रसोई का बजट अब हर महीने नया झटका दे रहा है। पहले दूध और पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ, अब मसाले, तेल, चायपत्ती और चावल जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों ने भी आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। बाजार में बीते दो महीनों के दौरान कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 10 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- दो महीने में 10 से 30 फीसदी तक बढ़े रोजमर्रा के सामान के दाम
- दूध के बाद अब मसाले, तेल और चायपत्ती ने बढ़ाई चिंता
- मिडिल ईस्ट तनाव और महंगे क्रूड ऑयल का बाजार पर असर
- खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48% पहुंची, आगे और बढ़ सकते हैं दाम
- रसोई चलाना हुआ मुश्किल, हर महीने हजारों रुपये बढ़ा घरेलू खर्च
घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले लगभग हर जरूरी सामान के दाम बढ़ चुके हैं। मूंगफली से लेकर सरसों तेल तक, और जीरे से लेकर लाल मिर्च तक, हर चीज अब पहले से ज्यादा महंगी मिल रही है। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है, जिनका मासिक बजट लगातार बिगड़ता जा रहा है।
महंगाई की सबसे बड़ी मार खाद्य वस्तुओं पर दिखाई दे रही है। बाजार में रिफाइंड ऑयल 135 रुपये से बढ़कर 148 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि सरसों तेल 190 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मसालों की बात करें तो जीरा, धनिया, हल्दी और लाल मिर्च के दामों में तेज उछाल आया है।
जरूरी सामानों की नई रेट लिस्ट
| सामान | पुराने दाम | नए दाम |
|---|---|---|
| मूंगफली | 160 रुपये प्रति किलो | 200 रुपये प्रति किलो |
| रिफाइंड ऑयल | 135 रुपये प्रति लीटर | 148 रुपये प्रति लीटर |
| सरसों तेल | 170 रुपये प्रति लीटर | 190 रुपये प्रति लीटर |
| चावल | 60-120 रुपये प्रति किलो | 70-130 रुपये प्रति किलो |
| जीरा | 300 रुपये प्रति किलो | 360 रुपये प्रति किलो |
| चायपत्ती | 500 रुपये प्रति किलो | 545 रुपये प्रति किलो |
| सूखा धनिया | 180 रुपये प्रति किलो | 220 रुपये प्रति किलो |
| लाल मिर्च | 300 रुपये प्रति किलो | 350 रुपये प्रति किलो |
| हल्दी पाउडर | 210 रुपये प्रति किलो | 250 रुपये प्रति किलो |
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति का असर अब भारतीय बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, परिवहन लागत में वृद्धि और आयात खर्च बढ़ने से खाद्य वस्तुओं की कीमतें ऊपर जा रही हैं। कच्चा तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ती है, जिसका सीधा असर राशन और FMCG उत्पादों पर पड़ता है। यही वजह है कि तेल, मसाले और पैकेज्ड फूड आइटम लगातार महंगे हो रहे हैं।
महंगाई दर ने भी बढ़ाई चिंता
अप्रैल 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर यानी CPI बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है। मार्च 2026 में यह 3.40 प्रतिशत थी। लगातार बढ़ती महंगाई ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले महीनों में लोगों को और महंगे बाजार का सामना करना पड़ सकता है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की डायरेक्टर मेघा अरोड़ा के मुताबिक थोक महंगाई आने वाले समय में बढ़कर 9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा और खाद्य वस्तुओं के दामों में भी और तेजी आ सकती है।
सबसे ज्यादा असर किस पर?
महंगाई का सबसे बड़ा असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। जहां पहले एक परिवार का महीनेभर का राशन 4 से 5 हजार रुपये में आ जाता था, वहीं अब उसी सामान के लिए 6 से 7 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। गृहिणियों का कहना है कि रसोई संभालना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। हर हफ्ते बाजार जाने पर सामान के दाम बदले हुए मिल रहे हैं। मसाले और तेल जैसी जरूरी चीजें अब बजट बिगाड़ रही हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा के सामान के दामों में और उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसे में आम आदमी की जेब पर महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका है।





