लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की संभावित आहट के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ताबड़तोड़ दौरे और जनसभाओं के जरिए चुनावी माहौल को नई गति दे दी है। शुक्रवार को उन्होंने एक ही दिन में शामली, बिजनौर और गाजियाबाद का दौरा कर करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इससे पहले वे बांदा, चित्रकूट, पूर्वांचल और अवध के कई जिलों में भी लगातार जनसभाएं कर चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के शुरुआती चुनावी अभियान की बड़ी रणनीति माना जा रहा है।
- एक दिन, तीन जिले… योगी का मेगा चुनावी अभियान
- विकास परियोजनाओं के साथ सियासी संदेश भी स्पष्ट
- हिंदुत्व और सुशासन के एजेंडे पर भाजपा का फोकस
- सीट बंटवारे में उलझा विपक्ष, भाजपा मैदान में सक्रिय
- लगातार दौरों से चुनावी माहौल बनाने में जुटे मुख्यमंत्री
- यूपी में चुनावी रण का बिगुल! योगी के तूफानी दौरों से तेज हुई सियासत, विपक्ष अभी भी समीकरणों में उलझा
अपने संबोधनों में योगी आदित्यनाथ ने विकास, कानून-व्यवस्था, किसान कल्याण और सामाजिक समरसता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। साथ ही विपक्ष पर तीखे राजनीतिक हमले करते हुए भाजपा के कोर एजेंडे को भी मजबूती से सामने रखा। विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री अपनी ‘सख्त प्रशासक’ और ‘विकास पुरुष’ की छवि को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
उधर, विपक्षी दलों में अभी भी सीटों के बंटवारे और गठबंधन को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी तालमेल पर चर्चाएं जारी हैं, जबकि भाजपा संगठन और सरकार दोनों स्तर पर चुनावी तैयारियों को धार देने में जुटी दिखाई दे रही है।
लगातार जिलों के दौरे, विकास योजनाओं की सौगात और आक्रामक राजनीतिक संदेशों के जरिए योगी आदित्यनाथ यह संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा चुनावी मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि चुनावी रणनीति की वास्तविक परीक्षा मतदान के समय ही होगी और अंतिम फैसला प्रदेश की जनता के हाथ में रहेगा।





