मध्यप्रदेश में अगले चार दिन सियासी हलचल से भरे रहने वाले हैं। इंदौर से उज्जैन और भोपाल तक बीजेपी और कांग्रेस के बड़े चेहरों की मौजूदगी रहेगी। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोक सेवा में 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर बीजेपी का सेवा-संकल्प अभियान। तो दूसरी तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का मध्यप्रदेश में पहला दौरा और इसी सियासी हलचल के बीच 19 सितंबर को इंदौर पहुंचेंगे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी। यानी 17 से 20 सितंबर तक मध्यप्रदेश में बड़े नेताओं का जमावड़ा। सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ कार्यक्रमों का सिलसिला है। या फिर इसके पीछे संगठन, कार्यकर्ताओं और खासकर युवा वोटरों तक पहुंच बनाने की बड़ी कवायद भी है?
- MP में दिल्ली के दिग्गजों का जमावड़ा
- राहुल से पहले नितिन नबीन की एंट्री
- 17 सितंबर से बीजेपी का सेवा-संकल्प
- 19 सितंबर को इंदौर आएंगे राहुल गांधी
- इंदौर से उज्जैन तक सियासी हलचल
- चार दिन… दो दल… बड़े चेहरे
- बीजेपी का सेवा-संकल्प… कांग्रेस का राहुल दांव
- MP में VVIP सियासत का दौर
मध्यप्रदेश में 17 से 20 सितंबर तक राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने वाली हैं। 17 सितंबर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोक सेवा में 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर मध्यप्रदेश में सेवा-संकल्प अभियान शुरू किया जाएगा। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जाना है। इसी दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पहली बार मध्यप्रदेश के दौरे पर पहुंचेंगे। नितिन नबीन इंदौर और उज्जैन में पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इंदौर से लेकर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन तक बीजेपी के कार्यक्रमों को लेकर संगठन सक्रिय है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी नितिन नबीन के दौरे और सेवा-संकल्प अभियान को लेकर जानकारी दी है। बीजेपी के लिए ये दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन का यह मध्यप्रदेश का पहला दौरा होगा। एक तरफ राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा। दूसरी तरफ सेवा-संकल्प अभियान। और तीसरी तरफ पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रम। ऐसे में बीजेपी के भीतर भी इस दौरे को लेकर तैयारियां तेज हैं। लेकिन इसी सियासी कार्यक्रम के बीच कांग्रेस ने भी अपना बड़ा कार्यक्रम तय किया है।
19 सितंबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इंदौर पहुंचेंगे। राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस संगठन तैयारियों में जुटा है। और यहीं से बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।
- राहुल से पहले नितिन नबीन की एंट्री
- बीजेपी अध्यक्ष का पहला MP दौरा
- 19 सितंबर को राहुल गांधी इंदौर में
- इंदौर बनेगा सियासी केंद्र
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी के दौरे को देखते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दूसरे बड़े नेता मध्यप्रदेश का दौरा कर रहे हैं। कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने बीजेपी के कार्यक्रमों को लेकर तंज कसा है। उनका कहना है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में लोगों की मौजूदगी को लेकर कांग्रेस को किसी स्क्रीन की जरूरत नहीं होगी। बीजेपी और कांग्रेस… दोनों तरफ से बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो चुका है।
वहीं मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस की तैयारियों में सक्रिय हैं। राहुल गांधी का इंदौर दौरा कांग्रेस के लिए कार्यकर्ताओं और युवाओं के बीच संवाद का मौका होगा। खास तौर पर ऐसे समय में जब बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही युवा वर्ग तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। यानी सियासी मुकाबला सिर्फ मंचों तक सीमित नहीं है।
- Gen Z पर बीजेपी-कांग्रेस का फोकस
- युवा वोटरों तक पहुंच की कवायद
- कार्यकर्ता बनाम कार्यकर्ता
- इंदौर में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
- बीजेपी का संगठन… कांग्रेस का संवाद
17 से 20 सितंबर के बीच मध्यप्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के बड़े नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है। हालांकि इन दौरों को सीधे तौर पर किसी चुनावी रणनीति का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि दोनों दल मध्यप्रदेश में अपने संगठन और जनसंपर्क को लगातार सक्रिय रखे हुए हैं। बीजेपी के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष का पहला दौरा और सेवा-संकल्प अभियान संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने का अवसर है। तो कांग्रेस के लिए राहुल गांधी का इंदौर दौरा अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच राजनीतिक संवाद का बड़ा कार्यक्रम है। और इन सबके बीच इंदौर एक बार फिर मध्यप्रदेश की सियासी गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। तो मध्यप्रदेश में 17 से 20 सितंबर तक सियासत का पारा चढ़ा रहेगा। एक तरफ बीजेपी का सेवा-संकल्प अभियान। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का पहला मध्यप्रदेश दौरा। तो दूसरी तरफ 19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी की मौजूदगी। अब इन दौरों से कार्यकर्ताओं में कितना उत्साह पैदा होता है। युवा वर्ग तक दोनों दल अपनी बात कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचा पाते हैं। और आने वाले दिनों में इन कार्यक्रमों का राजनीतिक असर किस रूप में दिखाई देता है। इस पर सबकी नजर रहेगी।