एग्जिट पोल में बंगाल में कांटे की टक्कर, असम मेँ बीजेपी को फिर सत्ता के के संकेत

एग्जिट पोल में बंगाल में कांटे की टक्कर, बीजेपी को बढ़त के संकेत

5 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मतदान पूरा, अब नतीजों से पहले सियासी हलचल तेज

 

देश के पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब सबकी नजरें एग्जिट पोल पर टिकी हैं। अलग-अलग सर्वे एजेंसियों ने अपने-अपने अनुमान जारी कर दिए हैं, जिनमें खासकर West Bengal को लेकर तस्वीर बेहद दिलचस्प नजर आ रही है। यहां मुकाबला सीधा सत्तारूढ़ TMC और Bharatiya Janata Party के बीच माना जा रहा है, और एग्जिट पोल के आंकड़े भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि राज्य में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।

 

एग्जिट पोल के आंकड़ों ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। JVC के एग्जिट पोल के मुताबिक पश्चिम बंगाल में बीजेपी को 138 से 159 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि टीएमसी 131 से 152 सीटों के बीच सिमट सकती है। इस सर्वे में अन्य दलों के खाते में 0 से 2 सीटें जाने की संभावना जताई गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि दोनों प्रमुख दलों के बीच बेहद करीबी मुकाबला हो सकता है और अंतिम परिणाम कुछ भी हो सकता है।

 

वहीं Matrize के एग्जिट पोल में तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। इस सर्वे के अनुसार बीजेपी को 146 से 161 सीटें मिल सकती हैं, जो स्पष्ट बहुमत का संकेत देता है। दूसरी ओर टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है। अन्य दलों को 6 से 10 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। इस अनुमान के मुताबिक बीजेपी राज्य में मजबूत स्थिति में नजर आ रही है और सत्ता परिवर्तन की संभावना को बल मिलता दिख रहा है।

 

चाणक्य स्ट्रेटजीज के एग्जिट पोल ने भी बीजेपी को बढ़त दी है। इस सर्वे के अनुसार बीजेपी को 150 से 160 सीटें मिल सकती हैं, जबकि टीएमसी को 130 से 140 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। अन्य दलों के खाते में 6 से 10 सीटें जा सकती हैं। इस तरह तीन प्रमुख एग्जिट पोल में बीजेपी को बढ़त मिलती दिख रही है, हालांकि टीएमसी भी मुकाबले में पूरी तरह बनी हुई है।

 

इन एग्जिट पोल के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव बेहद रोचक और करीबी रहा है। सत्तारूढ़ टीएमसी ने जहां अपनी योजनाओं और जनकल्याणकारी नीतियों के दम पर जनता का समर्थन बनाए रखने की कोशिश की, वहीं बीजेपी ने आक्रामक प्रचार और संगठनात्मक मजबूती के जरिए चुनौती पेश की। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी और रणनीतिक दांव-पेंच देखने को मिले थे।

 

हालांकि, एग्जिट पोल को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता। कई बार ऐसा देखा गया है कि एग्जिट पोल के अनुमान वास्तविक नतीजों से अलग होते हैं। इसलिए असली तस्वीर मतगणना के दिन ही साफ होगी। इसके बावजूद एग्जिट पोल राजनीतिक दलों के लिए संकेत जरूर देते हैं और उनके आत्मविश्वास या चिंता का स्तर तय करते हैं।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन की संभावना बन सकती है। लेकिन अगर टीएमसी अपने मजबूत गढ़ों में बढ़त बनाए रखने में सफल रहती है, तो वह फिर से सरकार बना सकती है। ऐसे में यह चुनाव न सिर्फ राज्य की राजनीति, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

फिलहाल सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि एग्जिट पोल कितने सटीक साबित होते हैं और आखिरकार सत्ता की कुर्सी किसके हाथ में जाएगी। इतना तय है कि पश्चिम बंगाल का यह चुनाव परिणाम देश की राजनीति में बड़ा संदेश देने वाला होगा।

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