Sunday, October 4, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home शहर और राज्य छत्तीसगढ

नक्सलवाद से ग्लैमर तक सरेंडर के बाद रैंप वॉक, अब फिल्मों का ऑफर… क्या बदल रही है बस्तर की तस्वीर?

DigitalDesk by DigitalDesk
October 4, 2026
in छत्तीसगढ, जगदलपुर, स्पेशल
0
From Nihilism to Glamour A ramp walk after surrendering and now film offers Is the face of Bastar changing
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

बस्तर के जंगलों में कभी बंदूक और बारूद के बीच जिंदगी गुजारने वाली 9 पूर्व महिला नक्सलियों के लिए अब जिंदगी की कहानी पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। कभी जिनके हाथों में हथियार थे, वही हाथ अब रैंप पर नजर आए और अब कैमरे के सामने अभिनय का मौका मिलने की तैयारी है। रायपुर में हुई रैंप वॉक के बाद इन महिलाओं ने सिर्फ फैशन रैंप पर कदम नहीं रखा, बल्कि उनकी नई पहचान की तरफ एक और कदम बढ़ा। अब प्रस्तावित हिंदी फिल्म के लिए उनका ऑडिशन होना है। चयन के बाद उन्हें अभिनय की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाएगी। यह कहानी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके केंद्र में सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि सरेंडर, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में वापसी का सवाल है।

1. बंदूक से रैंप तक का सफर

नक्सल प्रभावित इलाकों में महिलाओं की भूमिका लंबे समय से नक्सली संगठनों का हिस्सा रही है। लेकिन सरेंडर के बाद सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ हथियार छोड़ना नहीं होती। असल चुनौती होती है—नई जिंदगी शुरू करना। जिस व्यक्ति की पहचान वर्षों तक किसी प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी रही हो, उसके लिए सामान्य समाज में लौटना आसान नहीं होता। रोजगार, सामाजिक स्वीकार्यता और आत्मविश्वास, तीनों बड़ी चुनौतियां होती हैं। ऐसे में रैंप वॉक जैसी गतिविधि केवल ग्लैमर का हिस्सा नहीं, बल्कि सार्वजनिक मंच पर अपनी नई पहचान प्रस्तुत करने का माध्यम भी बन सकती है।

Related posts

Droughts used to topple governments not anymore How India economy has transformed

जब सूखा सरकारें गिरा देता था, अब क्यों नहीं? 1965-67 के अकाल से आज के कमजोर मानसून तक, भारत की अर्थव्यवस्था ने कैसे बदली अपनी तस्वीर

October 4, 2026
Indians are living longer but spending few years in good health WHO report reveals the picture

भारतीय ज्यादा जी रहे हैं, लेकिन स्वस्थ जीवन के साल कम WHO रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर, भारत की औसत उम्र 71 साल, हेल्दी लाइफ एक्सपेक्टेंसी सिर्फ 60.6 साल

October 4, 2026

2. बॉलीवुड की नजर क्यों पड़ी?

रायपुर में रैंप पर इन महिलाओं की मौजूदगी और सोशल मीडिया पर सामने आए उनके वीडियो ने फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचा। अब एक प्रस्तावित हिंदी फिल्म में उन्हें ऑडिशन का मौका देने की तैयारी है। हालांकि इसे सीधे फिल्म में प्रवेश मानना जल्दबाजी होगी। पहले ऑडिशन होगा। चयनित महिलाओं को कैमरे के सामने अभिनय, संवाद और शूटिंग की बारीकियां सिखाने के लिए कार्यशाला भी प्रस्तावित है। यानी यहां कहानी सिर्फ “पूर्व नक्सली बनीं अभिनेत्री” की नहीं है। कहानी यह भी है कि मनोरंजन उद्योग किसी व्यक्ति की पुरानी पहचान के बजाय उसके वर्तमान और उसकी क्षमता को एक नया मंच दे सकता है।

3. असली कहानी भी बस्तर की, कलाकार भी बस्तर से

इस पूरी कवायद का सबसे दिलचस्प पहलू प्रस्तावित फिल्म की कहानी है। बताया गया है कि फिल्म की कहानी 1994 में अविभाजित मध्य प्रदेश के दौर में बस्तर में हुई एक  वास्तविक घटना से जुड़ी है। यानी फिल्म का विषय और कलाकारों की वास्तविक जिंदगी एक-दूसरे से जुड़ते हैं। निर्माता अगर बस्तर के वास्तविक माहौल को पर्दे पर उतारना चाहते  हैं, तो वहां की परिस्थितियों को करीब से जानने वाले लोगों की मौजूदगी फिल्म को अलग तरह का अनुभव दे सकती है। लेकिन यहां एक जिम्मेदारी भी है। नक्सलवाद को ग्लैमराइज करने और नक्सलवाद से बाहर निकलने की कहानी दिखाने के बीच बहुत बड़ा अंतर है।  फिल्म को यह स्पष्ट करना होगा कि बंदूक छोड़ने के बाद जिंदगी किस तरह बदलती है।

4. पुनर्वास का नया मॉडल?

सरेंडर के बाद पुनर्वास को अक्सर आर्थिक सहायता, रोजगार और कौशल प्रशिक्षण तक सीमित करके देखा जाता है। लेकिन पुनर्वास का एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पक्ष भी है—नई पहचान। अगर कोई पूर्व नक्सली आज मंच पर खड़ी होकर अपनी प्रतिभा दिखाती है, तो वह समाज को यह संदेश भी देती है कि सरेंडर के बाद जीवन समाप्त नहीं होता। नई शुरुआत संभव है। फिल्म, कला, खेल, फैशन या दूसरे रचनात्मक क्षेत्रों में अवसर ऐसे लोगों के लिए मुख्यधारा से जुड़ने का रास्ता बन सकते हैं। हालांकि यह भी जरूरी है कि ऐसे अवसर सम्मानजनक और वास्तविक रोजगार में बदलें, सिर्फ कुछ दिनों की मीडिया चर्चा बनकर न रह जाएं।

5. बस्तर की कहानी का दूसरा चेहरा

बस्तर की पहचान लंबे समय तक नक्सल हिंसा, मुठभेड़ और जंगलों में चल रहे संघर्ष से जुड़ी खबरों से बनी रही। लेकिन बस्तर की कहानी इससे कहीं बड़ी है। यह आदिवासी संस्कृति, जंगल, कला, पर्यटन और बदलती अर्थव्यवस्था की भी कहानी है। पूर्व महिला नक्सलियों का रैंप पर आना और फिल्मों में संभावित प्रवेश इसी बदलती तस्वीर का एक प्रतीक बन सकता है। जहां कभी बंदूक उनकी पहचान थी, वहां अब कैमरा उनकी नई पहचान का माध्यम बन सकता है।

6. लेकिन सवाल भी कई हैं

इस कहानी का सकारात्मक पहलू जितना बड़ा है, उतने ही महत्वपूर्ण सवाल भी हैं। क्या इन महिलाओं को फिल्म उद्योग में स्थायी अवसर मिलेगा? क्या प्रशिक्षण के बाद इन्हें वास्तविक काम मिलेगा? क्या समाज इन्हें उनकी पुरानी पहचान से बाहर निकलने का मौका देगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या पुनर्वास की ऐसी कहानियां बस्तर के दूसरे सरेंडर करने वाले युवाओं के लिए भी अवसर पैदा कर सकती हैं? क्योंकि किसी भी पुनर्वास नीति की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जाती कि कितने लोगों ने हथियार छोड़े। सफलता तब होगी जब हथियार छोड़ने के बाद उनके हाथ में सम्मानजनक जिंदगी का विकल्प भी हो।  बस्तर की इन 9 पूर्व महिला नक्सलियों की कहानी इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि यह एक असाधारण बदलाव को सामने लाती है।

जंगल से मंच तक।
बंदूक से कैमरे तक।
नक्सली पहचान से नई पहचान तक।

रैंप वॉक से शुरू हुआ यह सफर अगर ऑडिशन, प्रशिक्षण और फिल्म में वास्तविक भूमिका तक पहुंचता है, तो यह पुनर्वास की कहानी का एक अलग अध्याय होगा। लेकिन इसे सिर्फ ग्लैमर की कहानी बनाकर छोड़ देना इस पूरे बदलाव को छोटा कर देगा। क्योंकि असली उपलब्धि यह नहीं कि कभी हथियार उठाने वाली महिलाएं अब कैमरे के सामने खड़ी होंगी। असली उपलब्धि तब होगी, जब उनके पास ऐसी जिंदगी होगी जिसमें बंदूक की जरूरत ही न हो और अपनी पहचान बनाने के लिए उनके पास कई रास्ते हों।  

Tags: #From Nihilism to Glamour A ramp walk after surrendering #now film offers Is the face of Bastar changing
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

मोदी-योगी की सवा घंटे की मुलाकात, यूपी में चुनावी गणित और संगठन की अगली चाल

Modi Yogi 75 minute meeting

मोदी-योगी की सवा घंटे की मुलाकात, यूपी में चुनावी गणित और संगठन की अगली चाल

उत्तर प्रदेश
अजीत अगरकर के बाद कौन बनेगा टीम इंडिया का नया चीफ सेलेक्टर?

अजीत अगरकर के बाद कौन बनेगा टीम इंडिया का नया चीफ सेलेक्टर?

मनोरंजन
हलफनामे में 3.82 करोड़ की संपत्ति, रोल्स रॉयस की कीमत 13 करोड़, मैथिली ठाकुर पर क्यों उठे सवाल?

हलफनामे में 3.82 करोड़ की संपत्ति, रोल्स रॉयस की कीमत 13 करोड़, मैथिली ठाकुर पर क्यों उठे सवाल?

स्पेशल

RSS feed: Unknown Feed Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version