लोकसभा चुनाव 2024 : रायबरेली से कांग्रेस को है गांधी परिवार की इस सीट से नए चेहरे की तलाश…

लोकसभा चुनाव 2024 : रायबरेली से कांग्रेस को है गांधी परिवार की इस सीट से नए चेहरे की तलाश…

रायबरेली लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली सीट है। रायबरेली लोकसभा सीट राज्य की इकलौती ऐसी सीट है, जहां 2019 के आमचुनाव में कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी। तब सोनिया गांधी यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचीं थीं। लेकिन सोनिया गांधी इस बार आम चुनाव के मैदान में तो नजर आएंगे लेकिन प्रत्याशी के तौर पर नहीं, वे महज प्रचार करेंगी और पार्टी के लिए वोट मांगेंगी, क्योंकि उन्होंने चुनावी राजनीति से तौबा करते हुए राज्यसभा का रुख किया है। पार्टी रायबरेली से किसी नए चेहरे को मौका देगी। जिसके कंधे पर पार्टी का गढ़ बचाने की चुनौती होगी।

1957 में अस्तित्व में आई थी रायबरेली सीट
रायबरेली लोकसभा सीट गांधी परिवार का नाता
1957 में कांग्रेस के टिकट पर फिरोज गांधी चुने गये
जीते उम्मीदवारों में अधिकांश गांधी परिवार के सदस्य
पिछले चुनाव में इस सीट पर सोनिया गांधी जीतीं थीं चुनाव
चुनावी मैदान छोड़ सोनियां चली गईं राज्यसभा

रायबरेली सीट के चुनावी इतिहास की बात करें तो यहां से जीते उम्मीदवारों में कितने गांधी परिवार के थे, पिछले चुनाव में इस सीट पर क्या नतीजे रहे? इस बार कैसे समीकरण बन रहे
हैं? इसी पर हम यहां विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

रायबरेली सीट 1957 में अस्तित्व में आई

देश के पहले लोकसभा चुनाव साल 1951-52 में हुए थे। पहले लोकसभा चुनाव में रायबरेली और प्रतापगढ़ जिलों को मिलाकर एक लोकसभा सीट हुआ करती थी। उस चुनाव में यहां से इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी कांग्रेस के टिकट पर लड़े और उनहोंने जीत हासिल की थी। 1957 में रायबरेली सीट अस्तित्व में आई तो यहां से एक बार फिर फिरोज गांधी सांसद बने। इंदिरा और फिरोज गांधी का विवाह 26 मार्च 1942 को हुआ था।

इंदिरा गांधी चार बार रायबरेली से लड़ी चुनाव

1960 में फिरोज गांधी का निधन होने के बाद हुए रायबरेली सीट पर उप चुनाव हुए थे। इसके बाद साल 1962 के आमचुनाव में इस सीट से नेहरु गांधी परिवार का कोई सदस्य चुनाव मैदान में नहीं उतारा था। साल 1962 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में उतरे बैजनाथ कुरील ने जनसंघ प्रत्याशी तारावती को परास्त किया था। जबकि फिरोज गांधी के निधन के 4 साल बाद साल 1964 में इंदिरा गांधी राज्यसभा पहुंचीं थीं। इंदिरा गांधी 1967 तक राज्यसभा ससदस्य रहीं। 1966 जब इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं तब भी वे राज्यसभा से ही सदस्य थीं। 1967 इंदिरा ने रामबरेली सीट से ही चुनावी राजनीति में कदम रखा। कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर उतरी इंदिरा ने इस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी बीसी सेठ को 91,703 बोट से हरा दिया था। इसके बाद आया 1971 का लोकसभा चुनाव। इस चुनाव में कांग्रेस की तरफ से एक बार फिर इंदिरा गांधी मैदान में थीं। उनके सामने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से राज नारायण थे। जब नतीजे आए तो कांग्रेस से इंदिरा गांधी को 1 लाख 11,810 वोटों से विजयी घोषित किया गया। इंदिरा को 1 लाख 83309 वोट जबकि राज नारायण को 71 हजार 499 वोट मिले थे।

हांलांकि उस समय राजनारायण ने इंदिरा गांधी पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और चुनाव में हेराफेरी का आरोप लगाय था। इसके साथ ही चुनाव नतीजों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती भी दी थी। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण की चुनाव याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले से इंदिरा गांधी को बड़ा झटका लगा था। तब इंदिरा गांधी का चुनाव कोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया था। इंदिरा गांधी भी हार मानने वालों में से नहीं थीं उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। इसी आधार पर अपना इस्तीफा देने से भी इनकार कर दिया। इसके कुछ दिन बाद ही देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई। माना जा रहा है कि इस घटना के बाद से ही देश में आपातकाल लगाया गया था।

1977 के चुनाव में इंदिरा को फिर लगा झटका

1971 के बाद अगले लोकसभा चुनाव 1977 में हुए जब देश में आपातकाल का दौर खत्म हो चुका था। 1977 की जनता लहर में रायबरेली लोकसभा सीट से मैदान में उतरीं इंदिरा गांधी को शिकस्त का सामना करना पड़ा था। भारतीय लोक दल के प्रत्याशी राजनारायण ने उन्हें 55 हजार 202 वोट से परास्त कर दिया था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने रायबरेली का मोह छोड़कर कर्नाटक की चिकमंगलूर लोकसभा सीट से उप-चुनाव लड़ा और जीतकर संसद पहुंचीं।। वहीं 1980 में इंदिरा गांधी एक बार फिर कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरी थीं।

सोनिया गांधी का रायबरेली लोकसभा क्षेत्र का सफर

सोनिया गांधी ने यूपी के रायबरेली और अमेठी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने साल 1999 में अमेठी और कर्नाटक की बेल्लारी सीट से पहला चुनाव लड़ा। वे दोनों ही सीट से जीत गईं लेकिन उन्होंने बेल्लारी को छोड़ दिया और अमेठी की सांसद बनी रहीं। इसके बाद 2004 में सोनिया गांधी ने अमेठी छोड़कर रायबरेली से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। दरअसल रायबरेली को यूपी की प्रमुख लोकसभा सीटों में से एक माना जाता है। इस सीट से नेहरू गांधी परिवार के साथ ही कांग्रेस से भी ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। साल 1952 में फिरोज गांधी पहली बार रायबरेली सीट से ही लोकसभा का चुनाव जीते थे। इसके बाद इंदिरा गांधी ने भी इस सीट से ही चुनाव लड़कर जीत हासिल थी। इसके बाद सोनिया गांधी ने चुनावी राजनीति की शुरुआत इसी सीट से की। वे साल 2004 और 2009 के बार 2014 ही नहीं 2019 में भी रायबरेली लोकसभा सीट जीतीं। बीजेपी का दावा कांग्रेस को यूपी की 80 से एक भी सीट नहीं मिलेगी

1977 के बाद पहली बार रायबरेली से गांधी परिवार दूर

1977 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि यूपी से नेहरु गाँधी परिवार का कोई भी सदस्य लोकसभा या राज्यसभा में नहीं होगा। बीजेपी का दावा है कि दरअसल कांग्रेस को पता है कि इसबार लोकसभा चुनाव में उसे उत्तरप्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में एक भी सीट नहीं मिलेगी। दरअसल गांधी परिवार ने अब अपने मान जातने वाले हर गढ़ को छोड़ दिया है। क्योंकि पार्टी की पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पारिवारिक क्षेत्र रायबरेली से लोकसभा चुनाव मैदान में उतरने के बजाय राज्यसभा जाने का फैसला किया है। समाजवादी पार्टी की ओर से लोकसभा की 11 सीटों की पेशकश के बावजूद, कांग्रेस को यूपी में कोई सीट नहीं मिलेगी।

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