Wednesday, September 23, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home धर्म

नौ रातों का गरबा कैसे बना देश-दुनिया की पहचान? देवी की आराधना से डांडिया और फिर बड़े कमर्शियल आयोजनों तक की पूरी कहानी

DigitalDesk by DigitalDesk
September 23, 2026
in धर्म, मुख्य समाचार
0
नौ रातों का गरबा कैसे बना देश-दुनिया की पहचान? देवी की आराधना से डांडिया और फिर बड़े कमर्शियल आयोजनों तक की पूरी कहानी
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

नवरात्रि शुरू होते ही गुजरात से लेकर देश के कई शहरों तक गरबा पंडाल सजने लगते हैं। रंग-बिरंगे कपड़े, ढोल की आवाज, घूमते कदम और हजारों लोगों की भीड़—आज गरबा एक बड़े उत्सव का रूप ले चुका है। लेकिन गरबा की कहानी केवल संगीत और नाच तक सीमित नहीं है। इसकी शुरुआत देवी की आराधना और शक्ति की उपासना से जुड़ी मानी जाती है। गुजरात में नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान देवी शक्ति के सम्मान में गरबा करने की परंपरा रही है। 2023 में गुजरात का गरबा यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में भी शामिल किया गया।

गरबा आखिर है क्या और इसकी शुरुआत कैसे हुई?

Related posts

BJP में 28 राज्यों के प्रभारी नियुक्त, स्मृति ईरानी समेत कई नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी

BJP में 28 राज्यों के प्रभारी नियुक्त, स्मृति ईरानी समेत कई नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी

September 23, 2026
Gold Flake सिगरेट फिर हुई महंगी, 10 स्टिक वाले पैकेट के लिए अब ₹135 चुकाने होंगे

Gold Flake सिगरेट फिर हुई महंगी, 10 स्टिक वाले पैकेट के लिए अब ₹135 चुकाने होंगे

September 23, 2026

गरबा मूल रूप से नवरात्रि के दौरान किया जाने वाला भक्ति और सामूहिक नृत्य है। पारंपरिक गरबा में बीच में मिट्टी का छेददार घड़ा रखा जाता था, जिसमें दीपक जलाया जाता था। इसे देवी शक्ति और जीवन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसके चारों ओर लोग गोल घेरा बनाकर तालियों और कदमों की लय के साथ नृत्य करते हैं। गुजरात पर्यटन के अनुसार, ‘गरबा’ शब्द का संबंध ‘गर्भदीप’ से माना जाता है, यानी घड़े के अंदर जलता हुआ दीपक।

पहले गरबा का स्वरूप आज के बड़े स्टेज जैसा नहीं था। गांवों और मोहल्लों में लोग देवी की पूजा के बाद एक जगह इकट्ठा होते थे और रात में सामूहिक रूप से गरबा करते थे। यूनेस्को के अनुसार, गरबा की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी अभ्यास, देखकर सीखने और सामुदायिक भागीदारी से आगे बढ़ी है। समय के साथ इसमें नए गीत, नृत्य की नई शैलियां और अलग-अलग पोशाकें जुड़ती गईं।

गरबा करने का असली और पारंपरिक तरीका क्या है?

पारंपरिक गरबा में सबसे महत्वपूर्ण चीज लय और गोलाकार गति है। बीच में दीपक या देवी की प्रतिमा को केंद्र मानकर लोग उसके चारों ओर घूमते हैं। शुरुआत आमतौर पर धीमी गति से होती है। तालियां बजाते हुए कदम आगे बढ़ते हैं और धीरे-धीरे नृत्य की गति तेज होती जाती है। यूनेस्को के विवरण के अनुसार, पारंपरिक गरबा में नर्तक केंद्र के चारों ओर गोलाकार दिशा में चलते हैं और तालियों के साथ गीत गाते हैं।

यानी गरबा का असली उद्देश्य सिर्फ नाचना नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से देवी शक्ति की आराधना करना था। पुराने समय में इसमें दिखावे से ज्यादा भक्ति, संगीत और सामुदायिक भागीदारी पर जोर रहता था। यही वजह है कि गरबा केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि गुजरात की सामाजिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा बन गया।

गरबा से डांडिया कैसे अलग हुआ?

गरबा और डांडिया को अक्सर एक ही समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों की शैली अलग है। गरबा में मुख्य रूप से तालियां और शरीर की लयबद्ध गतिविधियां होती हैं, जबकि डांडिया में लकड़ी की छोटी छड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है। गुजरात पर्यटन के अनुसार, डांडिया रास में पुरुष और महिलाएं दोनों समूह बनाकर गोलाकार तरीके से नृत्य करते हैं और डांडिया की छड़ियों को ताल के साथ आपस में टकराते हैं।

समय के साथ नवरात्रि के आयोजनों में गरबा और डांडिया एक साथ होने लगे। आज कई जगह पूरे कार्यक्रम को ही ‘गरबा नाइट’ कहा जाता है, जिसमें पारंपरिक गरबा, डांडिया रास, फिल्मी गीत और आधुनिक संगीत सब शामिल होते हैं।

भक्ति से बड़े कमर्शियल आयोजन तक कैसे पहुंचा गरबा?

समय के साथ गरबा का स्वरूप तेजी से बदला। पहले यह घर, मंदिर, गांव या मोहल्ले में होने वाला सामुदायिक आयोजन था। अब बड़े शहरों में हजारों लोगों की क्षमता वाले मैदानों और स्टेडियमों में गरबा आयोजित होता है। बड़े मंच, डीजे, लाइव ऑर्केस्ट्रा, लाइटिंग, सेलिब्रिटी कलाकार, टिकट और प्रायोजक इसके नए रूप का हिस्सा बन चुके हैं।

यूनेस्को भी मानता है कि गरबा लगातार बदलने वाली जीवंत परंपरा है। नई पीढ़ियां इसमें नए संगीत, नृत्य शैली और पहनावे जोड़ रही हैं, जबकि देवी शक्ति के चारों ओर घूमने वाली मूल परंपरा बनी हुई है।

अब गरबा में धर्म और राजनीति की चर्चा क्यों होती है?

गरबा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़ा सामाजिक और सार्वजनिक मंच भी बन चुका है। बड़े आयोजनों में हजारों लोग पहुंचते हैं, इसलिए राजनीतिक दल और नेता भी ऐसे कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। कई जगह नेताओं की तस्वीरें, स्वागत मंच, राजनीतिक संदेश या स्थानीय राजनीति से जुड़े मुद्दे भी गरबा आयोजनों के आसपास दिखाई देते हैं।

इसके साथ ही कुछ आयोजनों में प्रवेश नियम, पहचान जांच, लाउडस्पीकर, गीतों की सामग्री और धार्मिक पहचान जैसे मुद्दे भी चर्चा में आते हैं। यही वजह है कि आज गरबा कभी संस्कृति, कभी धर्म और कभी राजनीति से जुड़ी बहस का हिस्सा बन जाता है।

गरबा आज क्या है—भक्ति, संस्कृति या मनोरंजन?

सच्चाई यह है कि आज गरबा इन तीनों का मिश्रण बन चुका है। कहीं लोग अब भी पारंपरिक तरीके से देवी के सामने गरबा करते हैं, तो कहीं हजारों लोगों के बीच टिकट वाले बड़े आयोजन होते हैं। कहीं ढोल और पारंपरिक गीत हैं, तो कहीं डीजे और बॉलीवुड संगीत।

यही बदलाव गरबा की सबसे बड़ी खासियत भी है। इसकी मूल पहचान देवी शक्ति की आराधना और सामूहिक नृत्य से जुड़ी है, लेकिन समय के साथ इसने खुद को नए समाज और नई पीढ़ी के हिसाब से बदला है। यूनेस्को में शामिल होना भी इसी जीवंत परंपरा की वैश्विक पहचान है।

 

 

 

Tags: #Garba #Dandiya #Navratri #GarbaDance #GujaratCulture #IndianCulture #NavratriFestival
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

हलफनामे में 3.82 करोड़ की संपत्ति, रोल्स रॉयस की कीमत 13 करोड़, मैथिली ठाकुर पर क्यों उठे सवाल?

हलफनामे में 3.82 करोड़ की संपत्ति, रोल्स रॉयस की कीमत 13 करोड़, मैथिली ठाकुर पर क्यों उठे सवाल?

हलफनामे में 3.82 करोड़ की संपत्ति, रोल्स रॉयस की कीमत 13 करोड़, मैथिली ठाकुर पर क्यों उठे सवाल?

स्पेशल
30 गेंदों में शतक, फिर ध्यान की मुद्रा में बैठे अभिषेक शर्मा; पिता ने बताया सफलता का राज

30 गेंदों में शतक, फिर ध्यान की मुद्रा में बैठे अभिषेक शर्मा; पिता ने बताया सफलता का राज

मुख्य समाचार
“ब्रिक्स युवा संवाद” में फिल्मों पर खुलकर हुई बातचीत, अलग-अलग भाषाओं के युवाओं ने साझा किए अनुभव

“ब्रिक्स युवा संवाद” में फिल्मों पर खुलकर हुई बातचीत, अलग-अलग भाषाओं के युवाओं ने साझा किए अनुभव

मुख्य समाचार

RSS feed: Unknown Feed Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version