मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने गिरोह से जुड़ी सागर निवासी रेशू चौधरी और इंटेलिजेंस विभाग के हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
कैसे खुला पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार मामला तब सामने आया जब इंदौर के शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर ने ब्लैकमेलिंग और पैसों की मांग की शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने Shweta Jain, Alka Dixit, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और जितेंद्र पुरोहित को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि अलका दीक्षित और श्वेता जैन की मुलाकात वर्ष 2019 में जेल में हुई थी। वहीं से दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और बाद में कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग नेटवर्क तैयार किया गया। पुलिस को अब इस गिरोह के डिजिटल नेटवर्क, वीडियो, ऑडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की तलाश है।
रेशू चौधरी की एंट्री से बढ़ा मामला
सरकारी गवाह बन सकती है श्वेता जैन
इस मामले का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब श्वेता जैन ने खुद को सरकारी गवाह बनाए जाने की इच्छा जताई। सूत्रों के अनुसार यदि जांच एजेंसियां उसे सरकारी गवाह बनाती हैं, तो कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल, लैपटॉप और पुराने डाटा को रिकवर करने के लिए फोरेंसिक लैब की मदद ले रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल सबूत इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल सकते हैं।
नेताओं और अफसरों के वीडियो होने का दावा
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अलका दीक्षित ने कथित तौर पर कुछ नेताओं और प्रभावशाली लोगों के वीडियो होने का दावा किया था। बताया जा रहा है कि उसने कारोबारी चिंटू ठाकुर को ब्लैकमेल करने के दौरान कुछ राजनीतिक संपर्कों का हवाला भी दिया था। इसी वजह से अब यह मामला केवल ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बड़े स्तर के हनीट्रैप नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है। यही कारण है कि खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं और अपने स्तर पर जानकारी जुटा रही हैं।
इंटेलिजेंस विभाग का कर्मचारी भी गिरफ्त में
ओमान से सागर तक की कहानी
डीसीपी राजेश त्रिपाठी के अनुसार रेशू चौधरी केमिस्ट्री से जुड़ा कोर्स करने के लिए मस्कट (ओमान) गई थी। वहीं उसकी शादी हुई, लेकिन बाद में तलाक हो गया। इसके बाद वह भारत लौट आई और कथित तौर पर एक वकील के माध्यम से श्वेता जैन के संपर्क में आई। पुलिस का कहना है कि रेशू की भूमिका केवल परिचय कराने तक सीमित थी या वह सक्रिय रूप से ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का हिस्सा थी, इसकी जांच की जा रही है।
बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल
इस पूरे मामले ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। क्योंकि जांच में कई बड़े नाम सामने आने की आशंका जताई जा रही है, इसलिए पुलिस और खुफिया एजेंसियां बेहद सावधानी से जांच आगे बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल सबूतों से बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों की पुष्टि होती है, तो यह मामला आने वाले दिनों में और भी बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजरें इस हाईप्रोफाइल हनीट्रैप कांड की जांच पर टिकी हुई हैं।