राजधानी से बाहर कैबिनेट का नया अध्याय, विरासत को सम्मान और विकास को नई रफ्तार
- जगदीशपुर में होगी आठवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट
- विरासत स्थलों से लिए जा रहे बड़े फैसले
- महापुरुषों के सम्मान का बना नया मॉडल
- पर्यटन और विकास को मिल रही नई पहचान
- मध्यप्रदेश का नवाचार बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय
इस पहल का उद्देश्य केवल सरकारी बैठक करना नहीं, बल्कि उन ऐतिहासिक स्थलों, जननायकों और सांस्कृतिक धरोहरों को सम्मान देना भी है, जिन्होंने मध्यप्रदेश की पहचान को गौरव प्रदान किया। यही कारण है कि प्रत्येक बैठक को किसी न किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व, सांस्कृतिक विरासत या जनजातीय अस्मिता से जोड़ा गया है।
मंत्रालय से निकलकर जनता के बीच पहुंची सरकार
लंबे समय तक कैबिनेट की बैठकों का केंद्र केवल राजधानी भोपाल रहा। लेकिन पिछले ढाई वर्षों में सरकार ने इस परंपरा को बदलते हुए प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में मंत्रिपरिषद की बैठकें आयोजित कीं। इससे न केवल स्थानीय प्रशासन को गति मिली बल्कि उन क्षेत्रों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई।
सरकार का मानना है कि जब प्रदेश के महत्वपूर्ण फैसले उन्हीं क्षेत्रों में लिए जाएं, जहां विकास और विरासत दोनों मौजूद हैं, तो जनता का सरकार से जुड़ाव भी मजबूत होता है।
जगदीशपुर क्यों है खास?
भोपाल के निकट स्थित जगदीशपुर (पूर्व नाम इस्लामनगर) अपनी ऐतिहासिक धरोहर, महलों और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। यहां मौजूद प्राचीन महल, किलानुमा संरचनाएं और सांस्कृतिक विरासत मध्यप्रदेश के गौरवशाली इतिहास की गवाही देती हैं।
यहीं कैबिनेट बैठक आयोजित कर सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि विकास के साथ-साथ विरासत का संरक्षण भी शासन की प्राथमिकता है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
महापुरुषों को सम्मान देने की अनूठी पहल
डॉ. मोहन यादव सरकार ने जिन स्थानों पर कैबिनेट बैठकें आयोजित की हैं, वे केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
रानी दुर्गावती के शौर्य, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के सुशासन, जनजातीय नायक राजा भभूत सिंह के बलिदान और भील समाज की आस्था के केंद्र नागलवाड़ी जैसे स्थानों पर बैठकों के जरिए सरकार ने प्रदेश के गौरवशाली व्यक्तित्वों को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया है।
पर्यटन को भी मिला नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी ऐतिहासिक स्थल पर कैबिनेट बैठक होने से उस स्थान की राष्ट्रीय पहचान बढ़ती है। मीडिया और प्रशासनिक गतिविधियों के कारण वहां पर्यटकों की रुचि भी बढ़ती है। इसी का परिणाम है कि महेश्वर, खजुराहो, पचमढ़ी, राजवाड़ा और नागलवाड़ी जैसे स्थानों को नई चर्चा मिली। सरकार इसे “विरासत के माध्यम से विकास” की रणनीति मान रही है।
विश्व धरोहर से लेकर हिल स्टेशन तक
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आयोजित बैठकों में विश्व धरोहर खजुराहो से लेकर प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी तक शामिल हैं। प्रत्येक स्थान की अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान रही है।
पचमढ़ी में राजा भभूत सिंह के शौर्य को याद किया गया, जबकि खजुराहो में विश्व धरोहर संरक्षण और पर्यटन विकास को नई दिशा देने वाले निर्णयों पर चर्चा हुई।
कृषि कैबिनेट भी पहुंचेगी अंचलों में
सरकार ने केवल सामान्य कैबिनेट ही नहीं, बल्कि कृषि कैबिनेट को भी प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित करने का निर्णय लिया है। इससे किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा तथा क्षेत्र विशेष की समस्याओं के अनुरूप नीतिगत निर्णय लिए जा सकेंगे। मप्र में आने वाले दिनों में मोहन सरकार बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी कैबिनेट की बैठक कर सकती है, यह भी प्रस्तावित है।
अब तक यहां हुईं डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठकें
- 3 जनवरी 2024 – जबलपुर (शक्ति भवन)
- 5 अक्टूबर 2024 – सिंग्रामपुर, दमोह (रानी दुर्गावती सम्मान)
- 24 जनवरी 2025 – महेश्वर, खरगोन (लोकमाता अहिल्याबाई)
- 20 मई 2025 – राजवाड़ा, इंदौर (अहिल्याबाई 300वीं जयंती वर्ष)
- 3 जून 2025 – पचमढ़ी, नर्मदापुरम (राजा भभूत सिंह)
- 9 दिसंबर 2025 – खजुराहो, छतरपुर (विश्व धरोहर स्थल)
- 2 मार्च 2026 – नागलवाड़ी, बड़वानी (जनजातीय संस्कृति)
- 19 जुलाई 2026 – जगदीशपुर, भोपाल (आठवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट)
राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल सरकार को प्रदेश के हर क्षेत्र से जोड़ने का माध्यम बनी है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी स्थानीय स्तर पर योजनाओं की समीक्षा और विकास कार्यों का प्रत्यक्ष मूल्यांकन आसान हुआ है।
मध्यप्रदेश में राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठकों की यह परंपरा अब केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय अस्मिता और गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने का अभियान बन चुकी है। जगदीशपुर में होने वाली आठवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट इस बात का संकेत है कि सरकार विकास, विरासत और जनभागीदारी को एक साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है। यदि यह मॉडल इसी तरह जारी रहता है तो मध्यप्रदेश प्रशासनिक नवाचार के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण का भी राष्ट्रीय उदाहरण बन सकता है। (प्रकाश कुमार पाण्डेय)





