नई दिल्ली। बदलते युद्ध के दौर में अब लड़ाइयां सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान में तकनीक की ताकत से जीती जाती हैं। ऐसे समय में भारत ने अपनी हवाई सुरक्षा को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय वायुसेना (IAF) को स्वदेशी ‘नेत्रा’ एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AEW&C) का फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस (FOC) सौंप दिया है। इसके साथ ही यह अत्याधुनिक सिस्टम अब पूरी तरह युद्ध संचालन के लिए तैयार हो गया है। यह उपलब्धि सिर्फ एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और आधुनिक एयर डिफेंस नेटवर्क की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
DRDO ने भारतीय वायुसेना को सौंपा फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस, अब जंग के मैदान में पूरी तरह तैयार ‘नेत्रा’
क्या है ‘नेत्रा’ सिस्टम?
‘नेत्रा’ एक उड़ता हुआ एयरबोर्न रडार और कमांड सेंटर है। इसका काम दुश्मन के विमान, ड्रोन, मिसाइल और अन्य हवाई खतरों की लंबी दूरी से पहचान करना और भारतीय लड़ाकू विमानों को रियल-टाइम में दिशा-निर्देश देना है।
आसान भाषा में कहें तो यह भारतीय वायुसेना की “उड़ती हुई आंख और दिमाग” है, जो युद्ध के दौरान पूरे हवाई क्षेत्र पर नजर रखता है।
नेत्रा की 10 सबसे बड़ी खूबियां
1. 360 डिग्री तक निगरानी
नेत्रा लगभग पूरे हवाई क्षेत्र पर लगातार नजर रख सकता है और किसी भी दिशा से आने वाले खतरे को पहचान सकता है।
2. 250 से 500 किलोमीटर तक की डिटेक्शन क्षमता
दुश्मन के विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और मिसाइलों को सैकड़ों किलोमीटर पहले ही ट्रैक कर सकता है।
3. रियल टाइम बैटल मैनेजमेंट
युद्ध के दौरान पूरे ऑपरेशन की निगरानी करते हुए वायुसेना को तत्काल सूचना और निर्देश उपलब्ध कराता है।
4. दोस्त और दुश्मन की पहचान
सिस्टम अपने और दुश्मन के विमानों में तुरंत अंतर कर सकता है, जिससे फ्रेंडली फायर जैसी घटनाओं की संभावना कम होती है।
5. फाइटर जेट्स को निर्देश देने की क्षमता
सिर्फ निगरानी ही नहीं, बल्कि यह भारतीय लड़ाकू विमानों को लक्ष्य तक पहुंचने और इंटरसेप्ट करने के लिए लाइव गाइड भी करता है।
6. क्रूज मिसाइल और ड्रोन पर नजर
लो-फ्लाइंग क्रूज मिसाइलों और छोटे ड्रोन जैसी आधुनिक चुनौतियों को भी समय रहते पहचान सकता है।
7. समुद्री निगरानी भी
यह केवल हवाई खतरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्र में मौजूद जहाजों की भी निगरानी कर सकता है।
8. अत्याधुनिक AESA रडार
इसमें लगा एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार बेहद तेज, सटीक और मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग में सक्षम है।
9. मोबाइल कमांड सेंटर
यह हवा में उड़ते हुए कमांड पोस्ट की तरह काम करता है और विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्म के बीच समन्वय स्थापित करता है।
10. दुश्मन के लिए चुनौती
इसकी उन्नत तकनीक दुश्मन की गतिविधियों को काफी पहले पकड़ लेती है, जिससे भारतीय सेना को रणनीतिक बढ़त मिलती है।
ब्राजील के विमान पर भारतीय तकनीक
नेत्रा सिस्टम को ब्राजील निर्मित एम्ब्रेयर EMB-145 विमान पर लगाया गया है। इसके ऊपरी हिस्से पर स्वदेशी AESA रडार लगाया गया है, जिसे DRDO ने विकसित किया है। भारतीय वायुसेना को ऐसे तीन विमान पहले ही दिए जा चुके हैं, जो शुरुआती ऑपरेशनल मंजूरी के साथ सेवा में थे।
बालाकोट एयरस्ट्राइक में निभाई थी अहम भूमिका
फरवरी 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान नेत्रा सिस्टम ने भारतीय वायुसेना को महत्वपूर्ण रियल-टाइम निगरानी और ऑपरेशनल सपोर्ट उपलब्ध कराया था। उस मिशन में यह एक “ऑपरेशनल ब्रेन” की तरह काम कर रहा था।
FOC क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस (FOC) मिलने का मतलब है कि सिस्टम ने सभी तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा मानक और ऑपरेशनल वैलिडेशन सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। अब इसे किसी भी सैन्य अभियान में बिना किसी तकनीकी प्रतिबंध के पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा।
रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत की हवाई निगरानी और कमांड-एंड-कंट्रोल क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह भारत की सामरिक शक्ति को नई मजबूती देगा।
IAF ने बताया आत्मनिर्भर भारत की बड़ी सफलता
भारतीय वायुसेना के डिप्टी चीफ एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि यह सिर्फ एक रक्षा परियोजना की सफलता नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों और भारतीय वायुसेना की साझेदारी का परिणाम है, जिसने आत्मनिर्भर भारत के सपने को मजबूत किया है।
अब छह और ‘नेत्रा’ सिस्टम की तैयारी
इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने संकेत दिए कि भविष्य में नेत्रा कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा और छह नए एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग सिस्टम भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किए जाएंगे। इससे भारत की हवाई निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
भारत के पास पहले से कौन सा AWACS है?
नेत्रा के अलावा भारतीय वायुसेना रूस के IL-76 विमान पर आधारित तीन फाल्कन AWACS सिस्टम का भी उपयोग करती है। ये लंबी दूरी की निगरानी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन नेत्रा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित होने के कारण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
FOC समारोह में कौन-कौन रहा मौजूद?
बेंगलुरु में आयोजित समारोह में रक्षा सचिव एवं DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह, पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर.के.एस. भदौरिया (सेवानिवृत्त), पूर्व DRDO चेयरमैन डॉ. एस. क्रिस्टोफर, एयर फोर्स और DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक, इंजीनियर तथा ‘नेत्रा’ परियोजना से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे।
भारत की आसमानी सुरक्षा का नया युग
दुनिया तेजी से नेटवर्क-सेंट्रिक और हाई-टेक युद्ध की ओर बढ़ रही है। ऐसे दौर में ‘नेत्रा’ सिर्फ एक रडार सिस्टम नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक बढ़त का प्रतीक बन चुका है। दुश्मन की हर गतिविधि पर बाज जैसी नजर, चीते जैसी फुर्ती और स्वदेशी तकनीक का भरोसा—इन तीनों का संगम अब भारतीय वायुसेना की ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है।