पटना। बिहार में जहरीली शराब ने फिर एक बार जिंदगियां छीन ली हैं, कई परिवार उजाड़ दिए हैं। छपरा और बेगूसराय से ऐसी खबरें आई हैं कि शराब पीने से 5 लोगों की मौत हो गई है और 5 की हालत बेहद खराब है। बीमारों का इलाज मशरक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। सुबह-सुबह छपरा के अस्पताल में भर्ती एक शख्स की मौत हो गई।
- बिहार में शराबबंदी लागू हुए छह साल हो चुके हैं
- अवैध और नकली शराब का धंधा राज्य में जोर पकड़ चुका है
- कच्ची-नकली शराब के कारण जब-तब मौतें होती रहती हैं
- नीतीश कुमार ने कल ही शराबबंदी को लेकर बयान दिया था
- उन्होंने तीखे तौर पर शराबबंदी का बचाव किया था
स्वास्थ्य विभाग ने छपरा सदर अस्पताल से एक टीम को भी गांव में रवाना किया है। शराब पीने से मृत व्यक्तियों के नाम डोईला गांव के संजय सिंह और बीचेन्द्र राय और अमित रंजन है। मशरक थाना क्षेत्र के कुणाल कुमार सिंह और हरेंद्र राम की भी मौत की खबर है। खुलकर तो कोई भी डॉक्टर नहीं बोल रहा, लेकिन डॉक्टर की पर्ची पर अत्यधिक अल्कोहल के सेवन की बात साफ लिखी है।
बेगूसराय में भी कहर
छपरा के अलावा, बेगूसराय में भी संदिग्ध अवस्था में एक व्यक्ति की मौत हुई है। परिजनों का कहना है कि शराब पीने से व्यक्ति की मौत हुई है। मामला वीरपुर थाना क्षेत्र के वीरपुर गांव की है। मृतक अधेड़ 50 वर्षीय सुरेश राय थे। परिजनों ने बताया कि मंगलवार को सुरेश राय वीरपुर की एक दुकान पर बैठकर शराब पी रहे थे कि उनकी तबीयत बैठे-बैठे बिगड़ गई।
परिजन उसे इलाज के लिए वीरपुर पीएचसी ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल बीरपुर थाने की पुलिस पूरे मामले की तफ्तीश में जुटी हुई है।
शराबबंदी पर बिहार में घमासान
बिहार में शराबबंदी पर बहस हो रही है, क्योंकि सरकार इसे लागू करने में विफल रही है। जीतनराम मांझी जैसे नेताओं का मानना है कि इससे समाज के शोषित वर्ग को ही नुकसान हुआ है। 1 अप्रैल 2016 यानी जब से यह कानून लागू हुआ है, तब से अब तक 6 लाख लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसमें बड़ी संख्या दलितों की है। साथ ही, जो लोग जहरीली शराब से मरते हैं, उन्हें मुआवजा भी नहीं मिलता, क्योंकि यह गैर-कानूनी है। यही वजह है कि नीतीश को खुद कई बार बयान देना पड़ा है, लेकिन वह अपनी जिद पर अब तक तो अड़े हैं।