कभी-कभी इंसानियत किसी बड़े मंच पर नहीं, बल्कि सड़क किनारे लगी छोटी-सी रेहड़ी पर दिखाई देती है। हरियाणा के हिसार से ईमानदारी की ऐसी ही मिसाल सामने आई है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा है।
हिसार में फल बेचने वाले ज्ञान चंद मेहता के पास 81 वर्षीय रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ. पृथ्वी सिंह सांगवान फल खरीदने पहुंचे। फलों की कीमत महज 132 रुपये थी। भुगतान ऑनलाइन करते समय डॉ. सांगवान से गलती हो गई और उन्होंने 132 रुपये की जगह 13,235 रुपये ट्रांसफर कर दिए। यानी 13,103 रुपये अतिरिक्त उनके खाते से चले गए। खास बात यह रही कि उस समय उन्हें अपनी गलती का पता भी नहीं चला।
अगले दिन ज्ञान चंद मेहता खुद डॉ. सांगवान के घर पहुंचे। उन्होंने उनसे पिछला भुगतान चेक करने के लिए कहा। जब लेन-देन की जानकारी देखी गई तो अतिरिक्त भुगतान का पता चला। इसके बाद ज्ञान चंद ने बिना किसी लालच के 13,103 रुपये वापस कर दिए।
ज्ञान चंद चाहते तो इस अतिरिक्त रकम को अपने पास रख सकते थे, लेकिन उन्होंने ईमानदारी को प्राथमिकता दी। उनकी इस पहल से डॉ. सांगवान भी बेहद प्रभावित हुए।
डॉ. सांगवान ने कहा कि ऐसी घटनाएं भरोसा दिलाती हैं कि समाज में आज भी अच्छे संस्कार और ईमानदारी कायम है। ज्ञान चंद की यह छोटी-सी पहल बताती है कि ईमानदारी की कीमत रकम से नहीं, बल्कि उस भरोसे से तय होती है जो इंसान एक-दूसरे के बीच कायम रखता है।





