Goa Tourism Crisis: विदेशी टूरिस्ट क्यों छोड़ रहे गोवा? कभी विदेशी सैलानियों की पहली पसंद अब धीरे-धीरे हो रही खाली

बीच, पार्टी और विदेशी भीड़ वाला गोवा अब पहले जैसा क्यों नहीं रहा, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

एक समय था जब गोवा का नाम सुनते ही विदेशी पर्यटकों के चेहरे खिल उठते थे। रूस, ब्रिटेन और यूरोप से लाखों लोग हर साल यहां छुट्टियां बिताने आते थे। गोवा के खूबसूरत बीच, सस्ती ट्रिप, नाइट लाइफ और पार्टी कल्चर ने इसे दुनिया के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल कर दिया था। लेकिन अब हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार घट रही है और गोवा धीरे-धीरे अपनी पुरानी चमक खोता नजर आ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 2017 में जहां करीब 9 लाख विदेशी सैलानी गोवा पहुंचे थे, वहीं 2025 तक यह संख्या घटकर लगभग 5 लाख तक सिमट गई है।

कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध ने गोवा पर्यटन की कमर तोड़ दी

विशेषज्ञों का मानना है कि गोवा के पर्यटन कारोबार को सबसे बड़ा झटका कोरोना महामारी के दौरान लगा। इंटरनेशनल फ्लाइट्स बंद होने और यात्रा प्रतिबंधों के कारण विदेशी टूरिस्ट्स पूरी तरह गायब हो गए। हालात सामान्य होने लगे ही थे कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हो गया। गोवा में हर साल बड़ी संख्या में रूसी और यूक्रेनी पर्यटक आते थे, लेकिन युद्ध के बाद दोनों देशों के लोगों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई और विदेश यात्रा काफी महंगी हो गई। इसका असर सीधे गोवा के होटल, बीच शैक, टैक्सी कारोबार और छोटे व्यापारियों पर पड़ा।

मिडिल ईस्ट तनाव और महंगी फ्लाइट्स ने विदेशी पर्यटकों का बजट बिगाड़ दिया

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल का असर भी भारतीय पर्यटन पर साफ दिखाई दिया। खाड़ी देशों के एयरस्पेस में तनाव बढ़ने से कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स महंगी हो गईं। यूरोप और रूस से आने वाले यात्रियों के लिए भारत पहुंचना पहले के मुकाबले काफी खर्चीला हो गया। कई विदेशी पर्यटक अब ऐसे देशों की तरफ रुख कर रहे हैं जहां कम बजट में बेहतर सुविधाएं और आसान यात्रा अनुभव मिल रहा है। यही वजह है कि श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश अब गोवा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

आसान वीजा और सस्ते होटल की वजह से दूसरे देशों की तरफ बढ़ रहा रुझान

पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत का वीजा प्रोसेस पहले की तुलना में ज्यादा लंबा और महंगा हो गया है। कई विदेशी टूरिस्ट्स का मानना है कि पांच साल के वीजा की फीस बढ़ने से उनकी यात्रा लागत और बढ़ गई। वहीं वियतनाम, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देशों में ऑन-अराइवल वीजा आसानी से मिल जाता है, जिससे लोग तुरंत ट्रिप प्लान कर लेते हैं। इसके अलावा गोवा में अच्छे होटलों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। घरेलू पर्यटकों की भीड़ और बड़े कॉर्पोरेट इवेंट्स के कारण होटल इतने महंगे हो गए हैं कि कई विदेशी पर्यटक अब दूसरे देशों को ज्यादा बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

साफ-सफाई, भीड़भाड़ और बदलते माहौल ने भी गोवा की छवि को पहुंचाया नुकसान

कई विदेशी पर्यटकों का कहना है कि गोवा का शांत और रिलैक्स माहौल अब पहले जैसा नहीं रहा। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शिकायत की है कि गोवा अब जरूरत से ज्यादा कमर्शियल हो गया है। बीच पर भीड़, बढ़ती गंदगी और ट्रैफिक जैसी समस्याएं भी विदेशी सैलानियों को परेशान कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर थाईलैंड, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देश बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, साफ-सफाई और आसान ट्रैवल एक्सपीरियंस देकर पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गोवा को फिर से विदेशी टूरिस्ट्स की पसंद बनाना है तो सुविधाओं, कीमतों और पर्यटन व्यवस्था में बड़े बदलाव करने होंगे

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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