इस्लामाबाद में US-ईरान वार्ता का पहला दौर खत्म, 2 घंटे की बातचीत में दिखा लचीलापन
पहले दौर की बातचीत खत्म, माहौल रहा सकारात्मक
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अहम शांति वार्ता का पहला दौर पूरा हो गया है। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में दोनों पक्षों ने बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए लचीला रुख दिखाया। सूत्रों के अनुसार, वार्ता का माहौल सकारात्मक रहा और आगे के दौर के लिए रास्ता खुला है।
पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका
इस पूरी बातचीत में शहबाज शरीफ की सरकार मेजबान और मध्यस्थ दोनों की भूमिका निभा रही है। पाकिस्तानी नेतृत्व ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच संवाद कायम रखने के लिए ‘प्रॉक्सिमिटी टॉक्स’ का तरीका अपनाया है, जिसमें दोनों पक्ष अलग-अलग कमरों में बैठकर बातचीत कर रहे हैं और संदेशों का आदान-प्रदान पाकिस्तानी अधिकारी कर रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बड़े नेता शामिल
अमेरिका की ओर से प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी भी इस वार्ता में शामिल हैं। वहीं ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ नेतृत्व कर रहे हैं, जिनके साथ वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा अधिकारी भी मौजूद हैं।
मुख्य मुद्दे: सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट
वार्ता के केंद्र में लेबनान में सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा है। ईरान ने साफ किया है कि वह किसी भी समझौते में लेबनान को शामिल किए बिना सहमत नहीं होगा। इसके अलावा, ईरान ने भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचने की गारंटी की मांग भी रखी है। दूसरी ओर अमेरिका ने पहले ही चेतावनी दी है कि अगर शांति समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई दोबारा हो सकती है।
अब एक्सपर्ट लेवल पर होगी बातचीत
पहले दौर के बाद अब वार्ता तकनीकी स्तर पर पहुंच गई है। तीन अलग-अलग समितियां—राजनीतिक, आर्थिक और कानूनी विशेषज्ञों की—इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा कर रही हैं। यह संकेत है कि बातचीत सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि ठोस समझौते की दिशा में बढ़ रही है।
आगे भी जारी रह सकती है वार्ता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह शांति वार्ता लंबी चल सकती है और अगले दिन भी जारी रहने की संभावना है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, पहले दौर के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है और कूटनीतिक हल की उम्मीदें बनी हुई हैं।
शांति की दिशा में अहम कदम
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच यह वार्ता एक अहम मोड़ मानी जा रही है। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ेगी बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।