक्टूबर को भी मजबूत डॉलर और ऊंची ट्रेजरी यील्ड ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा।
Tata MF को लंबी अवधि में सोने-चांदी पर अब भी भरोसा
Tata Mutual Fund की अक्टूबर 2026 की बाजार रिपोर्ट में सोने और चांदी को लेकर लंबी अवधि का रुख सकारात्मक रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा गिरावट को केवल मांग में कमजोरी से जोड़ना सही नहीं होगा। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और रिजर्व डायवर्सिफिकेशन जैसे कारण अभी भी सोने के लिए महत्वपूर्ण सहारा बने हुए हैं। Tata MF ने ऐसे माहौल में एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति को बेहतर बताया है।
निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि गिरावट हमेशा आखिरी मौका नहीं होती
सोने में करीब 26% की गिरावट के बाद मौजूदा स्तर पहले की तुलना में आकर्षक जरूर नजर आ रहे हैं, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि कीमतें अब तुरंत बढ़ेंगी ही। अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, बॉन्ड यील्ड, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक तनाव आगे कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं। इसलिए निवेशकों के लिए बाजार का सही समय पकड़ने के बजाय अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे निवेश करना ज्यादा संतुलित तरीका हो सकता है। यह सामान्य जानकारी है, निवेश का फैसला करने से पहले वित्तीय सलाहकार से राय लेना उचित रहेगा।
नोट- हमारे द्वारा दी गई सोने-चांदी की दरें सांकेतिक हैं और इसमें जीएसटी, टीसीएस और मेकिंग चार्ज जैसे अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं. सटीक दरों के लिए अपने स्थानीय जौहरी या ज्वैलर्स शॉप से संपर्क करें.





