अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बीते कुछ हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। इसी बीच केंद्र सरकार ने एक ऐसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने का फैसला किया है, जो न सिर्फ सस्ता होगा बल्कि देश की तेल आयात पर निर्भरता भी कम करेगा। यह नया ईंधन E85 के नाम से बाजार में उतारा जाएगा।
महंगे पेट्रोल-डीजल के दौर में सरकार लेकर आई नया विकल्प
पिछले महीने से अब तक पेट्रोल की कीमतों में 7.38 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दामों में 7.52 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे समय में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली में E85 ईंधन डिस्पेंसिंग सुविधा का उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकार लोगों को सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
आखिर क्या है E85 और क्यों माना जा रहा भविष्य का ईंधन
E85 एक विशेष प्रकार का ईंधन है जिसमें 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार ने इसकी कीमत E20 पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर कम रखने का निर्णय लिया है। इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है, इसलिए उपभोक्ताओं को कम कीमत के रूप में इसका फायदा दिया जाएगा। फिलहाल E20 पेट्रोल की बिक्री जारी रहेगी और E85 को चरणबद्ध तरीके से विस्तार दिया जाएगा।
दिल्ली, मुंबई समेत इन शहरों में शुरू होंगे नए फ्यूल स्टेशन
सरकार की योजना के अनुसार शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर में 50 से 100 E85 फ्यूल स्टेशन शुरू किए जाएंगे। इसके बाद 2026 के अंत तक इनकी संख्या बढ़ाकर 500 और 2027 तक 5,000 स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग इस ईंधन का उपयोग कर सकें।
कच्चे तेल का आयात घटेगा, किसानों की आय बढ़ेगी
केंद्रीय मंत्री के अनुसार भारत का मौजूदा जीवाश्म ईंधन आयात बिल लगभग 120 अरब डॉलर है। इथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग से इस खर्च को कम करने में मदद मिलेगी। यदि देश में बनने वाले आधे दोपहिया और चारपहिया वाहन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस हो जाते हैं तो 311.8 करोड़ लीटर अतिरिक्त इथेनॉल की मांग पैदा होगी। इससे किसानों को लगभग 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय मिलने की संभावना है।
इथेनॉल मिशन से भारत को हुआ बड़ा आर्थिक फायदा
सरकार के मुताबिक वर्ष 2014 में देश में केवल 1.5 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण होता था, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इस अभियान के कारण अब तक 302 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात को प्रतिस्थापित किया गया है। इससे भारत को लगभग 1.84 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में सफलता मिली है। आने वाले वर्षों में E85 और E100 जैसे ईंधनों का विस्तार भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।