Europe Heatwave 2026: यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से हाहाकार, 40 डिग्री के पार पहुंचा पारा, सड़कें पिघलीं, अस्पतालों और श्मशानों पर बढ़ा दबाव

यूरोप इस समय अपने इतिहास की सबसे भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। भीषण गर्मी के कारण सड़कें पिघलने लगी हैं, ट्राम की पटरियां मुड़ रही हैं और हजारों लोगों को हीट स्ट्रोक व अन्य गर्मी से जुड़ी समस्याओं के चलते अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा है। लगातार बढ़ते तापमान ने स्वास्थ्य सेवाओं पर भी भारी दबाव डाल दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 21 जून से अब तक यूरोप में गर्मी से जुड़ी परिस्थितियों के कारण 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की चरम मौसमी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

फ्रांस में गर्मी से बढ़ीं मौतें, अस्पतालों और श्मशानों पर बढ़ा दबाव

भीषण गर्मी का सबसे गंभीर असर फ्रांस में देखने को मिला है। राजधानी पेरिस में गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ने के कारण श्मशान गृह और शवगृह अतिरिक्त दबाव झेल रहे हैं। वहीं 18 जून के बाद से फ्रांस में 74 लोगों की डूबने से मौत भी दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि तेज गर्मी से राहत पाने के लिए कई लोग असुरक्षित जलाशयों में नहाने पहुंचे, जहां हादसे हुए। मौसम विभाग का कहना है कि मौजूदा गर्मी का दौर कमजोर पड़ने के बाद भी जुलाई में एक और हीटवेव आने की आशंका बनी हुई है।

जर्मनी से स्विट्जरलैंड तक टूटे तापमान के रिकॉर्ड, कई देशों में 40 डिग्री के पार पहुंचा पारा

यूरोप के कई देशों में इस बार गर्मी ने पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। जर्मनी में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जबकि चेक गणराज्य में भी पारा 40 डिग्री के पार दर्ज किया गया। स्विट्जरलैंड के बासेल शहर में 38.8 डिग्री सेल्सियस का नया रिकॉर्ड बना। वहीं डेनमार्क में वर्ष 1874 के बाद का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया और ब्रिटेन में जून महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया। स्लोवाकिया के टर्ना नाद बोडवौ क्षेत्र में 41 डिग्री तापमान दर्ज किया गया, जबकि हंगरी के असजोड में पारा 41.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

भीषण गर्मी से ऊर्जा व्यवस्था पर भी असर, कई क्षेत्रों में बिजली कटौती लागू

अत्यधिक गर्मी का असर केवल स्वास्थ्य और परिवहन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऊर्जा व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। युद्ध से पहले ही दबाव झेल रहे यूक्रेन के बिजली नेटवर्क पर गर्मी ने अतिरिक्त बोझ डाल दिया। बढ़ती बिजली मांग और ऊंचे तापमान के चलते कई इलाकों में आपातकालीन बिजली कटौती लागू करनी पड़ी। मौसम विभाग ने देश में 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने का अनुमान जताया है। वहीं हंगरी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को जहां संभव हो, वहां घर से काम करने की सलाह दी है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर पीने के पानी और एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो दिखा रहे हैं गर्मी की भयावह तस्वीर

यूरोप की भीषण गर्मी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं। कई वीडियो में खुले स्थानों पर रखे बर्तनों में केवल धूप की गर्मी से अंडे और बेकन पकते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो ने लोगों को हैरान कर दिया है और यह दिखाया है कि तापमान किस स्तर तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञ लगातार लोगों से दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की अपील कर रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन को लेकर फिर बढ़ी चिंता, विशेषज्ञों ने दिए सतर्क रहने के संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में लगातार बढ़ रही हीटवेव केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक जलवायु पैटर्न का संकेत है। रिकॉर्ड तोड़ तापमान, बढ़ती मौतें और बुनियादी ढांचे पर पड़ता दबाव भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी माने जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार नहीं थमी, तो आने वाले वर्षों में ऐसी चरम गर्मी की घटनाएं और अधिक सामान्य हो सकती हैं।

 

 

 

 

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