उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के एक साधारण किसान रामकेश ने मधुमक्खी पालन (Beekeeping) को अपनी आजीविका का जरिया बनाकर सफलता की एक नई इबारत लिखी है। एक सड़क दुर्घटना के बाद यूट्यूब (YouTube) के माध्यम से शुरू हुआ उनका यह सफर आज देश-विदेश तक फैल चुका है, जिससे वे सालाना लाखों रुपये का टर्नओवर हासिल कर रहे हैं। यूपी अंबेडकरनगर के साधारण किसान हैं रामकेश…जानें कैसे बदली मधुमक्खी पालन से रामकेश की जिंदगी
1. आपदा को बदला अवसर में: यूट्यूब और प्रशिक्षण से शुरू हुआ सफर
रामकेश की सफलता की कहानी संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है। साल 2018 में एक सड़क दुर्घटना में उनका दाहिना पैर टूट गया था। इस कठिन समय में उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और यूट्यूब पर मधुमक्खी पालन से जुड़े वीडियो देखना शुरू किया।
- वैज्ञानिक मार्गदर्शन: उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) पांती के वैज्ञानिकों डॉ. शिवम कुमार और डॉ. प्रदीप कुमार से संपर्क किया।
- शुरुआती निवेश: केंद्र से 7 दिनों का निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, उन्होंने महज 30 हजार रुपये की लागत से केवल 4 डिब्बों (बॉक्स) के साथ इस काम की शुरुआत की थी, जो आज एक विशाल साम्राज्य में बदल चुका है।
2. सालाना ₹50 लाख की कमाई: 4,000 बॉक्स से 40 टन शहद का उत्पादन
वर्तमान में रामकेश का यह व्यवसाय उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी फैल चुका है। अब वे बड़े पैमाने पर शहद और पराग कण (Pollen Grains) का उत्पादन कर रहे हैं:
- कारोबार का विस्तार: उनके पास कुल 4,000 मधुमक्खी के बॉक्स हैं, जिनमें से 3,000 डिब्बे बिहार के वैशाली में और 1,000 डिब्बे उनके गृह जनपद अंबेडकरनगर में लगे हैं।
- बंपर उत्पादन और कमाई: इन बॉक्स के जरिए वे हर साल लगभग 40 टन शहद का उत्पादन करते हैं, जिससे उन्हें सालाना 50 लाख रुपये की शुद्ध आय होती है। इसके अलावा, उन्होंने पराग कण एकत्र करने के लिए विशेष मशीनें लगाई हैं, जिसे बेचकर भी वे लाखों की अतिरिक्त कमाई करते हैं।
3. ब्रांड्स की पहली पसंद और वैश्विक बाजार: श्रीलंका तक हो रही सप्लाई
रामकेश द्वारा उत्पादित शहद की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन है कि देश की दिग्गज कंपनियां इनकी मुरीद हैं। डाबर (Dabar), पतंजलि (Patanjali) और हमदर्द (Hamdard) जैसी बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियां सीधे इनसे शहद खरीदती हैं। घरेलू बाजार में मजबूत पैठ बनाने के बाद, अब रामकेश का कारोबार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चमक रहा है और वे श्रीलंका तक शहद की आपूर्ति कर रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है, साथ ही वे ‘रेडियो अयोध्या’ के सदस्य के रूप में अन्य किसानों को भी जागरूक कर रहे हैं।
4. सरकार की ओर से बड़ा संबल: मधुमक्खी पालन पर 40% सब्सिडी
कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा विज्ञानी डॉ. शिवम कुमार के अनुसार, जो भी किसान मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं, उनके लिए सरकार की ओर से बेहतरीन योजनाएं चलाई जा रही हैं:
- 40 प्रतिशत अनुदान: इस व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग द्वारा पात्र किसानों को 40% तक की सब्सिडी (अनुदान) दी जा रही है।
- चयन और प्रशिक्षण: विभाग द्वारा पहले इच्छुक और योग्य किसानों का चयन किया जाता है, जिसके बाद उन्हें मधुमक्खी पालन से संबंधित बारीकियों का तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है ताकि वे सफल उद्यमी बन सकें।
5. उत्तर प्रदेश में मधुमक्खी पालन का सही समय और अनुकूल परिस्थितियां
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जलवायु मधुमक्खी पालन के लिए बेहद उपयुक्त है, बशर्ते इसे सही समय पर शुरू किया जाए:
- सबसे उपयुक्त समय: यूपी में मधुमक्खी पालन के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम ठंडा और मक्खियों के अनुकूल होता है।
- प्राकृतिक संसाधन: इस छः महीने की अवधि में खेतों और जंगलों में सरसों, लीची, सूरजमुखी और यूकेलिप्टस (सफेदा) के पौधों में भारी मात्रा में फूल आते हैं। इन फूलों से मधुमक्खियों को पर्याप्त मात्रा में पराग और मधुरस (नेक्टर) मिलता है, जिससे शहद की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होती है।





