Tuesday, June 9, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home धर्म

धर्म की जीत के लिए रची गईं रणनीतियां: श्रीकृष्ण के पांच चक्रव्यूह जिन्होंने बदल दिया महाभारत का इतिहास

DigitalDesk by DigitalDesk
June 9, 2026
in धर्म, स्पेशल
0
five Chakravyuha of Lord Krishna
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

महाभारत केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि यह धर्म और अधर्म, न्याय और अन्याय, कर्तव्य और अहंकार के बीच लड़ी गई सबसे बड़ी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक लड़ाई मानी जाती है। इस महायुद्ध में एक ओर कौरवों की विशाल सेना और महान योद्धा थे, तो दूसरी ओर पांडवों के साथ धर्म की स्थापना का संकल्प। युद्ध के मैदान में ऐसे कई महारथी मौजूद थे, जिन्हें साधारण युद्ध कौशल से हराना लगभग असंभव माना जाता था। यही कारण था कि भगवान श्रीकृष्ण ने केवल सारथी की भूमिका तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी बुद्धिमत्ता, रणनीति और दूरदर्शिता के माध्यम से युद्ध की दिशा बदल दी।

धर्म की जीत के लिए रची गईं रणनीतियां

श्रीकृष्ण के पांच चक्रव्यूह

जिन्होंने बदल दिया महाभारत का इतिहास

भीष्म पितामह को परास्त करने के लिए शिखंडी बने सबसे बड़ा अस्त्र

द्रोणाचार्य के विरुद्ध अपनाई गई मनोवैज्ञानिक रणनीति

जयद्रथ वध में श्रीकृष्ण की माया बनी निर्णायक

कर्ण की अजेयता तोड़ने के लिए रची गई विशेष योजना

दुर्योधन के अंत के साथ अधर्म पर धर्म की हुई विजय

महाभारत के अनेक प्रसंग इस बात के प्रमाण हैं कि केवल शारीरिक शक्ति ही विजय का आधार नहीं होती, बल्कि सही समय पर सही रणनीति भी इतिहास रच देती है। भीष्म, द्रोण, कर्ण, जयद्रथ और दुर्योधन जैसे योद्धाओं को परास्त करने के लिए श्रीकृष्ण ने ऐसी योजनाएं बनाईं, जिन्होंने अंततः पांडवों की विजय का मार्ग प्रशस्त किया।

Related posts

RASIFAL Daily Horoscope

मंगलवार का रा​शिफल …जानें क्या कहता है आज का विशेष ज्योतिषीय संकेत

June 9, 2026
BrahMos supersonic cruise missile

ब्रह्मोस: भारत की मिसाइल ताकत पर दुनिया की नजर…3. क्या है ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत?

June 8, 2026

युद्ध के शुरुआती दिनों में सबसे बड़ी चुनौती थे भीष्म पितामह। वे न केवल कुरु वंश के सबसे अनुभवी योद्धा थे, बल्कि उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान भी प्राप्त था। दस दिनों तक उन्होंने पांडव सेना को भारी क्षति पहुंचाई और उनके सामने कोई भी योद्धा टिक नहीं पा रहा था। ऐसी स्थिति में श्रीकृष्ण ने शिखंडी को रणनीति का केंद्र बनाया। भीष्म शिखंडी को स्त्री मानते थे और उन पर अस्त्र नहीं उठाने का प्रण ले चुके थे। इसी कमजोरी को आधार बनाकर अर्जुन ने शिखंडी की आड़ से भीष्म पर तीरों की वर्षा की। परिणामस्वरूप भीष्म शरशैया पर गिर गए और कौरव सेना की सबसे बड़ी ताकत निष्क्रिय हो गई।

भीष्म के बाद पांडवों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके गुरु द्रोणाचार्य थे। युद्ध कौशल और दिव्य अस्त्रों के ज्ञान में उनका कोई मुकाबला नहीं था। जब तक द्रोणाचार्य रणभूमि में सक्रिय रहे, पांडव सेना लगातार नुकसान झेलती रही। श्रीकृष्ण ने समझ लिया था कि उन्हें शस्त्रों से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से पराजित करना होगा। योजना के तहत अश्वत्थामा नामक हाथी का वध कराया गया और यह समाचार फैलाया गया कि अश्वत्थामा मारा गया है। जब युधिष्ठिर ने भी इस बात की पुष्टि की, तो द्रोणाचार्य को विश्वास हो गया कि उनका पुत्र नहीं रहा। पुत्र-वियोग के दुःख में उन्होंने हथियार त्याग दिए और उसी अवसर का लाभ उठाकर धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया।

महाभारत के सबसे चर्चित प्रसंगों में जयद्रथ वध भी शामिल है। अभिमन्यु की मृत्यु के लिए स्वयं को जिम्मेदार मानते हुए अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली थी कि वह अगले दिन सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करेंगे। कौरवों ने जयद्रथ की सुरक्षा के लिए अभेद्य घेरा बना दिया था। समय तेजी से बीत रहा था और अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने में असफल दिखाई दे रहे थे। तब श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से सूर्य को ढक दिया। अंधेरा छाते ही जयद्रथ को लगा कि सूर्यास्त हो चुका है और वह सुरक्षित होकर सामने आ गया। उसी क्षण श्रीकृष्ण ने माया हटा दी और अर्जुन ने एक ही बाण से उसका वध कर दिया।

कर्ण का प्रसंग महाभारत की सबसे जटिल घटनाओं में गिना जाता है। कर्ण असाधारण योद्धा होने के साथ-साथ दानवीर भी था। जन्म से प्राप्त कवच और कुंडल उसे लगभग अजेय बनाते थे। श्रीकृष्ण जानते थे कि जब तक कर्ण के पास यह सुरक्षा कवच रहेगा, तब तक उसे हराना कठिन होगा। इसी कारण इंद्र को ब्राह्मण वेश में भेजा गया और कर्ण से कवच-कुंडल दान में मांग लिए गए। बाद में युद्ध के दौरान जब उसका रथ कीचड़ में फंस गया और वह उसे निकालने में व्यस्त था, तब अर्जुन ने उस पर प्रहार किया। यह घटना आज भी धर्म और युद्धनीति पर बहस का विषय बनी हुई है।

युद्ध के अंतिम चरण में दुर्योधन बचा था, जिसकी शक्ति और युद्धकौशल अद्भुत था। उसकी मां गांधारी के वरदान ने उसके शरीर को लगभग अभेद्य बना दिया था। जब भीम और दुर्योधन के बीच गदा युद्ध शुरू हुआ, तो भीम को सफलता नहीं मिल रही थी। तभी श्रीकृष्ण ने संकेत दिया कि दुर्योधन की जांघ ही उसका कमजोर हिस्सा है। गदा युद्ध के नियमों के विपरीत जाकर भीम ने उसकी जांघ पर प्रहार किया। इस वार ने दुर्योधन को पराजित कर दिया और महाभारत युद्ध का अंत सुनिश्चित हो गया।

महाभारत के ये प्रसंग केवल युद्ध की कहानियां नहीं हैं, बल्कि वे रणनीति, नेतृत्व और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की गहरी शिक्षा भी देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने अंत में यह भ सिद्ध किया कि आपके सामने जब अधर्म और अन्याय करने वाले लोग हों तो केवल और केवल बलवान होना ही पर्याप्त नहीं होता है। अधर्म अन्याय के सामने बुद्धि और धैर्य के साथ समय के अनुकूल रणनीति ही आपके विजय का मार्ग प्रशस्त करती है। यही एक ऐसी कारण है कि महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका एक सारथी से कहीं अधिक, धर्म के महान मार्गदर्शक और रणनीतिकार के रूप में याद की जाती है।

Post Views: 50
Tags: #five Chakravyuha #Lord Krishna#Mahabharata Context #Stories of the Mahabharata War #Five Chakravyuha of Lord Krishna #History of the Mahabharata
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

सिद्धारमैया की कुर्सी पर सस्पेंस, DK शिवकुमार की ब्रेकफास्ट मीटिंग से बढ़ी हलचल

सिद्धारमैया की कुर्सी पर सस्पेंस, DK शिवकुमार की ब्रेकफास्ट मीटिंग से बढ़ी हलचल

सिद्धारमैया की कुर्सी पर सस्पेंस, DK शिवकुमार की ब्रेकफास्ट मीटिंग से बढ़ी हलचल

मुख्य समाचार
बंगाल की राजनीति में मचा बड़ा घमासान, TMC में टूट की चर्चा तेज!

बंगाल की राजनीति में मचा बड़ा घमासान, TMC में टूट की चर्चा तेज!

मुख्य समाचार
बंगाल की मुस्लिम बहुल फाल्टा सीट पर BJP की ऐतिहासिक जीत, 71% वोट लेकर देबांग्शु पांडा ने मारी बाजी

बंगाल की मुस्लिम बहुल फाल्टा सीट पर BJP की ऐतिहासिक जीत, 71% वोट लेकर देबांग्शु पांडा ने मारी बाजी

मुख्य समाचार

RSS Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version